Ebola Outbreak से अफ्रीका में बढ़ी चिंता, 246 संदिग्ध मामलों और 65 मौतों के बाद Africa CDC अलर्ट पर

Ebola Outbreak से अफ्रीका में बढ़ी चिंता, 246 संदिग्ध मामलों और 65 मौतों के बाद Africa CDC अलर्ट पर

Congo Ebola Outbreak: अफ्रीकी देश कांगो में एक बार फिर इबोला वायरस का प्रकोप सामने आया है। अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) के मुताबिक, देश के इतुरी प्रांत में अब तक 246 संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जबकि 65 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य एजेंसियों को डर है कि अगर समय रहते संक्रमण को नहीं रोका गया, तो यह आसपास के देशों तक भी फैल सकता है।

अफ्रीका सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा मामले मोंगवालु और र्वाम्पारा स्वास्थ्य क्षेत्रों में मिले हैं। कई मरीजों में लैब टेस्ट के दौरान इबोला वायरस की पुष्टि भी हुई है। शुरुआती जांच में 20 सैंपल्स में से 13 पॉजिटिव पाए गए हैं।

क्या होता है इबोला वायरस?

इबोला एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी, पसीने या शरीर के दूसरे तरल फ्लुइड्स के संपर्क से फैल सकता है।

इसके शुरुआती लक्षण आम वायरल बुखार जैसे लगते हैं, जैसे-

  • कमजोरी
  • शरीर दर्द
  • उल्टी और दस्त
  • गले में दर्द

लेकिन गंभीर मामलों में यह शरीर के अंदर रक्तस्राव (ब्लीडिंग) और कई अंगों के फेल होने की वजह बन सकता है।

क्यों बढ़ रही है चिंता?

अफ्रीका सीडीसी के मुताबिक, इतुरी क्षेत्र में खराब सड़कें, हिंसा और लगातार लोगों की आवाजाही संक्रमण को तेजी से फैलाने का खतरा बढ़ा रही है। खासकर खनन क्षेत्रों (माइनिंग एरियाज) में काम करने वाले लोग एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं, जिससे वायरस दूसरे इलाकों तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्र युगांडा और दक्षिण सूडान की सीमा के काफी करीब हैं। ऐसे में सीमा पार फैलाव (क्रॉस-बॉर्डर स्प्रेड) का खतरा भी बना हुआ है।

इसी वजह से अफ्रीका सीडीसी ने कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य अधिकारियों की एक आपातकालीन (इमरजेंसी) बैठक बुलाई है। इस बैठक में निगरानी (सर्विलांस), जांच (टेस्टिंग), टीकाकरण (वैक्सीनेशन), संक्रमण नियंत्रण (इंफेक्शन कंट्रोल) और सुरक्षित दफन (सेफ बरियल) जैसे मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

पहले भी कई बार फैल चुका है इबोला

कांगो में यह इबोला का 17वां प्रकोप (आउटब्रेक) है। इससे पहले 2018 से 2020 के बीच फैले प्रकोप (आउटब्रेक) में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। वहीं 2014-2016 में पश्चिमी अफ्रीका में फैले इबोला प्रकोप (आउटब्रेक) ने 11,000 से ज्यादा लोगों की जान ली थी।

क्या भारत को चिंता करने की जरूरत है?

विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल भारत में इबोला का कोई खतरा नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा (इंटरनेशनल ट्रैवल) बढ़ने की वजह से दुनिया के किसी भी हिस्से में फैला संक्रमण वैश्विक चिंता (ग्लोबल कंसर्न) बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तरह के तेज बुखार, रक्तस्राव के लक्षणों (ब्लीडिंग सिम्पटम्स) या संक्रमित देशों की यात्रा के बाद तबीयत बिगड़ने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए।

यह जानकारी अफ्रीका सीडीसी की आधिकारिक रिपोर्ट और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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