भागलपुर में बांका के अनुज कुमार (50) की सर्जरी हुई है। अनुज का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उनके नाक का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। उनका चेहरा बिगड़ गया था। इस कारण वे परेशान थे। परिजन उन्हें लेकर मायागंज अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने सर्जरी कर नाक को ऐसा बनाया जैसा पहले था। कई घंटों तक चली जटिल राइनोप्लास्टी और रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के नाक, कान और गला विभाग के डॉक्टरों की टीम ने सफल सर्जरी की। जांच के बाद ऑपरेशन के फैसला लिया टीम का नेतृत्व ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने किया। उन्होंने मरीज की स्थिति की जांच की। पुनर्निर्माण सर्जरी का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान नाक की क्षतिग्रस्त संरचना को सावधानीपूर्वक पुनर्स्थापित किया गया, ताकि उसका आकार, स्वरूप और कार्यक्षमता सामान्य रूप से वापस लाई जा सके। सर्जरी के बाद मरीज की नाक को नया आकार मिला, जो अब स्वाभाविक और सामान्य दिखाई दे रही है।
सर्जरी तकनीकी रूप से काफी जटिल थी डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने बताया, ‘यह सर्जरी तकनीकी रूप से काफी जटिल थी। मरीज की नाक का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो चुका था। ऐसे मामलों में पुनर्निर्माण के दौरान नाक के आकार, वायुमार्ग और सौंदर्य तीनों पहलुओं का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। हमारी टीम ने सटीक योजना, आधुनिक तकनीक ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी नाक सामान्य रूप से कार्य कर रही है।’ सर्जरी में सहायक स्टाफ सुप्रिया कुमारी, रीना कुमारी और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। ऑपरेशन के बाद अनुज कुमार और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली और पूरी मेडिकल टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। भागलपुर में बांका के अनुज कुमार (50) की सर्जरी हुई है। अनुज का एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें उनके नाक का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। उनका चेहरा बिगड़ गया था। इस कारण वे परेशान थे। परिजन उन्हें लेकर मायागंज अस्पताल पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने सर्जरी कर नाक को ऐसा बनाया जैसा पहले था। कई घंटों तक चली जटिल राइनोप्लास्टी और रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के नाक, कान और गला विभाग के डॉक्टरों की टीम ने सफल सर्जरी की। जांच के बाद ऑपरेशन के फैसला लिया टीम का नेतृत्व ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने किया। उन्होंने मरीज की स्थिति की जांच की। पुनर्निर्माण सर्जरी का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान नाक की क्षतिग्रस्त संरचना को सावधानीपूर्वक पुनर्स्थापित किया गया, ताकि उसका आकार, स्वरूप और कार्यक्षमता सामान्य रूप से वापस लाई जा सके। सर्जरी के बाद मरीज की नाक को नया आकार मिला, जो अब स्वाभाविक और सामान्य दिखाई दे रही है।
सर्जरी तकनीकी रूप से काफी जटिल थी डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने बताया, ‘यह सर्जरी तकनीकी रूप से काफी जटिल थी। मरीज की नाक का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो चुका था। ऐसे मामलों में पुनर्निर्माण के दौरान नाक के आकार, वायुमार्ग और सौंदर्य तीनों पहलुओं का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। हमारी टीम ने सटीक योजना, आधुनिक तकनीक ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी नाक सामान्य रूप से कार्य कर रही है।’ सर्जरी में सहायक स्टाफ सुप्रिया कुमारी, रीना कुमारी और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। ऑपरेशन के बाद अनुज कुमार और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली और पूरी मेडिकल टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।


