मंत्री संजीव अरोड़ा की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई:राहत नहीं; वकील बोले- शिकायतकर्ता और गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी एक ही व्यक्ति

मंत्री संजीव अरोड़ा की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई:राहत नहीं; वकील बोले- शिकायतकर्ता और गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी एक ही व्यक्ति

ईडी द्वारा अरेस्ट पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा द्वारा दायर याचिका पर आज पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में करीब पौने घ्ंटे तक सुवाई चली। इस दौरान अरोड़ा के वकील ने दलील दी कि उनके मामले में शिकायतकर्ता अधिकारी और गिरफ्तार करने वाला अधिकारी एक ही व्यक्ति है, जो कि पीएमएलए (PMLA) की धारा 19 के तहत कानून के खिलाफ है। शिकायत दर्ज करने वाला और गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी एक ही नहीं हो सकता।” ईसीआईआर (ECIR) 5 मई को दर्ज की गई थी और 9 मई को छापा मारा गया। धारा 50 के तहत उन्हें कोई सामग्री उपलब्ध नहीं करवाई गई। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि रिकॉर्ड को सीलबंद लिफाफे में मंगवाकर देखा जाए कि एफआईआर में वास्तव में कोई जांच हुई भी थी या नहीं। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार तय की है। रात को जज को जगाने की क्या जरूरत थी सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आप हमें विवादित आदेश की तरफ ले जाइए, आप किस बात का संदर्भ दे रहे हैं?” इसके जवाब में अरोड़ा के वकील ने कहा कि गिरफ्तारी मेमो मनगढ़ंत था। सुबह 7 बजे गिरफ्तार किया गया और रात 11:20 बजे अदालत में पेश किया गया। अगर गिरफ्तारी शाम 4 बजे हुई थी, तो कार्यावधि के दौरान पेश किया जा सकता था। रात 11:20 बजे जज को जगाने की क्या जरूरत थी?” गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) गिरफ्तारी के समय ही दिए जाने चाहिए थे। गिरफ्तारी के आधार पहले से टाइप किए हुए और सुनियोजित थे। ईडी ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया अदालत ने कहा कि “पूरे केस रिकॉर्ड में कहीं भी अपराध से अर्जित आय का जिक्र नहीं है, जबकि ECIR के लिए यह जरूरी है।”अब तक कोई प्रोसीडस ऑफ क्राइम सामने नहीं आया है। धारा 19 का उल्लंघन हुआ है। मेरा मुख्य मामला यही है कि गिरफ्तारी के समय मुझे गिरफ्तारी के आधार नहीं दिए गए। रिमांड जज ने भी इन तथ्यों पर विचार नहीं किया। ईडी के वकील ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत है। अरोड़ा के वकील ने चार दलीलें रखी अरोड़ा ने अपनी दलील समाप्त करते हुए बाली ने चार मुख्य बातें रखीं। उन्होंने कहा कि मामले में कोई ठोस सामग्री नहीं है, भुगतान चेक के जरिए किए गए थे और यह भी सवाल उठाया कि क्या शिकायत दर्ज करने वाला अधिकारी ही गिरफ्तारी कर सकता है। उन्होंने कहा, “मैंने घटनाक्रम अदालत के सामने रखा है। पंजाब में राजनीतिक दल-बदल होता है, सांसद चले जाते हैं। एक सांसद पर FEMA की रेड होती है लेकिन ECIR दर्ज नहीं होती। मैं अपने रुख पर कायम रहा और मुझे गिरफ्तार कर लिया गया। ईडी की दलीलें भी सुननी है अदालत ने कहा, “आज तीसरा दिन है और आपने अब तक अपनी बहस पूरी नहीं की। आप इसे 30-35 मिनट में खत्म कर सकते थे। मुझे ईडी की दलीलें भी सुननी हैं।” मामले की अगली सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *