‘समझौते पर साइन करो, वरना एक बटन दबेगा और नक्शे से मिट जाएगा ईरान!’ट्रंप की दो टूक चेतावनी

‘समझौते पर साइन करो, वरना एक बटन दबेगा और नक्शे से मिट जाएगा ईरान!’ट्रंप की दो टूक चेतावनी

Blockade :पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। अमेरिका की ओर से की गई नाकाबंदी के कारण ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर अपने खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगी देशों की ओर से पेश किए गए एक शांति प्रस्ताव को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान का साफ तौर पर कहना है कि यह मसौदा पूरी तरह से त्रुटिपूर्ण और राजनीति से प्रेरित है। ईरान की मांग है कि समस्या का एकमात्र समाधान युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना और ईरानी बंदरगाहों से समुद्री नाकाबंदी हटाना है।

अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में दो ईरानी टैंकरों को निशाना बनाया था

ईरान के इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड्स ने बहुत सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि अगर उनके किसी भी तेल टैंकर या व्यापारिक जहाज पर हमला किया गया, तो वे मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और दुश्मन के जहाजों को तबाह कर देंगे। गौरतलब है कि अमेरिका ने हाल ही में ओमान की खाड़ी में दो ईरानी टैंकरों को निशाना बनाया था, जिसके बाद से दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने आ गई हैं। इस विवाद ने पूरी दुनिया को बड़े आर्थिक संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है।

ईरान को परमाणु धमाके का सामना करना पड़ेगा: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान शांति समझौते पर जल्दी हस्ताक्षर नहीं करता है, तो उसे परमाणु धमाके का सामना करना पड़ेगा। जबकि ईरान ने ट्रंप की इन धमकियों को “भयानक बेतुकापन” करार दिया है। ईरान का कहना है कि वे अमेरिका के किसी भी अल्टीमेटम या समय सीमा से नहीं डरते और शांति प्रस्ताव के हर बिंदु की तकनीकी जांच कर रहे हैं।

अमेरिका और पश्चिमी देश ईरान के अंतिम जवाब का इंतजार कर रहे

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस संकट के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि रूस ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को अपने देश में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित और स्टोर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिलहाल अमेरिका और पश्चिमी देश शांति वार्ता पर ईरान के अंतिम जवाब का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, ब्रिटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘एचएमएस ड्रैगन’ युद्धपोत तैनात करने का फैसला किया है। यदि राजनयिक प्रयास विफल होते हैं, तो लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में एक बड़ा सैन्य टकराव तय है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ेगा, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आएगा और वैश्विक महंगाई अपने चरम पर पहुंच सकती है।

इजरायल और लेबनान सीमा पर हिंसक झड़पें जारी

इस महासंकट के बीच दो अन्य गंभीर घटनाक्रम सामने आए हैं। पहला, ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप के पास समुद्र में भारी मात्रा में तेल रिसाव देखा गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी के कारण फँसे जहाजों की भीड़ से यह हादसा हुआ है, जो बड़े पर्यावरणीय खतरे का संकेत है। दूसरा एंगल बहरीन से है, जहां सुरक्षा एजेंसियों ने 41 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर ईरान के रिवोल्युशनरी गार्ड्स के साथ सीधे संपर्क में होने और आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग जुटाने का गंभीर आरोप है। वहीं, इजरायल और लेबनान सीमा पर भी हिंसक झड़पें जारी हैं, जो इस क्षेत्रीय युद्ध को और अधिक भड़का रही हैं।

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