अहमदाबाद के चांगोदर स्थित श्रीमती एन.एम. पाडलिया फार्मेसी कॉलेज द्वारा 34वीं APSI साइंटिस्ट मीट-2026 और ‘ड्रग डिस्कवरी एंड डेवलपमेंट इन एग्रोबायोटेक्नोलॉजिकल एंड फार्मास्युटिकल साइंस’ पर अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कॉलेज के चेयरमैन और मैनेजिंग ट्रस्टी श्री मगनभाई पटेल की अध्यक्षता में अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन (AMA),वस्त्रापुर में आयोजित किया गया था।
कॉन्फ्रेंस की जानकारी देने से पहले इस कॉलेज के बारे में संक्षिप्त में बताना आवश्यक है। अहमदाबाद के चांगोदर में स्थित श्रीमती एन.एम.पाडलिया फार्मेसी कॉलेज हमारे देश के विशिष्ट फार्मा संस्थानों में से एक है। इस कॉलेज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग ट्रस्टी मगनभाई पटेल के कुशल प्रशासन के कारण आज यह कॉलेज का एम.फार्म (M.Pharm) का परिणाम 100% रहता है और यहाँ 100% प्लेसमेंट भी होता है।
यह फार्मा कॉलेज अपने विशाल इन्फ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक उपकरणों एवं सुरक्षा संसाधनों से सुसज्जित लैब्स, प्रोजेक्टर युक्त सेमिनार रूम, अनुभवी एवं विशेषज्ञ प्रोफेसरों की टीम,समर्पित टीचिंग एव नॉन-टीचिंग स्टाफ, ज्ञानवर्धक पुस्तकों से भरी लाइब्रेरी, वाई-फाई इंटरनेट सुविधा, छात्रों के लिए बीमा (Insurance) सुविधा, परिवहन सुविधा,बाहरी छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा, पीने के पानी के लिए आरओ (RO) प्लांट, निःशुल्क लॉकर सुविधा और आधुनिक सॉफ्टवेयर वाली 12 कंप्यूटर लैब्स जैसी विविध सुविधाओं से संपन्न है। साथ ही, पढाई में तेजस्वी और आर्थिक रूप से जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए संस्थान के ट्रस्ट द्वारा स्कॉलरशिप और छात्रों के माता-पिता को एस.एम.एस (SMS) या फोन के माध्यम से उनके बच्चों की पढ़ाई की जानकारी देने जैसी व्यवस्थाओं के कारण यह कॉलेज देश के अग्रणी कॉलेजों की श्रृंखला में आज अग्रेसर है। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जितेंद्रभाई भंगाले के माइक्रो मैनेजमेंट एव समस्त स्टाफ की अथाग मेहनत से यह संस्थान आज शैक्षिक और स्वास्थ्य क्षेत्र में देश के भावी विशेषज्ञों का एक प्रमुख फार्मा हब बन गया है।
यह दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस मुख्य हॉल के साथ-साथ विभिन्न सेमिनार हॉलों में विभाजित की गई थी। इस कॉन्फरन्स की सफलता के पीछे आयोजन समिति (Organizing Committee) के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनमें कॉलेज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर श्री मगनभाई पटेल, ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. जितेंद्रभाई भंगाले, कन्वीनर डॉ. के.एम. पटेल, APSI के अध्यक्ष डॉ. पी. कौशिक, कॉन्फ्रेंस को-ऑर्डिनेटर प्रो. एस.के. गुप्ता, डॉ. कृष्णकांत पटेल, प्रो. डॉ. भूमि रावल, प्रो. डॉ. सूरज चौहान और प्रो. डॉ. राम लाल राम शामिल थे।
कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष श्री जशुभाई चौधरी उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में राजस्थान विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व कुलपति डॉ. पी.सी. त्रिवेदी, APSI के अध्यक्ष प्रो. पी. कौशिक, APSI के उपाध्यक्ष डॉ. एस.ए. सालगरे, म्यूनिसिपल आर्ट्स एंड अर्बन साइंस कॉलेज, मेहसाणा के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. के.एम. पटेल, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जितेंद्र भंगाले, ज़ियोन ग्रुप ऑफ कंपनीज, वटवा के प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णकांत पटेल और कॉन्फरन्स को-ऑर्डिनेटर्स प्रो.डॉ.सूरज चौहान एवं प्रो.डॉ.भूमि रावल उपस्थित थे।
इस कॉन्फ्रेंस में सिंगापुर, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और मलेशिया के प्रतिनिधि वैश्विक युद्ध की स्थिति के कारण व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, इसलिए उन्होंने वर्चुअल प्रेजेंटेशन दिया था। जबकि नागालैंड, नेपाल जैसे विभिन्न देशों और भारत के राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड, झारखंड, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और गोवा जैसे प्रत्येक राज्य से कुल 1200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
कॉलेज के चेयरमैन मगनभाई पटेल एवं गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फरन्स का उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात, सभी गणमान्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ एव स्मृति चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर सम्मान किया गया। ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी और प्रिंसिपल डॉ.जितेंद्र भंगालेने कॉलेज की महत्वपूर्ण गतिविधियों एवं उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी, साथ ही उन्होंने कॉन्फरन्स के उद्देश्यों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
दीप प्रज्वलन के पश्चात कॉलेज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग ट्रस्टी मगनभाई पटेल ने अपने प्रासंगिक संबोधन में कहा कि आज दुनियाभर के लोगों में मानसिक और शारीरिक समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। तेजी से भागती जिंदगी का यह सबसे बड़ा नकारात्मक पहलू (माइनस पॉइंट) है। लोगों के पास अब एक-दूसरे के साथ बैठने या चर्चा-विमर्श करने के लिए समय नहीं है। परिवार में अकेले रहने की प्रवृत्ति,समाज में बढ़ता अलगाव, मन में चलनेवाला किसी न किसी प्रकार का द्वंद्व और अनुचित खान-पान की आदतों ने कई प्रकार की मानसिक और शारीरिक विकृतिया और असंतुलन को जन्म दिया है। आज किशोरों से लेकर मध्यम एवं वृद्ध आयु के प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी तनाव का शिकार होकर परेशानिया का सामना कर रहे हैं। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए आज मार्गदर्शक विशेषज्ञ एव सलाहकारों के परामर्श की अत्यंत आवश्यकता है।
