Sleeping Hours : 6.4 से 7.8 घंटे की नींद का सेहत पर गहरा असर पड़ता है, शोध में पता चला

Sleeping Hours : 6.4 से 7.8 घंटे की नींद का सेहत पर गहरा असर पड़ता है, शोध में पता चला

How Many Hours to Sleep : आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हमारे सोने का समय बिगड़ गया है। कोई काम के चक्कर में बहुत कम सो पाता है, तो कोई छुट्टी वाले दिन जरूरत से ज्यादा सोता रहता है। Nature जर्नल की एक नई मेडिकल रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बहुत कम या बहुत ज्यादा सोना, दोनों ही आपकी सेहत के लिए खतरनाक हैं।

यह आदत आपके दिमाग, दिल और फेफड़ों को तेजी से कमजोर और बूढ़ा बना देती है। आइए जानते हैं कि क्या है ये नई रिसर्च के अनुसार, कितनी देर तक सोना फायदेमंद होता है।

क्या है ये नई रिसर्च?

यूके बायोबैंक (UK Biobank) के लगभग 5 लाख लोगों के डेटा पर की गई इस रिसर्च में देखा गया कि सोने के घंटों का सीधा रिश्ता हमारे लंबे जीवन और अंगों से है।

रिसर्च के मुताबिक, जो लोग रोजाना 6.4 घंटे से कम सोते हैं या फिर 7.8 घंटे से ज्यादा की नींद लेते हैं, उनका दिमाग और शरीर तेजी से बुढ़ापे की तरफ बढ़ने लगता है। लंबी उम्र के लिए 6.4 से 7.8 घंटे की नींद को सबसे बढ़िया माना गया है। इससे कम या ज्यादा सोना दिमाग को जल्दी बूढ़ा बना सकता है।

दिमाग पर क्या असर पड़ता है?

नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के मुताबिक, अच्छी और गहरी नींद हमारे जिंदा रहने के लिए उतनी ही जरूरी है जितना कि खाना और पानी। जो लोग रोजाना 6.4 घंटे से कम सोते हैं या 7.8 घंटे से ज्यादा सोते हैं, उनमें दिमाग के सिकुड़ने और डिमेंशिया जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ा हुआ पाया गया।

दिल और फेफड़ों पर असर

जरूरत से कम नींद लेने से शरीर में सूजन बढ़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, बहुत ज्यादा सोने से फेफड़ों की क्षमता को कमजोर होती है और सांस से जुड़ी बीमारियों का कारण बनती है। लगातार गलत स्लीप साइकिल दिल की बीमारियों से होने वाली मौत के खतरे को काफी हद तक बढ़ा देती है।

कितनी देर तक सोना सही है?

एक वयस्क के लिए रोजाना 6.4 से 7.8 घंटे की नियमित नींद सबसे बेस्ट है। अगर आप इससे कम या ज्यादा सो रहे हैं, तो यह आपकी उम्र को कम कर रहा है। अपना स्लीप शेड्यूल सही करें ताकि आपका दिल, दिमाग और फेफड़े हमेशा जवान और तंदुरुस्त रहें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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