फ्रांस के राष्ट्रपति से हुई पीएम मोदी की बातचीत: होर्मुज में सुरक्षा बहाल करने पर सहमति, भारत के लिए क्यों जरूरी?

फ्रांस के राष्ट्रपति से हुई पीएम मोदी की बातचीत: होर्मुज में सुरक्षा बहाल करने पर सहमति, भारत के लिए क्यों जरूरी?

PM Modi Emmanuel Macron Phone Call Hormuz: पश्चिम एशिया इस समय संकट से गुजर रहा है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच अहम बातचीत हुई है। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा और फ्री नेविगेशन बहाल करने पर जोर दिया है।

होर्मुज पर क्यों है दुनिया की नजर?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव और इस मार्ग में बढ़ती असुरक्षा के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है। ऐसे में इस रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है।

मोदी-मैक्रों से क्या बातचीत हुई?

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति मैक्रों से फोन पर बात की है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की और इस बात पर सहमति जताई कि होर्मुज में सुरक्षा और आवाजाही की स्वतंत्रता को जल्द से जल्द बहाल करना जरूरी है। दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग जारी रखने का भी भरोसा जताया है।

ट्रंप से भी हुई थी बातचीत

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी करीब 40 मिनट तक फोन पर बातचीत की थी। इस बातचीत में भी होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और उसे खुला रखने के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। इसके अलावा भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर भी बात हुई।

भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज?

भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है और तेल-गैस की सप्लाई मुख्यत इसी मार्ग से होती है। ऐसे में यदि इस समुद्री रास्ते में किसी भी तरह की बाधा आती है तो इसका सीधा असर भारत में ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है। इसके साथ ही सप्लाई चेन प्रभावित होती है और अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ जाता है। यानी होर्मुज में अस्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

क्या आगे बढ़ेगी कूटनीति?

मोदी-मैक्रों और मोदी-ट्रंप बातचीत से यह साफ संकेत मिल रहा है कि भारत इस संकट के बीच सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। एक तरफ वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर तमाम देश मिलकर समाधान की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। अब देखना होगा कि क्या ये कूटनीतिक पहल क्षेत्र में स्थिरता ला पाती हैं या नहीं।

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