वास्तव में, भागदौड़ भरी और अत्यंत तीव्र होती जा रही जिंदगी में मानसिक और शारीरिक समस्याओं का जाल और अधिक उलझता जा रहा है। रिश्तों का अकेलापन और सब कुछ जल्दी हासिल कर लेने की जल्दबाजी,ये सभी चीजें मनुष्य के मस्तिष्क को भ्रमित कर देती हैं और ऐसी स्थिति में यदि मनुष्य के हृदय पर कोई आघात होता है, तो वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है। वह चिंता और दुख में स्वयं को बर्बाद कर देता है।अब समय है ऐसे लोगों को इन तकलीफों से बाहर निकालने का। इसके लिए कई संस्थाएँ विभिन्न प्रकार के सेमिनार,सम्मेलनों और बैठकों का आयोजन कर रही हैं, जिनमें इस विषय के वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और विशेषज्ञों को आमंत्रित कर नई खोजों एव शोधों पर जोर दिया जा रहा है और इसमें सफलता भी मिली है।आज के इस भागदौड़ भरे युग में तनावपूर्ण जीवन जी रहा मनुष्य अपने स्वास्थ्य और अच्छे खान-पान के प्रति आलसी हो गया है, जिसके कारण मानव शरीर में अनेक रोगों ने घर कर लिया है।आज जब कई परिवारों का पैसा दवाओं और इलाज के पीछे खर्च हो रहा है, तब मानव समाज को स्वास्थ्य देखभाल और उत्तम आहार के प्रति जागरूक करने के लिए इस कॉन्फरन्स का आयोजन किया गया।
मगनभाई पटेल ने आगे कहा कि इस तरह के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों के आयोजन से नई खोजों और शोधों के माध्यम से स्वास्थ्य देखभाल और कृषि विकास क्षेत्र को गति मिलेगी और यह मानव समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। आज पूरा राष्ट्र नई खोज एव टेक्नोलॉजी के माध्यम से हर क्षेत्र में तीव्र विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है, जिसमें विज्ञान, नई तकनीक,फार्मा,आयुर्वेद,कृषि-ऊर्जा,स्वास्थ्य,हर्बल और शैक्षिक क्षेत्र आदि शामिल हैं। वर्तमान समय में मानव समाज में रोगों के बढ़ते प्रमाण के सामने दवा को अधिक प्रभावशाली बनाने के साथ-साथ उसे दुष्प्रभावों (साइड इफेक्ट्स) से मुक्त करने के लिए तकनीक का उपयोग कैसे किया जाए और उसे रोगी के लिए कैसे लाभदायक बनाया जाए, यही इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य है। हमें श्रेष्ठ स्वास्थ्य और श्रेष्ठ आहार के माध्यम से समाज को रोगमुक्त बनाकर प्रगति की राह पर आगे ले जाना जरुरी है।
मगनभाई पटेल ने आगे कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति की यह मनोकामना होती है कि वह वर्षों तक तंदुरस्त और ताजगी भरी अवस्था में रहे। वैज्ञानिकों द्वारा ऐसी शोध (Research) हो रही है जिससे यह मनोकामना पूर्ण हो सके। उल्लेखनीय है कि शारीरिक फिटनेस और सुंदरता के लिए आज विभिन्न कंपनियों द्वारा कई प्रकार की दवाओं का उत्पादन किया जा रहा है। हालांकि, हर उत्पाद में गुणवत्ता एक समान नहीं होती है। ऐसे उत्पादों का निर्माण भी होता रहता है जिनसे दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स) पैदा होते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक ऐसी दवाओं का उत्पादन करने के लिए शोध कर रहे हैं जिनसे वर्षों तक तंदुरस्ती और शारीरिक ताजगी बनी रहे और उनका कोई दुष्प्रभाव भी न हो। लंदन स्थित जेनेटिक्स विशेषज्ञ प्रोफेसर लिंडा पेट्रिज के अनुसार, वैज्ञानिक इस प्रकार की दवा के शोध के पहले चरण में सफलता प्राप्त कर आगे बढ़ रहे हैं।पूर्ण सफलता मिलने पर, प्रतिदिन एक गोली खाने से मध्यम आयु से बढ़ते उम्र की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। यह दवा शरीर को स्वस्थ रखने और कई रोगों से मुक्त रखने में उपयोगी सिद्ध होगी और इसका कोई विशेष दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) भी नहीं होगा। इस शोध की ओर विश्व स्तर पर ध्यान केंद्रित हुआ है। इस कॉन्फरन्स के माध्यम से उपस्थित वैज्ञानिकों, डॉक्टरों, प्रोफेसरों, विशेषज्ञों और फार्मा के छात्रों ने नई-नई खोज और शोधों के माध्यम से मानव समाज के स्वास्थ्य के प्रति अपनी जागरूकता और सक्रियता दिखाई है।
मगनभाई पटेल ने अपने हृदयस्पर्शी वक्तव्य के अंत में कहा कि राष्ट्र की स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने में फार्मेसी शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फार्मासिस्ट केवल दवाएं देनेवाले नहीं,बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के अभिन्न स्तंभ हैं। उन्होंने उपस्थित छात्रों और युवा पेशेवरों से अपने पेशे को मिशन और नैतिक जिम्मेदारी की भावना के साथ अपनाने का आग्रह किया और उन्हें याद दिलाया कि उनका कार्य अनगिनत लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव डालता है।
सामाजिक सेवा और सामुदायिक विकास में दशकों के अपने सफर का उल्लेख करते हुए, मगनभाईने समाज को कुछ वापस देने और अपने ज्ञान एवं संसाधनों का उपयोग जनकल्याण के लिए करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शैक्षणिक संस्थानों को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों को सक्षमता और करुणा के साथ वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करना चाहिए।
