केंद्र बोला- 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल, फिर भी कम खर्चें:रोजाना ₹1000 करोड़ का नुकसान; बचत के लिए मोदी की 2 दिन में 2 बार अपील

केंद्र बोला- 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल, फिर भी कम खर्चें:रोजाना ₹1000 करोड़ का नुकसान; बचत के लिए मोदी की 2 दिन में 2 बार अपील

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल और गैस का स्टॉक मौजूद है, जबकि LPG का 45 दिन का स्टॉक है। लोगों को घबराने या पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने अपील कर कहा कि पेट्रोल और डीजल को कम खर्चें। पीएम मोदी भी लगातार दो दिन (10 और 11 मई) से लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील कर चुके हैं। सरकार का कहना है कि बढ़ती वैश्विक कीमतों के बावजूद तेल कंपनियां रोज करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं, ताकि आम लोगों पर बोझ न पड़े। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को मंत्री समूह की पांचवीं बैठक में पश्चिम एशिया संकट और देशों की आर्थिक सुरक्षा की समीक्षा की। सरकार ने कहा- ईंधन बचाने की योजनाएं कागजों पर न रहें मंत्री समूह की बैठक में राजनाथ सिंह ने निर्देश दिए कि हर स्तर के सभी विभाग और अलग-अलग राज्यों की सरकारें मिलकर काम करें ताकि ईंधन बचाने की योजनाएं कागजों पर न रहें, बल्कि जमीन पर लागू हों। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई देशों से खरीदारी की कोशिश कर रहा है। देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के असर और बढ़ती तेल कीमतों के बीच सरकार ईंधन सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है, तेल कंपनियों का घाटा कम करने के लिए 15 मई के आसपास पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 4 से 5 रुपये लीटर की बढ़ोतरी हो सकती है। LPG सिलेंडर के दाम भी 50 रु. तक बढ़ सकते हैं। TOI की खबर के मुताबिक इसका मकसद बढ़ती तेल कीमतों के असर को कंट्रोल करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI के अधिकारियों के बीच इस पर चर्चा हुई है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। दरअसल, तेल विदेशी मुद्रा में खरीदा जाता है जिसके भुगतान डॉलर में करने पड़ते हैं। जो लोग ये तेल महंगा नहीं लेते, उनकी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। तेल, गैस से जुड़ी 3 बातें जो आपको जानना जरूरी हैं 1. देश के पास कितना भंडार है: विशाखापत्तनम, मंगलूरु और पादुर में भूमिगत भंडार में 5.33 MMT (मिलियन मीट्रिक टन) कच्चा तेल रखने की क्षमता है। अभी यहां लगभग 64% (3.37 MMT) भरा है, जो कि देश की 9.5 दिनों की जरूरतें पूरी कर सकता है। अगर तेल कंपनियों के स्टॉक और रणनीतिक भंडार को मिला दिया जाए, तो देश इस समय 60 दिनों का कच्चा तेल, 45 दिनों का प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का एलपीजी भंडारण में रख सकता है। 2. पर्याप्त स्टॉक कितना होता है: अंतरराष्ट्रीय एजेंसी के मानकों के अनुसार, देशों के पास कम से कम 90 दिनों के आयात के बराबर भंडार रखना चाहिए। भारत इस लक्ष्य से थोड़ा पीछे है, पर 60-74 दिनों का बैकअप सुरक्षित स्तर माना जाता है। देश रोज कितना तेल इस्तेमाल करता है, उस पर कितना खर्च है? 3. देश रोज कितना तेल इस्तेमाल करता है, उस पर कितना खर्च है: भारत में रोज करीब 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है। इसे पहले लगभग 533 करोड़ रु. (करीब 3141 करोड़ रु.) खर्च करके खरीदा जाता था, जो अब 850 करोड़ रु. (करीब 4,760 करोड़ रु.) हो गया है। यानी रोज 1,619 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। PM मोदी बोले- पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करें पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लगातार दूसरे दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। वडोदरा में मोदी ने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी देश बाहर निकल जाएगा। विदेश में रहने वाले भारतीयों से कहूंगा कि कम से कम पांच विदेशी मेहमानों को भारत घुमाने लाइए। पूरी खबर पढ़ें… …………. यह खबर भी पढ़ें… तेल-कंपनियों को हर दिन ₹1,700 करोड़ का नुकसान: 10-हफ्ते में ₹1 लाख करोड़ का घाटा, वजह- वैश्विक तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो साल के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं। सरकारी तेल कंपनियां देश के उपभोक्ताओं को ग्लोबल एनर्जी शॉक से बचाने के लिए भारी वित्तीय बोझ यानी नुकसान उठा रही हैं। पिछले 10 हफ्तों में इन कंपनियों को ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। पूरी खबर पढ़ें…

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