गर्मियों की छुट्टियों की यादें अब सिर्फ कहानियों में बची हैं! Summer Vacation के नाम पर बच्चों पर बढ़ता दबाव, क्या सही है?

गर्मियों की छुट्टियों की यादें अब सिर्फ कहानियों में बची हैं! Summer Vacation के नाम पर बच्चों पर बढ़ता दबाव, क्या सही है?

Summer Holidays Pressure on Kids: गर्मियों की छुट्टियां सुनते ही दिमाग में आम, आमरस, ठंडी छांव, नानी का घर और दोपहर की नींद का ख्याल आता है। पर असलियत में ये छुट्टियां अब छुट्टियां कम और फुल-टाइम प्रोजेक्ट ज्यादा बन चुकी हैं। पहले छुट्टियों का मतलब होता था बेटा, बस खेलो, खाओ और सो जाओ। अब मतलब है बेटा, ये समर होमवर्क पूरा करो, ये ऑनलाइन क्लास अटेंड करो और ये नई स्किल भी सीख लो, क्योंकि पड़ोस का चिंटू तो पहले ही कोडिंग सीख चुका है।

स्तंभकार मुकेश कुमार बिस्सा के अनुसार, गर्मियों की छुट्टियां अब वो नहीं रहीं, जो कभी थीं। अब उनमें न वो बेफिक्री है, न वो मस्ती। आज की छुट्टियां हमें ये सिखा रही हैं कि आराम करना भी एक ‘स्किल’ यानी कौशल बन चुका है। और बच्चे मन ही मन यही सोचते हैं  काश। एक दिन ऐसी छुट्टी मिल जाए, जिसमें कोई होमवर्क, कोई क्लास और कोई समर कैंप न हो।

होमवर्क का बढ़ता बोझ (The Burden of Homework) 

जैसे ही स्कूल बंद होता है, बच्चे खुश होते हैं। लेकिन खुशी ज्यादा देर टिकती नहीं, क्योंकि अगले ही दिन स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज आ जाता है “Dear Parents, Kindly ensure that your ward completes the holiday homework sincerely.” और फिर जो हॉलिडे होमवर्क आता है, वो इतना होता है कि बच्चे सोचते हैं ” काश! स्कूल ही खुला रहता, कम से कम वहां इतना काम तो नहीं मिलता!”

चार्ट बनाओ, मॉडल बनाओ, प्रोजेक्ट बनाओ आदि। ऐसा लगता है बच्चा नहीं, कोई छोटा इंजीनियर घर में काम कर रहा है।

गर्मी की मार और घर में कैद बचपन (The Summer Heat and Trapped Childhood) 

अब गर्मी इतनी होती है कि पंखा भी खुद छुट्टी पर जाने का मन बना लेता है। एसी के बिना इंसान नहीं, बल्कि उबलता हुआ प्राणी बन जाता है। मां कहती हैं बाहर मत जाओ, लू लग जाएगी। और बच्चा सोचता है  तो फिर छुट्टियां घर में कैद होकर बिताने के लिए मिली हैं क्या?

वर्चुअल दुनिया का समर कैंप (Virtual World’s Summer Camp) 

पहले बच्चे गली में क्रिकेट खेलते थे, अब मोबाइल में गेम खेलते हैं। वहीं मां चिल्लाती हैं  ” दिनभर फोन में घुसे रहते हो!” और बच्चा जवाब देता है ” मां, गेम नहीं खेल रहा हूं। यह मेरा ‘ऑनलाइन समर कैंप’ है। ” इसके चलते अब न कोई पसीना, न धूल, बस मोबाइल पर उंगलियां चलती हैं और आंखें लाल होती हैं।

छुट्टियों में भी स्कूल जैसा अनुशासन (School-like Discipline during Holidays) 

आजकल छुट्टियों में भी टाइम-टेबल बन जाता है। सुबह डांस क्लास, दोपहर में अबेकस, शाम को स्विमिंग, रात को होमवर्क। समर क्लासेज ने बहुत नुकसान किया है। बच्चा थककर सोचता है ” ये छुट्टियां हैं या दूसरा स्कूल?”

खान-पान पर बंदिशें (Restrictions on Diet) 

गर्मी में आम, तरबूज, आइसक्रीम का मौसम होता है। पर अब हर घर में एक डायलॉग फिक्स है ज्यादा मत खाओ, गला खराब हो जाएगा। बच्चा सोचता है ” अगर यही सब नहीं खाना, तो फिर गर्मी का फायदा क्या?”

अब सिर्फ ‘इमोशनल मेमोरी’ (Technology vs Nostalgia) 

  • एक जमाना था जब छुट्टी का मतलब था- नानी का घर।
  • अब छुट्टी का मतलब- नेटवर्क अच्छा कहां मिलता है?
  • नानी आज भी इंतजार करती हैं, पर बच्चे कहते हैं- वहां वाई-फाई है क्या?
  • और इस एक सवाल ने पूरे बचपन की लय को झकझोर दिया है।

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