मगनभाई पटेल ने उपस्थित विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों से अपने पेशे को सेवा और नैतिक जिम्मेदारी की भावना के साथ अपनाने का आग्रह किया और उन्हें बताया कि उनका कार्य अनगिनत लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव डालता है। सामाजिक सेवा और समाज के विकास में अपने दशकों के अनुभव का उल्लेख करते हुए, उन्होंने समाज को वापस देने (Giving back to society) और अपने ज्ञान एवं संसाधनों का उपयोग जनकल्याण के लिए करने के महत्व पर बल दिया। अत्यंत आत्मीयता, विनम्रता और दृढ़ विश्वास के साथ दिए गए उनके वक्तव्य ने फार्मेसी के विद्यार्थियों को गहरी प्रेरणा दी और उन्हें इस बात से अवगत कराया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में फार्मासिस्टों की बड़ी अहम् भूमिकाएं होती है।
मगनभाई पटेल के संबोधन के पश्चात मुख्य अतिथि, फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के उपाध्यक्ष श्री जशुभाई चौधरी को सभा को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया। श्री जशुभाई चौधरी फार्मेसी क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं और गुजरात के मेहसाणा जिले के मूल निवासी हैं। बी.फार्म और एम.बी.ए. की योग्यता रखनेवाले श्री जशुभाई चौधरीने गुजरात स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार के रूप में करीब छह वर्षों तक अनुकरणीय सेवा दी है। इस प्रतिष्ठित पद पर उनकी नियुक्ति संपूर्ण गुजरात के फार्मेसी जगत के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। सभा को संबोधित करते हुए श्री जशुभाई चौधरी ने कॉन्फरन्स की कार्यप्रणाली पर एक प्रभावशाली और सूचनात्मक वक्तव्य दिया। उन्होंने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की और इसके ढांचे, भूमिकाए एवं जिम्मेदारियों के विषय में श्रोताओं को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। उन्होंने PCI द्वारा की गई नवीनतम पहलों और विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला, जिससे उपस्थित जनसमूह देश में फार्मेसी पेशे के भविष्य को आकार दे सके और आधुनिक परिवर्तनों और नियामक अपडेट्स (Regulatory Updates) से अवगत हो सके। उनके संबोधन को उपस्थित सभी लोगों द्वारा भारी उत्साह और प्रशंसा के साथ सराहा गया।
इस कॉन्फ्रेंस में विशिष्ट अतिथि के रूप में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर,राजस्थान के पूर्व कुलपति प्रो.डॉ.प्रवीणचंद्र सी. त्रिवेदीने गरिमामयी वक्तव्य दिया। वनस्पति विज्ञान (Plant Sciences) के क्षेत्र में एक विराट व्यक्तित्व रखनेवाले प्रो. त्रिवेदीने अमरिका की नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी से पी.एच.डी. और पोस्ट-डॉक्टरल योग्यता प्राप्त की है और वे एफ.एल.एस. (लंदन) सहित नौ प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के ‘फेलो’ हैं। उनके पास 40 वर्षों से अधिक का शिक्षण और शोध का अनुभव है और उन्होंने 350 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित किए हैं। उन्होंने 173 पुस्तकें भी लिखी हैं, जो इस विषय में एक विश्व रिकॉर्ड है। उन्होंने 44 पी.एच.डी. स्कॉलर्स का मार्गदर्शन भी किया है। वे पांच विश्वविद्यालयों के कुलपति के रूप में सेवा दे चुके हैं और 15 देशों में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में आमंत्रित वक्ता के रूप में व्याख्यान दे चुके हैं। वे बीरबल साहनी मेडल, डॉ. बी.पी. पाल मेमोरियल गोल्ड मेडल और राष्ट्र विभूषण अवार्ड सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित है।प्रो.डॉ.पी.सी. त्रिवेदीने विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए शोध, नवाचार और शैक्षणिक उत्कृष्टता के महत्व पर जोर देते हुए एक प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक वक्तव्य दिया। उन्होंने प्रतिभागियों, विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं और छात्रों को, समर्पण और ईमानदारी के साथ ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया। दशकों के विद्वत्तापूर्ण ज्ञान और अनुभव से समृद्ध उनका संबोधन उपस्थित सभी लोगों के लिए अत्यंत जानकारीपूर्ण और उपयोगी साबित हुआ।
डॉ. पी.सी. त्रिवेदीने इस बात का भी गहराई से विश्लेषण किया कि कैसे अत्याधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnological) हस्तक्षेप वैश्विक स्वास्थ्य एव पर्यावरणीय चुनौतियों का सक्रिय रूप से समाधान कर रहे हैं। कॉन्फरन्स के मुख्य विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए,प्रो.त्रिवेदीने एग्रो-बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्युटिकल साइंस के बीच के शक्तिशाली जुड़ाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक ड्रग डिस्कवरी (दवाओं की खोज) अब टिकाऊ और वनस्पति-आधारित जैविक प्रणालियों पर तेजी से निर्भर होती जा रही है।
प्रो. त्रिवेदी ने आगे बताया कि कैसे जेनेटिक इंजीनियरिंग, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स और बायोप्रोसेसिंग में हुई प्रगति लक्षित उपचार पद्धतियों (Targeted Therapies) और जीवनरक्षक दवाओं के विकास में क्रांति ला रही है। इसके अलावा, उनके संबोधन में खाद्य सुरक्षा, पर्यावरणीय लचीलेपन और फसलों की पोषण क्षमता को मजबूत करने में कृषि जैव-प्रौद्योगिकी (Agri-Biotechnology) की महत्वपूर्ण भूमिका की जांच की गई, जो बढ़ती जनसंख्या के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) के बुनियादी स्तंभ हैं। कृषि स्थिरता और क्लिनिकल नवाचार के बीच सेतु बनाकर, प्रो. त्रिवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य रोग प्रबंधन और समग्र वैश्विक कल्याण में दीर्घकालिक सुधार करना है।
