BCCI की सख्ती के बावजूद IPL में बार-बार हो रही ये घटना, गावस्कर ने की इन चीजों को रोकने की मांग

BCCI की सख्ती के बावजूद IPL में बार-बार हो रही ये घटना, गावस्कर ने की इन चीजों को रोकने की मांग

Sunil Gavaskar on Slow Over Rate: इंडियन प्रीमियर लीग में स्लो ओवर रेट की वजह से कप्तान को बैन करने के नियम को 2025 में ही खत्म कर दिया गया है। हालांकि जुर्माना अभी भी लगाया जाता है। लेकिन ये सजा अब तक टीमों को स्लो ओवर रेट से रोक नहीं पाई है। इस सीजन मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच मुकाबला चार घंटे और 22 मिनट तक चला था, वो भी तब, जब मैच में सुपर ओवर का इस्तेमाल भी नहीं हुआ है। स्लो ओवर रेट को रोकने के लिए टटीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने BCCI को नियम को सख्त करने की सलाह दी है।

3.30 घंटे में पूरा करना होता है मैच

इंडियन प्रीमियर लीग टी20 फॉर्मेट में खेला जाता है और कोई भी इस फॉर्मेट का मैच 3 घंटे और 30 मिनट में खत्म करना होता है। अगर इस समय सीमा के भीतर मैच पूरा नहीं होता, तो उस कप्तान और टीम पर मैच फीस का जुर्माना लगाया जाता है, जो अपने 20 ओवर तय समय में नहीं फेंक पाती है। लीग में जितनी बार ये गलती टीम से होती है, जुर्माने की रकम बढ़ती जाती है। लेकिन इसके बावजूद आईपीएल में स्लो-ओवर-रेट की घटना बढती जा रही है। ऐसे में सुनील गावस्कर ने BCCI से अपील की है कि वह इस मामले को अपने हाथ में ले और यह सुनिश्चित करे कि इस मामले में कोई भी ढिलाई न बरती जाए।

गावस्कर ने स्ट्रेटेजिक टाइम आउट के लिए सख़्त नियम बनाने की मांग की है। उन्होंने समझाते हुए कहा कि मैच के दौरान किसी भी ब्रेक में अगर सीमित संख्या में रिज़र्व खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ़ मैदान पर जाएं, तो स्लो ओवर रेट की घटना को कम किया जा सकता है। गावस्कर ने कहा, “अक्सर, यह अनावश्यक नज़ारा देखने को मिलता है कि रिज़र्व खिलाड़ी मैदान पर आकर बाउंड्री के पास खड़े फील्डर को पानी की बोतल देते हैं। इसकी अनुमति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसका मतलब होगा कि खेल के दौरान मैदान पर 11 से ज़्यादा खिलाड़ी मौजूद हैं, भले ही यह दो गेंदों के बीच का समय ही क्यों न हो।”

इस नियम को सख्त करने की मांग

उन्होंने आगे कहा, “स्ट्रेटेजिक टाइम आउट’ के दौरान भी, अक्सर मैदान पर लगभग आधा दर्जन अन्य लोग दिखाई देते हैं, जिनमें वे बल्लेबाज़ भी शामिल होते हैं जिनकी बल्लेबाज़ी की बारी आने वाली होती है। यह आज़ादी का बहुत ज़्यादा फ़ायदा उठाना है। यहाँ भी, ड्रिंक्स लेकर आने वाले दो रिज़र्व खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ़ के दो सदस्यों के अलावा, किसी और को मैदान पर जाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।”

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