जयपुर के 27 थानों के इमरजेंसी में नहीं लगते फोन, जनता कंट्रोल रूम के भरोसे शहर

जयपुर के 27 थानों के इमरजेंसी में नहीं लगते फोन, जनता कंट्रोल रूम के भरोसे शहर

Jaipur Police Landline Down: पुलिस आयुक्तालय जयपुर के 27 थानों में लैंडलाइन टेलीफोन खराब होने का मामला सामने आया है। पुलिस नियंत्रण कक्ष की ओर से ली गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि चारों जिलों के कई थानों के फोन बंद पड़े हैं, जिससे आमजन को आपात स्थिति में पुलिस सहायता मिलने में परेशानी हो रही है।
पुलिस नियंत्रण कक्ष ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को बंद पड़े लैंडलाइन टेलीफोन तत्काल दुरुस्त करवाने के निर्देश दिए हैं। किसी थाने में लाइन खराब है तो किसी थाने का बिल जमा नहीं होना बताया जा रहा है।

नहीं हो पाता संपर्क, देरी से पहुंचती है सूचना

क्षेत्र की कॉलोनियों और मुख्य मार्गों से संबंधित थाना पुलिस के नंबर गायब हैं। इसके चलते लोग अपराध होने या फिर आपात स्थिति में थाना पुलिस से संपर्क करने का प्रयास करते हैं। नंबर नहीं मिलने पर पुलिस कन्ट्रोल रूम 100 व 112 पर संपर्क करते हैं। पीड़ित नंबर लगाते-लगाते थक जाता है, लेकिन फोन नहीं लगता।
पुनः कन्ट्रोल रूम में संपर्क करने पर संबंधित थाना अधिकारी का मोबाइल नंबर दिया जाता है। लेकिन रात्रि गश्त या फिर दिनभर ड्यूटी पर रहने के कारण कई बार उस नम्बर पर भी संपर्क नहीं हो पता हैं। इसके चलते कन्ट्रोल रूम ने बंद पड़े फोन वाले थानों की जानकारी जुटाई है। ताकि समय पर पुलिस को सूचना मिल सकें।

इन पुलिस थानों के फोन खराब मिले

जिला जयपुर (उत्तर): 11 थाने शास्त्रीनगर, विद्याधर नगर कोतवाली, जालूपुरा, माणक चौक, सुभाष चौक, रामगंज, गलता गैट, आमेर, ब्रह्मपुरी और महिला थाना

जिला जयपुर (दक्षिण): 9 थाने चाकसू कोटखावदा, मानसरोवर, शिप्रापथ, मुहाना, ज्योति नगर, विधायकपुरी, श्याम नगर और नारायण विहार थाना

जिला जयपुर (पूर्व): 2 थाने बजाज नगर और प्रताप नगर

जिला जयपुर (पश्चिम): 5 थाने वैशाली नगर, बगरू झोटवाड़ा, करधनी और हरमाड़ा

बीट प्रणाली कागजों में

पूर्व में जयपुर शहर के थाना इलाकों में कांस्टेबलों को उनके क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर बीट कांस्टेबल का नाम, थाना और संपर्क नंबर आदि अंकित कराने के आदेश जारी हुए थे। जिसका मुख्य उद्देश्य आमजन का पुलिस से सीधे संवाद आसानी से हो सके। सार्वजनिक स्थानों पर बीट कांस्टेबल और संबंधित पुलिस थाने का फोन नंबर लिखा होता था। लेकिन अब यह सिस्टम कागजों में सिमट गया है। दीवार पर अंकित नंबरों पर संपर्क करने पर संबंधित कांस्टे​बल अब उस पुलिस थाने में कार्यरत ही नहीं होने के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में पुलिस की आमजन से दूरी भी अपराधों में भी बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण बन गई है

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