महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य में संभावित जल संकट को देखते हुए प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। अल-निनो (El Nino) के कारण इस साल मॉनसून कमजोर रह सकता हहै, जिसके चलते देशभर में कम बारिश होने का अनुमान मौसम विभाग (IMD) ने किया है। इस बीच, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त जल नियोजन (Water Planning) लागू करने को कहा है।
राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अगस्त 2026 के अंत तक राज्य के किसी भी हिस्से में पीने के पानी की किल्लत न हो। इस सप्ताह हुई दूसरी उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम ने साफ किया कि पानी का संरक्षण अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत है।
फिलहाल बेहतर है जल भंडारण, लेकिन खतरा बरकरार
राज्य के बांधों में 21 अप्रैल 2026 तक 653.63 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी मौजूद है। यह पिछले साल इसी समय के 551.86 हजार मिलियन क्यूबिक फीट से करीब 101.77 हजार मिलियन क्यूबिक फीट अधिक है। हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि बारिश सामान्य से कम हुई तो यह स्थिति जल्दी ही चिंताजनक हो सकती है। इसलिए अधिकारियों को सख्त आदेश दिए गए हैं कि वे पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अभी से बैकअप प्लान तैयार रखें।
अल नीनो वाले वर्षों में तेजी से घटा था जलस्तर
अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल संसाधन) दीपक कपूर ने कैबिनेट समीक्षा बैठक में बताया कि अल नीनो वाले वर्षों में जल भंडारण में भारी गिरावट देखी गई है। 2014 में जल स्तर 12 प्रतिशत और 2015 में करीब 14 प्रतिशत तक गिर गया था, जिससे राज्य के कई हिस्सों में गंभीर पानी की किल्लत पैदा हुई थी। वहीं, 15 अक्टूबर 2014 को जल भंडारण 872 हजार मिलियन क्यूबिक फीट था, जो 2015 में घटकर 625 हजार मिलियन क्यूबिक फीट रह गया था। इसके विपरीत, 2025 में इसी तारीख को जल भंडारण 1330.97 हजार मिलियन क्यूबिक फीट दर्ज किया गया था, जो पहले से बेहतर है।
सीएम की अपील- अभी से शुरू करें पानी की बचत
मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज्य के नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि कमजोर मॉनसून के प्रभाव को कम करने के लिए अभी से पानी बचाना शुरू कर दें। उन्होंने अधिकारियों को जल संरक्षण परियोजनाओं में तेजी लाने, जल प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने और पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुएं और तालाबों को पुनर्जीवित करने के निर्देश दिए हैं।
लगातार हो रही हाई-लेवल बैठकें
इस सप्ताह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में यह दूसरी उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक थी। इससे पहले हुई बैठक में उन्होंने अल नीनो से जुड़ी संभावित चुनौतियों को देखते हुए सभी विभागों को आपदा प्रबंधन की तैयारी मजबूत करने और आपसी समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए थे। इस बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारी भी मौजूद थे।


