अमेरिका-इजराइल के साथ जंग की आहट से परेशान हुआ ईरान, अब चीन से मांगी मदद

अमेरिका-इजराइल के साथ जंग की आहट से परेशान हुआ ईरान, अब चीन से मांगी मदद

अमेरिका-इजराइल के साथ फिर से जंग छिड़ने की आहट से ईरान परेशान हो गया है। अब इस मामले में उसने चीन से भी मदद की गुहार लगाई है। इस बीच, ईरान ने हॉर्मुज को लेकर भी बयान जारी किया है।

ईरान ने कहा है कि वह ओमान के सहयोग से हॉर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। साथ ही यह भी कहा कि चीन को यह अधिकार है कि वह अमेरिका से इस क्षेत्र में अपना शत्रुतापूर्ण रवैया रोकने के लिए कहे।

ईरान ने हॉर्मुज को बताया अपना आंतरिक मुद्दा

ईरान लंबे समय से हॉर्मुज को अपना आंतरिक मुद्दा मानता आया है। अब ओमान के साथ मिलकर सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का प्रस्ताव दिया गया है। ओमान दोनों देशों से अच्छे संबंध रखता है, इसलिए यह कदम स्थिरता ला सकता है।

ईरानी अधिकारी का कहना है कि दोनों देश मिलकर जहाजों की सुरक्षा करेंगे ताकि कोई गड़बड़ी न हो।यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चरम पर है।

अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर रोक लगाई है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। ईरान का दावा है कि ओमान के सहयोग से स्ट्रेट में शांति बनी रहेगी।

चीन का अमेरिका पर तीखा हमला

चीन ने साफ कहा है कि अमेरिका को इस इलाके में अपनी शत्रुतापूर्ण गतिविधियां बंद करनी चाहिए। चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और हॉर्मुज से गुजरने वाला उसका तेल सप्लाई बहुत महत्वपूर्ण है।

बीजिंग का कहना है कि अमेरिका की वजह से पूरा क्षेत्र अस्थिर हो रहा है। चीन के मुताबिक, अमेरिका को इस क्षेत्र से दूर रहना चाहिए और ईरान के साथ बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

एक चीनी अधिकारी ने कहा कि कोई भी देश अकेले इस जलमार्ग पर कब्जा नहीं कर सकता। चीन ने ईरान के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखते हुए भी शांति की अपील की है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा

हॉर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। अगर यहां कोई समस्या हुई तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा क्योंकि हमारा बड़ा हिस्सा तेल यहां से आता है।

ईरान ने पहले ही कुछ चीनी जहाजों को पास करने की अनुमति दी है, लेकिन बाकी देशों के लिए सख्त नियम बनाए हैं। ओमान के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था करने से ईरान को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव कम होगा।

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