संगरूर जिले के मलेरकोटला में पराली जलाने के मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। 14 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण रोकने के उद्देश्य से की जा रही है। डिप्टी कमिश्नर विराज एस तिड़के ने बताया कि 1 अप्रैल से अब तक सैटेलाइट के जरिए जिले में कुल 33 आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 14 स्थानों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है। इन मामलों में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के तहत चालान काटे गए हैं और संबंधित किसानों के माल रिकॉर्ड में ‘लाल एंट्री’ भी की गई है। डिप्टी कमिश्नर विराज एस तिड़के और एसएसपी गगन अजीत सिंह ने जानकारी दी कि जिले में ‘जीरो स्टबल बर्निंग’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए पराली जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है। कृषि और प्रदूषण नियंत्रण विभागों ने की बैठक इस संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर सख्त निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।इसी बीच, अमरगढ़ क्षेत्र के गांव बागड़ियां में सैटेलाइट के जरिए पराली जलने की एक घटना सामने आई। सूचना मिलते ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। डिप्टी कमिश्नर विराज एस तिड़के और जिला पुलिस प्रमुख गगन अजीत सिंह ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का संभावित कारण तेज हवाएं और शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच जारी है। अधिकारियों ने मौके पर ग्रामीणों और किसानों से बातचीत कर उन्हें पराली न जलाने के लिए जागरूक किया। डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सरकार के निर्देशों के अनुसार, जिले में फसल अवशेष जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। किसानों से पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की भी अपील की गई है, ताकि पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सके।