डॉ. पी.सी.त्रिवेदी के वक्तव्य के बाद कॉन्फ्रेंस के कन्वीनर डॉ.के.एम.पटेल को आमंत्रित किया गया, जो स्नातकोत्तर स्तर पर वनस्पति विज्ञान (Botany) और जीव विज्ञान (Biology) में 36 वर्षों से अधिक का शैक्षणिक अनुभव रखनेवाले एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद हैं। वे म्यूनिसिपल आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज,मेहसाणा के प्राचार्य के रूप में सेवा दे चुके हैं और वर्तमान में श्रीमती एन.एम.पाडलिया फार्मेसी कॉलेज, अहमदाबाद में निदेशक (एकेडमिक एंड रिसर्च) तथा ग्लोबल एग्रोबायोटेक एंड फार्मा रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। वे पी.एच.डी. के साथ-साथ F.A.P.S. और F.E.S. जैसी प्रतिष्ठित उपाधियाँ भी रखते हैं।जैसी प्रतिष्ठित फेलोशिप रखते हैं। उन्होंने जैव विविधता (Biodiversity), इथनोबॉटनी और एलीलोपैथी के क्षेत्रों में शोध में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके लिए उन्हें APSI द्वारा गोल्ड मेडल सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं।
34वीं APSI अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के कन्वीनर के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. के.एम. पटेल ने सभी गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिनिधियों और प्रतिभागियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कॉन्फ्रेंस की विस्तृत जानकारी देते हुए इसके उद्देश्यों, विषय-वस्तु (Theme) और विभिन्न सत्रों के दौरान चर्चा किए जाने वाले विषयों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ऐसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय मंच के आयोजन के पीछे के विजन और इसे सफल बनाने के लिए आयोजन समिति के सामूहिक प्रयासों के बारे में बात की। डॉ. पटेल ने फार्मेसी, वनस्पति विज्ञान और लाइफ साइंसेज के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने में अनुसंधान और शैक्षिक सहयोग के महत्व पर जोर दिया और प्रतिभागियों को इस कॉन्फ्रेंस में ज्ञान के आदान-प्रदान के अवसरों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।” उन्होंने सभी प्रायोजकों, सहायक संस्थाओं और संकाय सदस्यों (फैकल्टी मेंबर्स) के योगदान की भी सराहना की, जिनके निरंतर प्रयासों से यह कार्यक्रम संभव हो पाया था। उनका संबोधन गहरी शैक्षणिक प्रतिबद्धता और विज्ञान एवं शिक्षा की प्रगति के प्रति सच्चे जुनून से ओत-प्रोत था, जिसे वहां उपस्थित सभी लोगों ने बहुत सराहा। इस सम्मेलन में तीन प्रतिष्ठित संस्थानों – ग्लोबल एग्रोबायोटेक एंड फार्मा रिसर्च फाउंडेशन, एकेडमी ऑफ प्लांट साइंसेज इंडिया (APSI) और ग्लोबल एकेडमी ऑफ बायोलॉजिकल एंड एप्लाइड साइंसेज (GABAS) द्वारा संयुक्त रूप से एक भव्य पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया था। इसके अतिरिक्त पाँच अन्य सहयोगी संस्थानों जैसे कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (नई दिल्ली), गुजरात स्टेट फार्मेसी काउंसिल (गुजरात), एसोसिएशन ऑफ फार्मास्युटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया, गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) और सोसाइटी ऑफ एथनोफार्माकोलॉजी का भी सहयोग रहा। यह समारोह एक यादगार अवसर था, जहाँ पादप विज्ञान (Plant Science), फार्मेसी, जैविक विज्ञान और एप्लाइड रिसर्च के क्षेत्रों में अनुकरणीय और उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को इन प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा सामूहिक रूप से सम्मानित किया गया।
इन संस्थानों द्वारा दिए गए पुरस्कार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक प्रगति और व्यावसायिक उपलब्धियों को बढ़ावा देने की उनकी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। समारोह के दौरान दिया गया प्रत्येक पुरस्कार अपने साथ सम्मानित करने वाली संस्था की प्रतिष्ठा और विरासत को समेटे हुए था, जो प्राप्तकर्ताओं के लिए अत्यंत गर्व की बात थी। यह समारोह बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से आयोजित किया गया था, जिसमें मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने श्रोताओं की उत्साहपूर्ण प्रशंसा के बीच प्रत्येक पुरस्कार विजेता को सम्मानित किया। यह अवसर न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का उत्सव था, बल्कि युवा शोधकर्ताओं, छात्रों और पेशेवरों के लिए अपने कार्य को और अधिक समर्पण, जुनून और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ाने के लिए एक शक्तिशाली प्रेरणा स्रोत भी बना। इस सम्मेलन में पुरस्कार समारोह के बाद, मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों के कर-कमलों द्वारा स्मृति ग्रंथ (Souvenir) का विमोचन किया गया। यह उद्घाटन समारोह के सबसे यादगार और प्रतिष्ठित क्षणों में से एक था। यहाँ उल्लेख करना आवश्यक है कि पिछले चार वर्षों के सम्मेलनों में विमोचित हुए सोवेनियर को किसी भी संस्था या कॉर्पोरेट कंपनी से विज्ञापन लिए बिना, संस्था के चेयरमैन श्री मगनभाई पटेल के मार्गदर्शन और कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जीतेंद्र भंगाले एवं उनकी टीम की अथक मेहनत से तैयार कर प्रकाशित किया जाता है। सोवेनियर के लिए कभी भी किसी भी प्रकार का फंड-रेजिंग कार्यक्रम नहीं रखा गया है। यह सोवेनियर केवल और केवल इकोनॉमी मैनेजमेंट और हाई-प्रोफाइल मैनेजमेंट के जरिए तैयार किया जाता है। इस सोवेनियर का विमोचन उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
