पन्ना घाटी की बाधा होगी दूर, एलिवेटेड रोड के लिए ड्रोन सर्वे से निकलेगी राह

पन्ना घाटी की बाधा होगी दूर, एलिवेटेड रोड के लिए ड्रोन सर्वे से निकलेगी राह

बुंदेलखंड की जीवनरेखा माने जाने वाले नेशनल हाईवे 93 के कायाकल्प की दिशा में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। बमीठा से सतना तक प्रस्तावित 105 किलोमीटर लंबे फोरलेन प्रोजेक्ट के मार्ग में सबसे बड़ी तकनीकी और पर्यावरणीय बाधा बन रही पन्ना घाटी का समाधान अब निकाल लिया गया है। इस दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में अब ड्रोन सर्वे के जरिए भविष्य की राह तैयार की जाएगी।

अनिश्चितता के बादल छंट गए

पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के कोर क्षेत्र से गुजरने वाली इस घाटी में निर्माण कार्य के लिए कड़े पर्यावरणीय नियमों का पालन करना अनिवार्य है। हाल ही में, एपीसीसीएफ वन्यप्राणी भोपाल ने टाइगर रिजर्व के 13 किलोमीटर क्षेत्र में ड्रोन सर्वे करने की अनुमति एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को प्रदान कर दी है। इस अनुमति के मिलते ही प्रोजेक्ट में छाई अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं और काम ने एक बार फिर गति पकड़ ली है।

13 किमी लंबा हवाई पुल (एलिवेटेड रोड) बनेगा समाधान

पन्ना और छतरपुर जिले के बीच स्थित इस घाटी का रास्ता न केवल घुमावदार है, बल्कि यह वन्यजीवों का प्रमुख गलियारा भी है। जमीन पर फोरलेन बनाने से पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों के मूवमेंट में आने वाली बाधा को देखते हुए एनएचएआई ने यहाँ एलिवेटेड फोरलेन बनाने का निर्णय लिया है।

तकनीकी लाभ- ड्रोन सर्वे से घाटी की सटीक भौगोलिक स्थिति का पता चलेगा।पर्यावरण संरक्षण- हवा में बनने वाली इस सडक़ से नीचे जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे।समय की बचत- संकरी घाटी के जाम से मुक्ति मिलेगी और वाहनों की रफ्तार बनी रहेगी।

डीपीआर के बाद शुरू होगी भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया

ड्रोन सर्वे से प्राप्त उच्च-गुणवत्ता वाले डेटा और तस्वीरों का उपयोग डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में किया जाएगा। इस रिपोर्ट में पुल की ऊंचाई, पिलरों की स्थिति और निर्माण लागत का सटीक विवरण होगा। जैसे ही डीपीआर को मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिलेगी, निर्माण के लिए आवश्यक भू-अधिग्रहण और निविदा (टेंडर) की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

क्षेत्रीय विकास को लगेंगे पंख

बमीठा-सतना फोरलेन केवल एक सडक़ नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के आर्थिक विकास का द्वार है।1. पर्यटन को बढ़ावा- खजुराहो, पन्ना टाइगर रिजर्व और मैहर आने वाले पर्यटकों के लिए यात्रा सुगम और सुखद होगी।

2. व्यापारिक लाभ- सतना के सीमेंट उद्योगों और छतरपुर के व्यापारिक केंद्रों के बीच माल ढुलाई तेज और सस्ती होगी।

3. रोजगार के अवसर- निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय स्तर पर सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

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