सेवती की महिला भरण-पोषण के लिए ऑटो चला रही:परिवार के खर्च और आर्थिक मदद के लिए काम शुरू किया

सेवती की महिला भरण-पोषण के लिए ऑटो चला रही:परिवार के खर्च और आर्थिक मदद के लिए काम शुरू किया

जहानाबाद जिले के सेवती गांव की निवासी आशा देवी ने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए टेंपो चलाना शुरू किया है। उन्होंने यह काम लगभग 15 से 20 दिन पहले शुरू किया और अब रोजाना टेंपो चलाकर परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं। आशा देवी के पति विजय मोची गांव में राशन की दुकान चलाते हैं। दुकान की बिक्री कम होने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। इस आर्थिक तंगी को देखते हुए आशा देवी ने स्वयं कमाने का निर्णय लिया। वह प्रतिदिन सेवती गांव से मखदुमपुर तक टेंपो चलाती हैं। उन्हें जहां तक सवारी मिलती है, वह यात्रियों को वहां तक पहुंचाती हैं। शुरुआत में लोगों को एक महिला को टेंपो चलाते देखकर काफी आश्चर्य होता था। हालांकि, धीरे-धीरे लोगों का नजरिया बदला और अब यात्री उनकी हिम्मत और मेहनत की सराहना करते हैं। आशा देवी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें डर जरूर लगा, लेकिन अब वह आत्मविश्वास के साथ वाहन चलाती हैं। आशा देवी ने स्वीकार किया कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस अभी नहीं बन पाया है। हाल ही में काम शुरू करने के कारण लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस वजह से उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का डर भी रहता है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही लाइसेंस बनवाकर बिना किसी भय के अपना काम जारी रखेंगी। आशा देवी का यह संघर्ष और हौसला ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ा जा सकता है। जहानाबाद जिले के सेवती गांव की निवासी आशा देवी ने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए टेंपो चलाना शुरू किया है। उन्होंने यह काम लगभग 15 से 20 दिन पहले शुरू किया और अब रोजाना टेंपो चलाकर परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं। आशा देवी के पति विजय मोची गांव में राशन की दुकान चलाते हैं। दुकान की बिक्री कम होने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। इस आर्थिक तंगी को देखते हुए आशा देवी ने स्वयं कमाने का निर्णय लिया। वह प्रतिदिन सेवती गांव से मखदुमपुर तक टेंपो चलाती हैं। उन्हें जहां तक सवारी मिलती है, वह यात्रियों को वहां तक पहुंचाती हैं। शुरुआत में लोगों को एक महिला को टेंपो चलाते देखकर काफी आश्चर्य होता था। हालांकि, धीरे-धीरे लोगों का नजरिया बदला और अब यात्री उनकी हिम्मत और मेहनत की सराहना करते हैं। आशा देवी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें डर जरूर लगा, लेकिन अब वह आत्मविश्वास के साथ वाहन चलाती हैं। आशा देवी ने स्वीकार किया कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस अभी नहीं बन पाया है। हाल ही में काम शुरू करने के कारण लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस वजह से उन्हें प्रशासनिक कार्रवाई का डर भी रहता है। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही लाइसेंस बनवाकर बिना किसी भय के अपना काम जारी रखेंगी। आशा देवी का यह संघर्ष और हौसला ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ा जा सकता है।  

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