फर्जी मार्कशीट से 10 साल नौकरी, हॉस्टल अधीक्षक दोषी:खंडवा कोर्ट से 3 साल की सजा; मार्कशीट फाड़ने पर सास को 6 महीने की सजा

    फर्जी अंकसूची के आधार पर शासकीय नौकरी हासिल कर करीब एक दशक तक सेवा करने वाले हॉस्टल अधीक्षक को अदालत ने दोषी ठहराते हुए सख्त सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने आरोपी मोहन सिंह काजले को 3 साल के कठोर कारावास और 27 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। साल 2021 से न्यायालय में लंबित इस मामले में शनिवार को फैसला सुनाया गया। शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक अश्विनी भाटे ने पैरवी की। मामले में सहआरोपी उसकी सास भगवती बाई को भी दोषी मानते हुए 6 माह के कारावास और 2 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। फर्जी मार्कशीट के दम पर मिली नौकरी
    अभियोजन के अनुसार, मोहन सिंह काजले ने स्नातक की फर्जी मार्कशीट तैयार करवाई और उसी के आधार पर खरगोन जिले में शासकीय नौकरी प्राप्त कर ली। वह लगभग 10 सालों तक इस फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करता रहा। मामले का खुलासा होने पर सिटी कोतवाली पुलिस ने दिसंबर 2020 में आरोपी के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471, 201 और 120-बी के तहत प्रकरण दर्ज किया था। जांच के बाद 24 फरवरी 2021 को चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। गिरफ्तारी से बचने खालवा पहुंचा
    आरोपी को खरगोन में पकड़े जाने की आशंका थी, जिसके चलते वह खालवा आ गया। यहां आदिम जाति कल्याण विभाग ने उसे हॉस्टल अधीक्षक का प्रभार दे दिया। बाद में छैगांव माखन में पदस्थापना के दौरान शिकायत मिलने पर विभागीय जांच हुई, जिसमें आरोप सही पाए गए और उसे निलंबित कर दिया गया। सास ने फाड़ दी थी फर्जी मार्कशीट
    जांच के दौरान जब पुलिस आरोपी के घर दस्तावेजों की जांच के लिए पहुंची, तब उसकी सास भगवती बाई ने कथित रूप से फर्जी मार्कशीट को फाड़ दिया और पुलिस कार्रवाई में बाधा डाली। इसी आधार पर उसे भी सहआरोपी बनाया गया। अब होगी बर्खास्तगी की कार्रवाई
    फैसले के बाद संबंधित विभाग आरोपी को सेवा से बर्खास्त करने की तैयारी में है। फिलहाल वह शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में अटैचमेंट पर पदस्थ था। बता दें कि, यह मामला सरकारी नौकरियों में दस्तावेजों की सत्यता और जांच प्रक्रिया की अहमियत को एक बार फिर उजागर करता है।

    ​ 

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *