किसान की फार्मिंग से 20 लाख सालाना कमाई:कोचिंग छोड़ कर किसानी शुरू की, नीति आयोग के अधिकारी भी खेत देखने आ रहे

किसान की फार्मिंग से 20 लाख सालाना कमाई:कोचिंग छोड़ कर किसानी शुरू की, नीति आयोग के अधिकारी भी खेत देखने आ रहे

मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मिट्टी भी सोना उगलने लगती है। बारां जिले के कलौनी निवासी किसान बृजेश चंदेल इसी कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं। वे आधुनिक और एकीकृत खेती से बाकी किसानों के लिए मॉडल बन गए हैं। बृजेश न केवल खुद आत्मनिर्भर हो गए हैं, बल्कि अपनी नवाचारी सोच से सालाना 20 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रहे हैं। दादा चाहते थे पोता संभाले जमीन बृजेश बताते हैं कि 2016 में दादा की समझाइश के बाद कोटा में कोचिंग छोड़कर गांव आ गया। दादा चाहते थे कि पुश्तैनी जमीन और विरासत को उनकी मौजूदगी में ही पोता संभाल ले। शुरुआती सालों में पारंपरिक खेती की, लेकिन लागत इतनी आती थी कि कुछ बचत नहीं हो रही थी। तब नवाचार और एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने का फैसला किया। मगर यह सफर भी चुनौतियों से भरा रहा। सबसे पहले वर्ष 2019 में उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में एक एकड़ में नींबू का बगीचा लगाया। उसमें अब उत्पादन शुरू हो चुका है। पहली बार में बर्बाद हुआ पपीता; अब 1 क्विंटल तक फल 2023 में नीति आयोग का प्रोजेक्ट मिला। इससे राह आसान हुई। साल 2024 में पपीता के 1000 और अंजीर के 600 पौधे लगाए, लेकिन सही देखभाल और जानकारी न होने के कारण पपीता का बगीचा पूरी तरह बर्बाद हो गया। इससे निराश होने के बजाय 30 मार्च 2025 में फिर से शुरुआत की है। इस बार नीमच से उच्च गुणवत्ता वाले पपीते के 1000 पौधे मंगवाए और ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाई। इसका सुखद परिणाम यह रहा कि अब बगीचे में प्रत्येक पौधे पर 50 किलो से लेकर 1 क्विंवटल तक फल लग रहे हैं। नीति आयोग का मिला सपोर्ट अप्रैल 2026 तक वे 2 लाख रुपए की शुद्ध आय प्राप्त कर चुके थे और अगस्त तक 1 लाख रुपए की अतिरिक्त आय की उम्मीद है। वहीं, अंजीर में छह माह से फल आने लगे। हालांकि इसका बाजार मिलने की समस्या आई। साथ–साथ बृजेश ने खेत पर तकनीक का समन्वय स्थापित कर दिया है। अधिकांश सरकारी योजनाओं में मिलने वाले अनुदान का फायदा उठाकर खेती में लागत को कम किया। नीति आयोग के प्रोजेक्ट के तहत उन्हें फार्म पौंड, 3 किलोवाट सोलर पैनल और स्प्रिंकलर सिस्टम मिला। इससे न केवल बिजली के बिल से छुटकारा मिला, बल्कि बरसात का पानी एकत्र कर भूमिगत जल स्तर में भी सुधार किया। इसी पानी से अब वे मछली पालन भी कर रहे हैं। जल्द ही पौंड बड़ाकर एक एकड़ में करने की योजना है। मधुमक्खी पालन भी शुरू किया उन्होंने बताया कि केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपने फॉर्म को विविध बनाया है। फलों में नींबू, अंजीर और पपीता के बगीचे लगाए। वहीं फूल में एक एकड़ में गेंदा की खेती कर रहे हैं। इस साल इसे दोगुना किया जाएगा। खेती के साथ पशुपालन और गोबर गैस प्लांट लगा रखा है। प्याज और लहसुन के सुरक्षित भंडारण के लिए स्वयं का गोदाम है। इनके इन नवाचारों को देखने के लिए नीति आयोग के जनरल सेक्रेटरी राजीव ठाकुर और बारां कलेक्टर रोहिताश तोमर आ चुके हैं। भविष्य में इनकी बेर, आंवला, बांस और सहजन के बगीचे लगाने के साथ-साथ मधुमक्खी पालन शुरू करने की योजना है।

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