यह सोवेनियर 11 से 13 अप्रैल 2026 के दौरान आयोजित 34वीं APSI साइंटिस्ट मीट-2026 और “ड्रग डिस्कवरी एंड डेवलपमेंट इन एग्रो-बायोटेक्नोलॉजी एंड फार्मास्युटिकल साइंसेज” विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का एक अविस्मरणीय दस्तावेज है। लगभग 300 पृष्ठों का यह सूचनात्मक सोवेनियर विज्ञान, शिक्षा जगत, उद्योग और सार्वजनिक सेवा क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियों के प्रेरणादायक संदेशों से सुसज्जित है। इसमें गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सम्मेलन आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत@2047’ के विजन को प्रतिबिंबित करता है। गुजरात राज्य के ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल मंत्री श्री ऋषिकेशभाई पटेल ने अपने संदेश में हर्बल दवाओं की बढ़ती वैश्विक मांग और तकनीकी एवं विनियामक मानकों (regulatory standards) को अपग्रेड करने की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं, गुजरात सरकार के जनजातीय विकास, खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के राज्य मंत्री श्री पी. सी. बरंडा ने इस सम्मेलन को वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए नवीन विचारों के आदान-प्रदान के एक उत्कृष्ट मंच के रूप में सराहा। शैक्षणिक और विनियामक क्षेत्र से, गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (GTU) की कुलपति डॉ. राजुल के. गज्जर ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन ड्रग डिस्कवरी और एग्रोबायोटेक्नोलॉजी में महत्वपूर्ण प्रगति लाने में योगदान देगा। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष श्री जशुभाई चौधरी ने हर्बल ड्रग रिसर्च के महत्व और आयुर्वेदिक उद्योग में तकनीकी उन्नयन (technological upgradation) की आवश्यकता पर जोर दिया। गुजरात स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष श्री भरतभाई बी. पटेल और ई.सी. सदस्य डॉ. ऋचा दयारामानी ने अपनी शुभकामनाएं दीं और उल्लेख किया कि यह सम्मेलन वैज्ञानिक उत्कृष्टता के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप है। APSI के अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम कौशिक ने आयोजन समिति की प्रशंसा की और समकालीन वैज्ञानिक चुनौतियों का सामना करने के लिए विभिन्न विषयों के बीच सहयोग (interdisciplinary collaboration) के महत्व पर जोर दिया। APSI के सचिव डॉ. एस. के. गुप्ता ने सभी प्रतिनिधियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया और वनस्पति एवं फार्मास्युटिकल विज्ञान में ज्ञान के आदान-प्रदान के महत्व को रेखांकित किया।
इसके अलावा अन्य गणमान्य व्यक्तियों से भी संदेश प्राप्त हुए थे, जिनमें एल.एन.सी.टी. विद्यापीठ, इंदौर के कुलपति प्रो. (डॉ.) विमल कुमार; मारवाड़ी कॉलेज, रांची के वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व विश्वविद्यालय प्रोफेसर और प्रमुख प्रो. (डॉ.) राम लाल राम; जिला रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां), मेहसाणा के एस. एन. झाला; सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम), राजकोट के सी. एम. पटेल (G.P.S.); पुलिस उपाधीक्षक (SC-ST सेल), मेहसाणा के जे. डी. कंसारा (G.P.S.); सहायक वन संरक्षक, साबरकांठा वन विभाग, हिम्मतनगर के वी. आर. चौहान; और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार) के वनस्पति वैज्ञानिक और अतिरिक्त निदेशक डॉ. लाल सिंहजी शामिल हैं।
इस सोवेनियर में अग्रणी फार्मास्युटिकल और लाइफ साइंस उद्योगों के बधाई संदेश भी शामिल हैं, जिनमें इंटास (INTAS) फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, ज़िओन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड, कोरोना रेमेडीज़ लिमिटेड, लिवमोर लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड, नियोवेंट थेराप्यूटिक्स, केयरविन फार्मास्युटिकल्स (गुज.) प्राइवेट लिमिटेड, रोजडेल फार्मा प्राइवेट लिमिटेड, बेलाविसो हेल्थटेक LLP, क्वालिहील (QualiHeal) फार्मास्युटिकल्स और लिफ्टअप क्रिएटर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन सभी संस्थानों ने फार्मास्युटिकल और वनस्पति विज्ञान में अनुसंधान और नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए इस कॉन्फ्रेंस की क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया। सोवेनियर की उपस्थित सभी लोगों द्वारा अत्यधिक सराहना की गई, क्योंकि यह आयोजन समिति, संकाय (फैकल्टी) और सभी सहयोगी संस्थानों के सामूहिक विजन, कड़ी मेहनत और समर्पण के एक स्थायी प्रमाण के रूप में सामने आया, जिन्होंने 34वीं APSI अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस को वास्तव में एक भव्य और यादगार अवसर बनाया।
पुरस्कार समारोह की पूर्णाहुति के साथ ही, 34वीं APSI अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह का आधिकारिक रूप से समापन हुआ। प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति, प्रेरणादायक संबोधनों और गौरवशाली पुरस्कार समारोह से समृद्ध यह उद्घाटन सत्र अत्यंत सफल रहा, जिसने आगामी कॉन्फ्रेंस के लिए एक उत्साहजनक और शैक्षणिक रूप से जीवंत वातावरण तैयार किया।
