Men Mood Swings Causes: अक्सर यह माना जाता है कि मूड स्विंग्स सिर्फ महिलाओं में होते हैं, लेकिन यह पूरी तरह गलत है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पुरुषों में भी मूड स्विंग्स होते हैं, बस वे अलग तरीके से दिखते हैं और अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। साइकेट्रिस्ट डॉ. त्रिदीप चौधरी के अनुसार, हल्के मूड स्विंग्स सामान्य होते हैं, लेकिन जब ये रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगें, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है।
पुरुषों में मूड स्विंग्स कैसे दिखते हैं?
महिलाओं की तरह पुरुषों में उदासी या रोने की बजाय मूड स्विंग्स अक्सर गुस्से, चिड़चिड़ापन, फ्रस्ट्रेशन या अकेले रहने की इच्छा के रूप में दिखते हैं। इसी वजह से लोग इसे सामान्य तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
Irritable Male Syndrome (IMS) क्या है?
रिसर्च (Reproduction, Fertility and Development जर्नल) के अनुसार, पुरुषों में एक स्थिति होती है जिसे Irritable Male Syndrome (IMS) कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को चिड़चिड़ापन, थकान, घबराहट और डिप्रेशन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। यह अक्सर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के कम होने से जुड़ा होता है।
क्यों नजरअंदाज हो जाते हैं ये लक्षण?
हमारे समाज में पुरुषों को अपनी भावनाएं खुलकर जाहिर करने की आदत नहीं होती। गुस्सा या चिड़चिड़ापन को नॉर्मल मान लिया जाता है और इसे काम के तनाव से जोड़ दिया जाता है। डॉ. चौधरी कहते हैं, “कई संस्कृतियों में पुरुषों का चिड़चिड़ापन सामान्य माना जाता है, इसलिए वे खुद भी इसे समस्या नहीं समझते।”
मूड स्विंग्स के कारण क्या हैं?
मूड स्विंग्स के पीछे कई वजह हो सकती हैं:
- ज्यादा तनाव और काम का दबाव
- नींद की कमी
- बचपन के अनुभव या मानसिक दबाव
- शराब या नशे का सेवन
- हार्मोनल बदलाव
खासतौर पर नींद की कमी आजकल एक बड़ा कारण बन गई है, जो मानसिक संतुलन को बिगाड़ देती है।
कब हो जाएं सावधान?
अगर मूड स्विंग्स बार-बार हों और इनका असर रिश्तों, काम या रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि आपको मदद की जरूरत है।
पुरुष मदद लेने से क्यों कतराते हैं?
कई पुरुष सोचते हैं कि उन्हें खुद ही सब संभालना चाहिए। समाज का डर, शर्म या जजमेंट का डर भी उन्हें डॉक्टर के पास जाने से रोकता है।
कैसे करें बचाव और सुधार?
- रोजाना पर्याप्त नींद लें
- तनाव कम करने की कोशिश करें
- एक्सरसाइज और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाएं
- शराब और नशे से दूरी बनाएं
- जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग या थेरेपी लें
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


