क्या कम उम्र की लड़कियों के शरीर के बाल हटाना सुरक्षित है? जानिए क्या कहते हैं स्किन स्पेशलिस्ट 

क्या कम उम्र की लड़कियों के शरीर के बाल हटाना सुरक्षित है? जानिए क्या कहते हैं स्किन स्पेशलिस्ट 

Safe Hair Removal For Teenage Girls: सोशल मीडिया पर आजकल बच्चों के स्किन केयर और बॉडी हेयर (शरीर के बाल) हटाने को लेकर कई वीडियो वायरल होते हैं। अक्सर लोग इन वीडियोज को देखने के बाद माता-पिता को काफी जज करते हैं और बच्चों की स्किन को लेकर चिंता जताते हैं। इसी विषय पर इंस्टाग्राम चैनल dr_sanyogita पर स्किन डॉक्टर (Dermatologist) ने एक वीडियो शेयर कर लोगों को जागरूक किया है। आइए जानते हैं कि छोटे बच्चों के बॉडी हेयर रिमूव करने को लेकर एक्सपर्ट की क्या राय है।

बॉडी हेयर हटाने को जज न करें (Do Not Judge Body Hair Removal)

एक डर्मेटोलॉजिस्ट और एक मां होने के नाते डॉ. संयोगिता का मानना आम लोगों से थोड़ा अलग है। वो कहती हैं, हमें दूसरों को जज करने के बजाय यह सोचना चाहिए कि इस उम्र में बच्ची का आत्मविश्वास (Confidence) कितना जरूरी है। अगर आपकी बेटी अपने शरीर या चेहरे के अनचाहे बाल हटाने के लिए कह रही है, तो उसकी बात को नजरअंदाज न करें।

कॉन्फिडेंस सबसे ज्यादा जरूरी है (Confidence Is the Most Important Factor)

डॉक्टर बताती हैं कि कई बार क्लिनिक में ऐसी लड़कियां आती हैं जो कहती हैं कि स्कूल के दिनों में उनकी मां ने उन्हें अनचाहे बाल या आईब्रो साफ करने की इजाजत नहीं दी थी। इस छोटी सी बात की वजह से स्कूल में वो कॉन्फिडेंस नहीं रहती थी। ऐसे में एक मां के तौर पर आपको खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि आपके लिए क्या ज्यादा जरूरी है आपकी बेटी का कॉन्फिडेंस या उसके शरीर के बाल?

बाल हटाने का सही और सेफ तरीका (Right and Safe Methods for Hair Removal)

शोध और साइंस के हिसाब से देखें तो अगर आप बालों को जड़ से नहीं निकाल रहे हैं (यानी बिना वैक्सिंग या थ्रेडिंग/प्लकिंग के), तो किसी भी उम्र में बाल हटाना पूरी तरह से सेफ है। इसके लिए आप शेविंग या ट्रिमिंग जैसे आसान और सुरक्षित तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

बस आपको इस बात का ध्यान रखना है कि बाल हटाते समय सही तरीका चुना जाए और बच्ची की स्किन का पूरा ख्याल रखा जाए ताकि उसकी त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल शरीर के बाल से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी तरीका बच्ची पर अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में डॉक्टर की सलाह एक बार जरूर लें।

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