तमिल सिनेमा के ‘बेताज बादशाह’ विजय की आखिरी फिल्म मानी जा रही ‘जन नायकन’ इन दिनों विवादों और चर्चाओं के केंद्र में है। फिल्म के ऑनलाइन लीक होने की खबरों ने जहाँ मेकर्स की रातों की नींद उड़ा दी है, वहीं गलियारों में यह चर्चा भी गर्म है कि क्या यह विजय का अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने से पहले एक सोची-समझी रणनीति या ‘साइलेंट प्रहार’ है? दक्षिण भारतीय सिनेमा में जब भी किसी ऐसे सितारे का नाम लिया जाता है जिसने अपनी स्क्रीन उपस्थिति से करोड़ों दिलों पर राज किया है, तो वह नाम है विजय। महज 69 फिल्मों के अपने शानदार करियर में विजय ने ‘इलयथलपति’ (युवा सेनापति) से ‘थलपति’ (सेनापति) और अब राजनीति में ‘जन नायकन’ (जनता के नायक) तक का सफर तय किया है।
जोसेफ़ विजय से ‘थलपति’ बनने की कहानी
22 जून, 1974 को जन्मे जोसेफ़ विजय चंद्रशेखर के खून में ही सिनेमा था। उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर एक मशहूर निर्देशक और माँ शोभा चंद्रशेखर एक पार्श्व गायिका हैं। विजय ने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी, लेकिन मुख्य अभिनेता के तौर पर उनकी पहली फिल्म ‘नालैया थीरपू’ (1992) थी, जिसे उन्होंने मात्र 18 साल की उम्र में साइन किया था।
शुरुआती संघर्ष के बाद, विजय ने खुद को एक ऐसे मास हीरो के रूप में स्थापित किया, जो अभिनय के साथ-साथ डांस और सिंगिंग में भी माहिर है। प्रशंसकों के अटूट प्यार ने उन्हें ‘थलपति’ की उपाधि दी, जो आज उनकी पहचान बन चुकी है।
लगातार मिली सफलताएँ
विजय ‘थलपति’ ने कई हिट फ़िल्में दी हैं, जिनमें ‘थेरी’, ‘राजाविन पारवैयिले’, ‘मिनसारा कन्ना’, ‘बीस्ट’ और ‘शाहजहाँ’ शामिल हैं। साल 2023 में, उनकी फ़िल्म ‘लियो’ ने बॉक्स ऑफ़िस पर कई रिकॉर्ड तोड़े। इसके अलावा, उनकी आने वाली फ़िल्म ‘द ग्रेटेस्ट ऑफ़ ऑल टाइम’ में भी उनके अभिनय की काफ़ी तारीफ़ हो रही है। राजनीति में आने से पहले, विजय ने ‘जन नायकन’ में काम किया था, जिसके बारे में यह अफ़वाह थी कि यह उनकी आख़िरी फ़िल्म होगी। हालाँकि, रिलीज़ से पहले ही यह फ़िल्म विवादों में घिर गई। वैसे तो इसे इसी साल की शुरुआत में रिलीज़ होना था, लेकिन यह अभी तक सिनेमाघरों तक नहीं पहुँच पाई है।
‘जन नायकन’ विवाद
‘जन नायकन’ को शुरुआत में सेंसर बोर्ड से मंज़ूरी मिलने में देरी का सामना करना पड़ा, और मामला कोर्ट तक पहुँच गया। हाल ही में, यह फ़िल्म ऑनलाइन लीक भी हो गई। समय-समय पर इसे अलग-अलग वजहों से रुक-रुककर विरोध का भी सामना करना पड़ा है। यह पहली बार नहीं है जब विजय की कोई फ़िल्म विवादों में फँसी हो। ‘जन नायकन’ से पहले भी उनकी कई फ़िल्मों को इसी तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उदाहरण के लिए, 2013 में रिलीज़ हुई उनकी फ़िल्म ‘थलाइवा’ को लेकर काफ़ी हंगामा मचा था। फ़िल्म की टैगलाइन ‘टाइम टू लीड’ (नेतृत्व करने का समय) तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के नेतृत्व वाली सरकार को रास नहीं आई थी। आख़िरकार, कई मुश्किलों को पार करने के बाद यह फ़िल्म रिलीज़ हो पाई थी।
इसी तरह, विजय की 2018 में आई फ़िल्म ‘सरकार’ को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। इस फ़िल्म पर सरकारी योजनाओं को ग़लत तरीक़े से दिखाने के आरोप लगे थे, जिसके चलते राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया था।