उद्घाटन समारोह का समापन कॉन्फ्रेंस कोऑर्डिनेटर प्रो. सूरज चौहान द्वारा प्रस्तुत हृदयस्पर्शी आभार प्रदर्शन (Vote of Thanks) के साथ किया गया। प्रो. चौहान ने सभी प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों, मुख्य अतिथियों, वक्ताओं और पुरस्कार विजेताओं के प्रति उनकी बहुमूल्य उपस्थिति और अपने ज्ञान एवं विचारों से सभा को समृद्ध करने के लिए निष्ठापूर्वक गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन समिति, संकाय सदस्यों (फैकल्टी), स्वयंसेवकों और सहायक संस्थानों को भी हृदय से धन्यवाद दिया, जिनके अथक प्रयासों और समर्पण के कारण उद्घाटन समारोह का सफल संचालन संभव हो पाया। इसके अलावा, उन्होंने प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए उन्हें इस कॉन्फ्रेंस की वास्तविक प्रेरक शक्ति बताया। प्रो. चौहान के आत्मीयतापूर्ण आभार प्रदर्शन को श्रोताओं ने गर्मजोशी से सराहा, और इसके साथ ही उद्घाटन समारोह का एक गरिमापूर्ण और यादगार समापन हुआ।
इस कॉन्फ्रेंस के द्वितीय की-नोट सत्र में निरमा यूनिवर्सिटी के फार्माकोग्नॉसी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. नियति आचार्य द्वारा वक्तव्य दिया गया। वे नेचुरल प्रोडक्ट ड्रग डिस्कवरी (प्राकृतिक स्रोतों से दवा की खोज) के क्षेत्र में 23 वर्षों से अधिक का शैक्षणिक और शोध अनुभव रखने वाली एक कुशल शोधकर्ता हैं, जिन्होंने कई फंडेड प्रोजेक्ट्स, शोध प्रकाशनों, पुस्तक अध्यायों और पी-एच.डी. मार्गदर्शन के माध्यम से व्यापक शैक्षणिक योगदान दिया है।
“अल्जाइमर रोग के प्रबंधन के लिए प्राकृतिक न्यूरोप्रोटेक्टेंट्स की क्षमता” विषय पर अपने व्याख्यान में उन्होंने अल्जाइमर रोग (AD) की एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें एमाइलॉयड-बीटा डिपोजिशन, न्यूरोफाइब्रिलरी टैंगल्स और न्यूरोडीजेनेरेशन (तंत्रिका तंत्र का क्षय) जैसे रोग के मुख्य लक्षणों पर प्रकाश डाला। इस सत्र में माय्रिसेटिन (Myricetin), एशियाटिक एसिड, बेकोसाइड्स और बर्जेनिन जैसे पादप-आधारित जैविक तत्वों को आशाजनक न्यूरोप्रोटेक्टिव एजेंटों (तंत्रिका तंत्र की रक्षा करने वाले तत्वों) के रूप में खोजने पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
डॉ. नियति आचार्य ने आगे बताया कि दवा को सीधे मस्तिष्क तक पहुँचाने और ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ (रक्त और मस्तिष्क के बीच का अवरोध) की सीमाओं को पार करने के लिए नैनो टेक्नोलॉजी आधारित ड्रग डिलीवरी सिस्टम, विशेष रूप से नैनोस्ट्रक्चर्ड लिपिड कैरियर्स (NLCs) जैसी उन्नत रणनीतियों पर चर्चा की गई है। प्रायोगिक निष्कर्ष दर्शाते हैं कि माय्रिसेटिन-लोडेड NLCs जैसे सर्वोत्तम फॉर्मूलेशन ने नैनोस्केल आकार (~89 nm), उच्च एंट्रैपमेंट दक्षता (~80%) और 2.77 गुना अधिक बायोअवेलेबिलिटी के साथ उल्लेखनीय रूप से बेहतर फार्माकोकाइनेटिक प्रदर्शन और मस्तिष्क को लक्षित (targeting) करने की क्षमता प्रदर्शित की थी। फार्माकोडायनामिक अध्ययनों ने अल्जाइमर मॉडल में संज्ञानात्मक कार्य (cognitive function) में सुधार, एमाइलॉयड-बीटा स्तर में कमी और न्यूरोट्रांसमीटर के नियमन की अधिक पुष्टि की है। इसके अतिरिक्त, यह भी रेखांकित किया गया कि सियालिक एसिड और ग्लूटाथियोन कंजुगेशन जैसे अभिनव दृष्टिकोणों के माध्यम से मस्तिष्क में दवा का वितरण 13 गुना तक बढ़ गया है। सत्र के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि जब प्राकृतिक जैविक तत्वों को उन्नत लक्षित वितरण प्रणालियों (Targeted Delivery Systems) के साथ जोड़ा जाता है, तो वे न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों के लिए अत्यंत प्रभावी उपचार साबित हो सकते हैं।
तीसरा की-नोट सत्र भक्त कवि नरसिंह मेहता विश्वविद्यालय, जूनागढ़ के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश रावलिया द्वारा लिया गया। वे 26 वर्षों से अधिक का शिक्षण और शोध अनुभव रखने वाले एक कुशल शिक्षाविद हैं। उनके “गिरनार वन्यजीव अभयारण्य के ब्रायोफाइट्स पर इकोसिस्टमैटिक अध्ययन” विषय पर दिए गए व्याख्यान में उन्होंने ब्रायोफाइट की विविधता और गुजरात के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उनके पर्यावरणीय वितरण का गहराई से विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने पर्यावरणीय परिवर्तनों के संकेतक के रूप में और एथ्नोमेडिसिन (पारंपरिक चिकित्सा) में ब्रायोफाइट्स के महत्व पर जोर दिया। 158 ग्रिडों में किए गए व्यवस्थित सर्वेक्षण के माध्यम से 61 प्रजातियां दर्ज की गईं। अध्ययन में यह पाया गया कि नमी और ऊंचाई ब्रायोफाइट के वितरण को प्रभावित करती है और केवल 3-4% क्षेत्र ही उनके लिए अत्यधिक अनुकूल है। उन्होंने इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
चौथा की-नोट सत्र डॉ. सत्यांशु कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, ICAR-DMAPR, आणंद) द्वारा दिया गया। उनके व्याख्यान “पारंपरिक दवाओं को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने के लिए औषधीय पौधों का स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल आधारित फिंगरप्रिंटिंग” में उन्होंने बताया कि विश्व की एक बड़ी आबादी हर्बल दवाओं पर निर्भर है। उन्होंने HPLC और LC-MS जैसी उन्नत तकनीकों के माध्यम से औषधीय पौधों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अश्वगंधा, कालमेघ और शतावरी जैसे पौधों के मानकीकरण और कैंसर रोधी गुण रखने वाले यौगिकों के विकास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन की शुरुआत डॉ. मिल्वी व्यास (असिस्टेंट प्रोफेसर, दहेज) के व्याख्यान से हुई। उनके विषय “अपशिष्ट जल से भारी धातुओं को हटाने के लिए तुलसी की क्षमता” में उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल पद्धति के रूप में ‘बायोसॉर्प्शन’ पर जोर दिया। प्रायोगिक निष्कर्ष दर्शाते हैं कि तुलसी के पत्तों का पाउडर पानी से कॉपर (Cu²⁺) जैसे जहरीले तत्वों को 77.8% तक सफलतापूर्वक हटा सकता है। इस दिन का दूसरा व्याख्यान दक्षिण कोरिया की योन्सी यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित शोधकर्ता डॉ. मोहम्मद हबीबुर रहमान ने ज़ूम (Zoom) के माध्यम से दिया। उनके विषय “आधुनिक ड्रग डिस्कवरी में औषधीय पौधे और प्राकृतिक उत्पाद” में उन्होंने समझाया कि कैसे प्राकृतिक तत्व आधुनिक चिकित्सा पद्धति के लिए आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने जटिल रोगों, विशेष रूप से न्यूरोलॉजिकल विकारों (मस्तिष्क संबंधी रोगों) के उपचार में फाइटोकेमिकल्स के महत्व पर जोर दिया।
