महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने सोलापुर और माढा लोकसभा क्षेत्र की पूरी जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद दोनों ही क्षेत्रों में संगठन की सभी नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
शिवसेना की पूरी कार्यकारिणी बरखास्त
मिली जानकारी के अनुसार, शिवसेना की केवल जिला कार्यकारिणी ही नहीं बल्कि महिला आघाड़ी, युवासेना और अन्य प्रकोष्ठों को भी भंग कर दिया गया है। इसका मतलब साफ है कि अब सोलापुर और माढा लोकसभा क्षेत्र में जिलाप्रमुख से लेकर शाखाप्रमुख तक सभी पद रिक्त हो गए हैं। पार्टी अब पूरी तरह नए सिरे से यहां संगठन खड़ा करने की तैयारी में है।
समीक्षा बैठक के बाद गिरी गाज
इस कार्रवाई से एक दिन पहले ही शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे (Shrikant Shinde) ने सोलापुर में एक अहम समीक्षा बैठक ली थी। इस बैठक के दौरान कुछ पदाधिकारियों के कामकाज को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी। बताया जा रहा है कि बैठक में अनुशासनहीनता और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे, जिसके बाद यह कड़ा फैसला लिया गया।
पदाधिकारियों के कामकाज से खुश नहीं थे शिंदे
समीक्षा बैठक में श्रीकांत शिंदे ने सोलापुर, धाराशिव और माढा लोकसभा क्षेत्रों के संगठनात्मक कामकाज का विस्तार से आकलन किया था। उन्होंने बताया कि पार्टी प्रमुख के आदेशानुसार अब लोकसभा स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक हर पदाधिकारी के काम की समीक्षा की जाएगी। जिनके पास पद है, उन्होंने क्या काम किया है, इसका पूरा हिसाब लिया जाएगा। यही वजह है कि बैठक के तुरंत बाद संगठन पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिली।
इस फैसले के बाद अब इन दोनों लोकसभा क्षेत्रों में नई कार्यकारिणी गठित किए जाने की संभावना बढ़ गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संगठन में नई ऊर्जा लाने के लिए नए और सक्रिय चेहरों को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
कार्यकर्ता बनकर जनता के बीच जाएं- एकनाथ शिंदे
गौरतलब है कि हाल ही में पुणे में भी शिवसेना की पूरी कार्यकारिणी को भंग किया गया था। इसे पार्टी नेतृत्व की सख्त कार्यशैली का संकेत माना जा रहा है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना सुप्रीमो एकनाथ शिंदे ने साफ संदेश दिया है कि संगठन में ढिलाई या निष्क्रियता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि जो नेता काम नहीं करेगा, उसे पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं होगा, चाहे वह कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो। मंत्री, सांसद और विधायक जैसे बड़े पदों के तामझाम को बाजू में रखकर सभी को सामान्य कार्यकर्ता की तरह जमीन पर उतरकर काम करना ही पड़ेगा।


