भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद अब संगठनात्मक स्तर पर बड़ा बदलाव शुरू कर दिया है। आगामी नगरीय निकाय चुनाव और भविष्य की राजनीतिक तैयारियों को देखते हुए पार्टी ने अपने मीडिया विभाग का पूरी तरह पुनर्गठन किया है। बुधवार को प्रदेश कार्यालय में हुई पहली कामकाजी बैठक में तय किया गया कि अब संभाग स्तर पर बनाए गए मीडिया सेंटर केवल चुनावी समय में नहीं, बल्कि पूरे साल वॉर रूम की तरह सक्रिय रहेंगे। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह मौजूद रहे। पार्टी ने मीडिया संचालन के लिए प्रोफेशनल और कॉर्पोरेट मॉडल लागू करने का फैसला लिया है। इस नए सिस्टम में प्रवक्ताओं की मनमर्जी पर लगाम कसते हुए सख्त अनुशासन लागू किया गया है। अब बिना अनुमति नहीं दे सकेंगे बाइट बीजेपी ने अपने प्रवक्ताओं के लिए सख्त रोस्टर सिस्टम लागू किया है। अब कोई भी प्रवक्ता अपनी मर्जी से मीडिया के सामने पार्टी का पक्ष नहीं रख सकेगा। प्रवक्ता कक्ष में बाइट देने के लिए दिनवार ड्यूटी तय की जाएगी और जिस दिन जिसकी जिम्मेदारी होगी, केवल वही मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत रहेगा। नई व्यवस्था के तहत प्रवक्ताओं को सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहना होगा। बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर जवाब-तलब भी किया जा सकता है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी नजर बीजेपी ने जिला स्तर की मीडिया टीमों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की लगातार मॉनिटरिंग करें। पार्टी की रणनीति के मुताबिक जो इन्फ्लुएंसर्स सकारात्मक और सरकार समर्थक कंटेंट बनाएंगे, उन्हें संगठन की विचारधारा से जोड़कर ब्रांड एम्बेसडर की तरह इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, जो इन्फ्लुएंसर्स कथित तौर पर तथ्यहीन या सनसनीखेज कंटेंट के जरिए सरकार की छवि प्रभावित करने की कोशिश करेंगे, उनके दावों का तुरंत तथ्यात्मक जवाब तैयार कराया जाएगा। मीडिया विभाग बनेगा थिंक टैंक, नेगेटिव को पॉजिटिव में बदलने पर फोकस बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पार्टी का मीडिया विभाग अब सिर्फ प्रेस विज्ञप्ति जारी करने तक सीमित नहीं रहेगा। उसे इंटेलीजेंस इनपुट और थिंक टैंक की भूमिका में काम करना होगा। डिबेट समन्वय प्रभारियों को टीवी डिबेट्स की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। यदि कोई मुद्दा पार्टी या सरकार के खिलाफ जाता दिखाई देता है, तो उसे सरकार की उपलब्धियों और तार्किक जवाबों के जरिए सकारात्मक दिशा देने की रणनीति बनाई जाएगी। पार्टी ने यह भी तय किया है कि सभी पदाधिकारियों के काम की मासिक समीक्षा होगी। जो लोग सक्रिय नहीं पाए जाएंगे, उन्हें नई व्यवस्था में जिम्मेदारियों से हटाया भी जा सकता है।