इस दिन का तीसरा व्याख्यान सिंगापुर से डॉ. बाई सी यीन द्वारा वर्चुअली दिया गया। उनके विषय “पर्यावरणीय प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और कृषि पर इसका प्रभाव” में उन्होंने भारी धातुओं, कीटनाशकों और औद्योगिक उत्सर्जन के कारण मिट्टी और फसलों की सुरक्षा पर बढ़ते खतरों की समीक्षा की। उन्होंने चर्चा की कि कैसे बढ़ता तापमान और वर्षा का अनियमित पैटर्न कृषि स्थिरता और फसल वृद्धि चक्र को प्रभावित कर रहा है।
तत्पश्चात, कॉन्फ्रेंस के शैक्षणिक सत्रों की सफल पूर्णाहुति के प्रतीक के रूप में अत्यंत उत्साह और उपलब्धि की भावना के साथ समापन समारोह का आयोजन किया गया। मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. आर. सी. उपाध्याय, विशिष्ट अतिथि (Guest of Honor) के रूप में डॉ. पी. सी. त्रिवेदी, साथ ही डॉ. पी. कौशिक, डॉ. एस. ए. सलगाले, डॉ. जितेंद्र भंगाले और डॉ. भूमि रावल शामिल थे। इस पूरे कार्यक्रम का संचालन प्रो. सूरज चौहान द्वारा किया गया।
इस कॉन्फ्रेंस के समापन सत्र की शुरुआत में, मुख्य अतिथि डॉ. आर. सी. उपाध्याय ने प्रेरणादायक संबोधन दिया। वे एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और शोधकर्ता हैं, जो वर्तमान में गुजरात यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं और जर्मनी की FSU जेना (Jena) से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हैं। उन्होंने मशरूम रिसर्च निदेशालय, सोलन में ‘प्रधान वैज्ञानिक’ (Principal Scientist) के रूप में और बायोटेक्नोलॉजी के ‘विज़िटिंग प्रोफेसर’ के रूप में सेवा देकर बायोटेक्नोलॉजी और टिकाऊ अनुसंधान के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान दिया है।
डॉ. उपाध्याय ने अपने वक्तव्य में मशरूम अनुसंधान के क्षेत्र में अपने व्यापक कार्य अनुभवों को साझा किया और टिकाऊ कृषि तथा उद्यमिता में इसके महत्व पर जोर दिया। उन्होंने रेखांकित किया कि मशरूम की खेती कैसे आय उत्पन्न करने का एक सक्षम स्रोत बन सकती है, विशेष रूप से युवाओं के लिए, क्योंकि इसमें कम निवेश की आवश्यकता होती है और इसका पोषण एवं व्यावसायिक मूल्य बहुत अधिक है। उन्होंने मशरूम की खेती की तकनीक में हुई प्रगति के बारे में विस्तार से चर्चा की और युवा शोधकर्ताओं तथा छात्रों को इस क्षेत्र में नए दृष्टिकोण खोजने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके संबोधन ने कौशल विकास, वैज्ञानिक नवाचार और कृषि-आधारित तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भरता के महत्व पर बल देकर श्रोताओं को प्रेरित किया, जिसका उपस्थित सभी लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा।
समापन समारोह की शुरुआत कॉन्फ्रेंस की मुख्य झलकियाँ और विवरणों की एक संक्षिप्त रूपरेखा के साथ हुई, जिसमें की-नोट वक्ताओं, प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और प्रतिभागियों के बहुमूल्य योगदान की सराहना की गई। आयोजन समिति ने सभी सहयोगियों को उनकी सक्रिय भागीदारी और समर्थन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। इस सत्र में वैज्ञानिक चर्चाओं और कॉन्फ्रेंस के समग्र प्रभाव के बारे में फीडबैक (प्रतिक्रियाएँ) भी प्रस्तुत की गईं, जिसके बाद उत्कृष्ट प्रस्तुतियों की प्रशंसा और उन्हें सम्मानित किया गया।
समापन समारोह का अंत एक सकारात्मक और प्रेरणादायक नोट के साथ हुआ, जिसने निरंतर अनुसंधान सहयोग और शैक्षणिक उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत बनाया।
एकेडमी ऑफ प्लांट साइंसेज इंडिया (APSI) के अध्यक्ष डॉ. पुरुषोत्तम कौशिक ने समापन भाषण दिया और कॉन्फ्रेंस की सफलता में अमूल्य योगदान देने के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों, की-नोट वक्ताओं, आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान देखे गए वैज्ञानिक विमर्श और सहयोग की भावना की सराहना की। उन्होंने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि 35वीं APSI कॉन्फ्रेंस डॉल्फिन इंस्टीट्यूट, देहरादून में आयोजित की जाएगी, और सभी प्रतिभागियों को अगली कॉन्फ्रेंस में भी अपनी शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखने के लिए आमंत्रित किया।
तत्पश्चात, संचालक ने प्रतिभागियों को कॉन्फ्रेंस के बारे में अपने अनुभव और प्रतिक्रियाएँ साझा करने के लिए आमंत्रित किया। इस संवादात्मक सत्र में, श्रीमती एन. एम. पडालिया फार्मेसी कॉलेज के श्री सुजान घांची और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर (वरिष्ठ) डॉ. हरीश ने अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रियाएँ दीं। उन्होंने सुव्यवस्थित सत्रों, प्रेरणादायक की-नोट व्याख्यानों और विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ जुड़ने के अवसर के लिए प्रशंसा व्यक्त की। दोनों वक्ताओं ने रेखांकित किया कि इस कॉन्फ्रेंस ने ज्ञान के आदान-प्रदान और शैक्षणिक समृद्धि के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया है, और कार्यक्रम को भव्य रूप से सफल बनाने के लिए आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की।
