सिद्धार्थनगर में ग्राम पंचायतों के करोड़ों के घोटाले की जांच:13 दिन बाद भी नहीं हुई, 6 पंचायतों में फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

सिद्धार्थनगर में ग्राम पंचायतों के करोड़ों के घोटाले की जांच:13 दिन बाद भी नहीं हुई, 6 पंचायतों में फर्जी भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

सिद्धार्थनगर में ग्राम पंचायतों से जुड़े कथित करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच 13 दिन बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। नौगढ़ और शोहरतगढ़ विकासखंड की छह ग्राम पंचायतों- रामगढ़, हरदासपुर, टेड़िया, सेमरियाव, रसूलपुर और रामपुर में 2022-23 से 2025-26 के बीच हुए भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। जांच में हो रही देरी से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विकास कार्य दिखाकर धन निकासी के आरोप शिकायतकर्ता अंकित सिंह ने 29 अप्रैल को जिलाधिकारी को नोटरी शपथ पत्र और दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ विस्तृत शिकायत सौंपी थी। शिकायत में फर्जी बिल-वाउचर, बिना कार्य कराए भुगतान, सरकारी धन के दुरुपयोग और कागजों पर विकास कार्य दिखाकर धन निकासी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के साथ भुगतान की तिथि, मद, राशि और कार्यों का विस्तृत ब्यौरा भी संलग्न किया गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने तत्काल संज्ञान लिया था। उन्होंने शिकायत को जिला पंचायती राज अधिकारी को भेजते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी ने कहा था कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, आदेश जारी होने के 13 दिन बाद भी जांच धरातल पर शुरू होती नजर नहीं आ रही है। जिला पंचायती राज अधिकारी वाचस्पति झा की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि फाइल मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह को भेज दी गई है। इसके बावजूद अब तक जांच टीम गठित न होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्ट्रीट लाइट और निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप शिकायत में सबसे ज्यादा सवाल ग्राम पंचायत रामगढ़ में स्ट्रीट लाइट और अन्य मदों में हुए भारी भुगतान को लेकर उठाए गए हैं। आरोप है कि जनवरी 2025-26 में स्ट्रीट लाइट के नाम पर ₹3,36,777 का भुगतान दिखाया गया, जिसमें प्रति लाइट ₹3,871 की दर दर्शाई गई, जबकि बाजार में समान सामग्री ₹600 से ₹1200 तक उपलब्ध बताई जा रही है। हरदासपुर ग्राम पंचायत में भी 50 स्ट्रीट लाइट के नाम पर ₹1,77,421 खर्च दिखाया गया है। इसके अलावा विभिन्न महीनों में लाखों रुपये के भुगतान दर्ज होने के बावजूद कार्यों की गुणवत्ता और वास्तविक उपलब्धता पर सवाल उठाए गए हैं। आरसीसी बेंच के नाम पर लाखों रुपए के भुगतान टेड़िया ग्राम पंचायत में फरवरी माह में ईंट, सफाई और अन्य मदों में लाखों रुपए के भुगतान का आरोप है। शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर संबंधित कार्य नहीं मिले। वहीं मार्च माह में 20 लाख रुपए से अधिक की राशि पोर्टल पर दर्ज होने के बावजूद उससे संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है। सेमरियाव पंचायत में स्ट्रीट लाइट, डस्टबिन और आरसीसी बेंच के नाम पर लाखों रुपए के भुगतान को संदिग्ध बताया गया है। रसूलपुर और रामपुर ग्राम पंचायतों में भी बाजार दर से कई गुना अधिक भुगतान किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप शिकायत में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, जूनियर इंजीनियर, खंड विकास अधिकारी और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि कई योजनाओं में एक ही प्रकार के कार्य को बार-बार दिखाकर भुगतान किया गया और कागजों में विकास कार्य पूर्ण दर्शाकर धनराशि निकाल ली गई। जल्द जांच शुरू नहीं हुई तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जल्द जांच शुरू नहीं हुई तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि मामले की गंभीरता समय के साथ कमजोर पड़ जाए। अब जिले में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किसके संरक्षण में करोड़ों रुपये के इस कथित खेल पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जांच प्रक्रिया शुरू न होना प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

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