झांसी में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के पुतले जलाए:भाजपा कार्यकर्ताओं ने दोनों पार्टी के नेताओं को बताया महिला विरोधी

झांसी में राहुल गांधी और अखिलेश यादव के पुतले जलाए:भाजपा कार्यकर्ताओं ने दोनों पार्टी के नेताओं को बताया महिला विरोधी

झांसी में महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए राहुल गांधी और अखिलेश यादव का पुतला दहन किया।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। कार्यकर्ता झंडे-बैनर लेकर बीकेडी चौराहे पर पहुंचे और वहां जमकर नारेबाजी की। “महिला विरोधी दलों होश में आओ” और “नारी सम्मान का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। भाजपा पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने महिला आरक्षण से जुड़े नारी वंदन अधिनियम संशोधन को समर्थन नहीं देकर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में आगे लाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष इसमें बाधा डाल रहा है।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पहले दोनों नेताओं के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया, इसके बाद चौराहे पर दो पुतले रखे गए। एक पुतले पर समाजवादी पार्टी का झंडा और अखिलेश यादव की तस्वीर लगाई गई, जबकि दूसरे पुतले पर कांग्रेस का झंडा और राहुल गांधी की तस्वीर लगाई गई थी। कुछ देर बाद दोनों पुतलों को आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के मुद्दे पर किसी भी तरह की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विपक्ष ने अपना रुख नहीं बदला, तो आने वाले दिनों में और बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
इस मौके पर भाजपा की चित्रा सिंह, कविता शर्मा, देवेंद्र दुबे, रानू देवलिया समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। वहीं, स्थानीय लोगों की भीड़ भी प्रदर्शन को देखने के लिए जुटी रही, जिससे कुछ देर के लिए यातायात प्रभावित रहा। पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए यातायात को सुचारु कराया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में और गरमा सकता है, जिसका असर स्थानीय राजनीति के साथ-साथ प्रदेश की सियासत पर भी देखने को मिल सकता है।

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