यूपी भाजपा के अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई प्रदेश टीम को लेकर मंथन पूरा हो गया है। बुधवार को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन-महामंत्री संगठन बीएल संतोष के साथ करीब 2 घंटे बैठक हुई। पंकज चौधरी-प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह की मौजूदगी में ज्यादातर नामों पर सहमति बनी। हालांकि, मोर्चों के अध्यक्षों और क्षेत्रीय अध्यक्षों को लेकर अभी पेंच फंसा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्षों के नामों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। अब 22 मई को फिर दिल्ली में बैठक होगी। इसके बाद 30 मई तक नई टीम की घोषणा हो सकती है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 40-50% नए चेहरों को मौका सूत्रों की मानें तो इस बार प्रदेश टीम में 40 से 50 फीसदी नए चेहरों को जगह मिल सकती है। लंबे समय से संगठन में जमे कई नेताओं की छुट्टी भी हो सकती है। भाजपा विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने में जुटी है। 14 दिसंबर 2025 को बने थे प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 14 दिसंबर 2025 को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला था। इसके बाद से ही नई टीम के गठन को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह अब तक एक दर्जन से ज्यादा बार दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से चर्चा कर चुके हैं। RSS की पसंद का भी ध्यान यूपी भाजपा की मौजूदा संगठनात्मक टीम का गठन 25 मार्च, 2023 में हुआ था। भूपेंद्र चौधरी प्रदेश अध्यक्ष थे। पार्टी का नियम है कि हर 3 साल पर नए सदस्यों को चुना जाए। इसलिए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को अपनी नई टीम बनानी है। विधानसभा-2027 चुनाव के चलते प्रदेश टीम में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बैठाने की कोशिश हो रही है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक नई टीम तय करते समय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और RSS की राय को भी इंपॉर्टेंस दी जा रही है। इसी वजह से लिस्ट जारी करने में देरी हो रही है। पदाधिकारियों ने कहा- हमें बदला तो नुकसान होगा भाजपा में मौजूदा पदाधिकारी अपनी कुर्सी बचाने के लिए एक्टिव हो गए हैं। प्रदेश महामंत्री-उपाध्यक्ष लेवल के नेता लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भाजपा-संघ के बड़े नेताओं से जुगाड़ लगा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें संगठन और क्षेत्र की अच्छी समझ है। मंडल से लेकर जिले तक का अनुभव उनके पास है। ऐसे में चुनाव से पहले उन्हें हटाना पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। नेताओं का यह भी तर्क है कि उनकी जाति के किसी नए चेहरे को लाने से पार्टी को कोई बड़ा फायदा नहीं मिलेगा। जाति फैक्टर को ध्यान में रखकर बनानी होगी टीम वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश बाजपेयी कहते हैं- भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए टीम बनानी चाहिए। ब्राह्मणों की नाराजगी, लोध-कुर्मी टकराव सहित अन्य राजनीतिक लाभ-हानि भी देखनी होगी। अखिलेश बाजपेयी का मानना है, बसपा सुप्रीमो मायावती जिस प्रकार दलित और ब्राह्मणों को लेकर सक्रिय हुई है, वह भी भाजपा की चिंता है। भाजपा सबका-साथ सबका विकास की बात करती है, लेकिन अभी तक उसका दलित प्रदेश अध्यक्ष नहीं बना है।