तत्पश्चात, पूरी कॉन्फ्रेंस के दौरान ओरल (मौखिक) और पोस्टर प्रेजेंटेशन के मूल्यांकन में उनके अमूल्य योगदान और समर्पित प्रयासों की सराहना के रूप में सभी 12 ट्रैक के जूरी सदस्यों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। आयोजन समिति ने वैज्ञानिक कार्यों का निष्पक्ष और सटीक मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए उनके समय, विशेषज्ञता और प्रतिबद्धता के प्रति निष्ठापूर्वक आभार व्यक्त किया।
इसके अतिरिक्त, सभी 12 ट्रैक में ओरल (मौखिक) और पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता के विजेताओं को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य और प्रस्तुतियों के लिए पदक प्रदान किए गए। संबंधित ट्रैक और जूरी सदस्यों का विवरण नीचे दिया गया है।
इस अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की सफलता के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया गया था, जिसका नेतृत्व कॉलेज के ही अनुभवी संकाय सदस्यों (फैकल्टी) और छात्रों द्वारा किया गया था। इसमें पंजीकरण समिति की जिम्मेदारी प्रो. कृष्णा तरेटिया ने संभाली थी, जिसमें उन्हें छात्र धवल डी. दर्जी, दृष्टि बी. पटेल, प्रांशु एच. दर्जी, लोचन आर. बोरोले, नयन वी. पटेल, देव एन. पटेल, पार्थ जे. उपाध्याय और दर्शन एन. दायमा का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ। वैज्ञानिक समिति का नेतृत्व डॉ. नुसरत शेख और प्रो. चेली साधवानी ने किया था, जिन्हें मारियल शेख, श्वेता आर. तिवारी, घांची साकिब और देव ए. सिंह द्वारा सहायता प्रदान की गई थी। भोजन समिति का कार्यभार प्रो. भावना पी. जाधव ने संभाला था, जिसमें यशदीप ए. परमार, साहिल आर. पटेल, हर्षराज बी. परमार, प्रिंस बी. ठाकर, कुश एम. राणा, करण पी. पटेल, ध्रुवराज सिंह डी. राठौड़ और मानव एल. डोडिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्टेज समिति का संचालन प्रो. नेहल त्रांबडिया और प्रो. पल्लवी बाराबडे द्वारा किया गया था, जिसमें छात्र सदस्यों के रूप में वैष्णवी वी. पाटिल, यश एस. पटेल, कार्तिक राठौड़, हेतवी एस. पटेल, विश्व एम. पटेल, सानिया एस. पठान, प्रियांशी ए. पटेल, श्रेया चावड़ा, सोनल ठाकुर, ध्रुवी जे. बगडा, हर्षिल आर. पटेल, चार्मी ए. प्रजापति, हीर डी. प्रजापति, रिया एन. मिस्त्री, मयुरी एन. चौहान, हेली बी. प्रजापति, ध्वनि एन. पटेल, शीतल जे. रावल, मेश्वा एच. दर्जी, खुशी जे. माली, प्रियांशी एस. पाल और हेतवी आर. पटेल शामिल थे।
प्रमाणपत्र समिति का संचालन प्रो. गजाला वाई. अंसारी और प्रो. शमीम एन. द्वारा किया गया था, जिन्हें मनीषा यादव, बंसरी असोदरिया, प्रतीक्षा एस. मिश्रा, वृषि बी. पटेल, जयवीरसिंह वी. गोहिल और धारा आर. पटेल का सहयोग प्राप्त हुआ।
मीडिया समिति का नेतृत्व प्रो. फोरम एच. पटेल और प्रो. सुषमा सी. झीलप ने किया था, जिसमें देव के. पटेल, यज्ञ वी. वाघेला, नील सी. लाडाणी, वृषभ एम. गज्जर, वीरेंद्रसिंह एच. मसाणी, प्रिंस एस. रोहित, कामाया पी. पंचाल, प्रांशी आर. पटेल, कौशल डी. मकवाणा और गुलाम जिलानी आर. शेख का सहयोग प्राप्त हुआ। साउंड समिति की देखरेख डॉ. विश्व एस. पटेल द्वारा की गई थी, जिसमें कृष एच. पटेल, निसर्ग आचार्य, प्रतीक सी. मकवाणा और जयेश आर. प्रजापति ने सहायता की और अंत में, आवास समिति का संचालन प्रो. कीर्तन पी. भावसार ने किया, जिसमें टीम के सदस्यों के रूप में प्रितंश एन. पटेल,यश एस. खलाणे, ध्रुव वी. राठौड़ और दर्शन जे. मकवाणा शामिल थे।
इस कॉन्फ्रेंस का औपचारिक समापन कॉन्फ्रेंस समन्वयक डॉ. भूमि रावल द्वारा प्रस्तुत हृदयस्पर्शी आभार प्रदर्शन के साथ किया गया। उन्होंने संस्था के इस कॉलेज के चेरमेन एव मेनेजिंग ट्रस्टी श्री मगनभाई पटेल,मानद सचिव राजेशभाई कालरीया और संस्था के प्रबंधक घनश्यामभाई पटेल के प्रति भी इस कॉन्फ्रेंस को सफल बनाने के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।उन्होंने मुख्य अतिथि, की-नोट वक्ताओं, गणमान्य व्यक्तियों, आयोजन समिति, जूरी सदस्यों और सभी प्रतिभागियों के उनके अमूल्य योगदान और उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए निष्ठापूर्वक आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस आयोजन को भव्य रूप से सफल बनाने के लिए सभी का धन्यवाद किया। पूरे कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसके बाद कॉन्फ्रेंस समन्वयक डॉ. सूरज चौहान द्वारा एक आत्मीय और हृदयस्पर्शी विदाई संदेश दिया गया। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों की सक्रिय भागीदारी के लिए उनका आभार माना और भविष्य के शैक्षणिक प्रयासों में निरंतर सहयोग बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
इस कॉन्फ्रेंस के समापन के बाद तीसरे दिन, कॉलेज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग ट्रस्टी मगनभाई पटेल द्वारा आमंत्रित गणमान्य व्यक्तियों के लिए एक रात्रिभोज का भी आयोजन किया गया था। डिनर के दौरान सभी गणमान्य व्यक्तियों ने इस कॉन्फ्रेंस को अपने जीवन का एक यादगार क्षण बताया और इसके लिए उन्होंने मगनभाई पटेल के नेतृत्व की सराहना की। साथ ही, उन्होंने इस कॉलेज को न केवल देश की, बल्कि विश्व की अग्रणी (प्रथम श्रेणी की) संस्थाओं में से एक बताया। श्रीमती एन.एम.पाडलिया फार्मेसी कॉलेज द्वारा आयोजित यह कॉन्फरन्स देश और मानव समाज के लिए एक क्रांतिकारी खोज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


