यूडीए की जमीन पर अब भी कब्जा कायम, कलक्टर ने निरीक्षण में भी जताई नाराजगी, बरसों से अल्टीमेटम के बावजूद नहीं हटा बड़गांव स्कूल से अतिक्रमण
उदयपुर. बड़गांव स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय परिसर में अतिक्रमण का मामला प्रशासनिक व यूडीए की लापरवाही की बड़ी मिसाल बन गया है। बरसों से लगातार दिए जा रहे अल्टीमेटम, आदेशों और निरीक्षणों के बावजूद यूडीए और स्थानीय प्रशासन अब तक स्कूल परिसर से कब्जा हटाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। अब हालात यह हो गए कि स्कूल का नामांकन महज 14 बच्चों में सिमट गया।
करीब डेढ़ साल पहले यूडीए और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट आदेश दिए थे। उस समय पुलिस जाप्ता भी तैनात किया गया था और कुछ लोगों को 15 दिन की मोहलत दी गई थी। लेकिन यह मोहलत भी समस्या को खत्म करने के बजाय आज तक खींचती चली गई। न तो कब्जा हटाया गया और न ही उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई हो सकी।
स्कूल परिसर बना अवैध बस्ती, शिक्षा व्यवस्था ठप
वर्तमान में स्थिति यह है कि पूरा स्कूल परिसर एक अवैध बस्ती में तब्दील है। कई परिवार अभी भी यहां रह रहे हैं और स्कूल को ही अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। परिसर में जगह-जगह गंदगी, कबाड़ और शराब की बोतलों का ढेर लगा हुआ है। शिक्षकों के अनुसार, हर सुबह कक्षाएं शुरू करने से पहले उन्हें परिसर में सो रहे लोगों को हटाना पड़ता है। कई बार तो स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि पढ़ाई शुरू करने में घंटों लग जाते हैं। स्कूल के शौचालय, हैंडपंप और बरामदे तक का उपयोग इन्हीं लोगों की ओर किया जा रहा है, जिससे पूरा शैक्षणिक माहौल दूषित हो चुका है।
हर साल स्कूल छोड़ चले गए बच्चे
अव्यवस्था और असुरक्षित माहौल का सबसे बड़ा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि स्कूल में नामांकन घटकर मात्र 14 बच्चों तक सिमट गया है। अभिभावक अपने बच्चों को ऐसे माहौल में भेजने से कतरा रहे हैं, जहां पढ़ाई कम और अव्यवस्था अधिक है।
कलक्टर निरीक्षण में सामने आई सच्चाई
हाल ही में जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने भी स्कूल परिसर का निरीक्षण किया, जहां की स्थिति देखकर वे भी द्रवित हो गए। निरीक्षण के दौरान परिसर में शराब की बोतलें, फैला हुआ कबाड़ और गंदगी का अंबार मिला। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है। बार-बार के आदेश, शिकायतें और जनसुनवाई के बावजूद अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है, जो प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
यूडीए की जमीन, लेकिन अधूरा पुनर्वास बना अड़चन
सूत्रों के अनुसार, यूडीए ने पहले इन परिवारों को बसाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पुनर्वास प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। धीरे-धीरे यह क्षेत्र विकसित होकर पॉश कॉलोनी बन गया, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर भी बसावट का विरोध शुरू हो गया।


