हम डूब जाएंगे… SpiceJet के वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट में यह क्यों कहा? एयरलाइन पर घिर रहे संकट के बादल

हम डूब जाएंगे… SpiceJet के वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट में यह क्यों कहा? एयरलाइन पर घिर रहे संकट के बादल

SpiceJet Delhi High Court: जब किसी कंपनी का वकील कोर्ट में खड़े होकर कहे कि “हम डूब जाएंगे” तो समझ लीजिए हालात कितने गंभीर हो गए हैं। सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में यही हुआ। SpiceJet की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच के सामने कहा कि अगर अभी 144.5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश माना गया तो एयरलाइन का पूरा सिस्टम चरमरा जाएगा। उनके शब्द थे, ‘सारा बिजनेस ठप पड़ जाएगा…मैं तीन बड़ी एयरलाइन्स में सबसे छोटा हूं। अगर खाते अटैच हुए तो सारा सिस्टम ढह जाएगा, कम से कम मैं तो ढह जाऊंगा।’ रोहतगी ने कोर्ट से फंड जुटाने के लिए टाइम देने के लिए कहा। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई 15 अप्रैल तक के लिए टाल दी है।

मामला क्या है?

यह विवाद काफी पुराना है। जनवरी 2015 में कलानिधि मारन और KAL Airways ने अपनी SpiceJet में 58.46% हिस्सेदारी अजय सिंह को बेची थी। उस वक्त एयरलाइन की हालत बहुत खराब थी। सौदे के तहत मारन ने करीब 679 करोड़ रुपये कन्वर्टिबल वारंट और प्रेफरेंस शेयर के जरिए लगाए थे। बाद में मारन ने आरोप लगाया कि नई मैनेजमेंट ने ये इंस्ट्रूमेंट जारी नहीं किए और पैसे वापस मांगे। मामला आर्बिट्रेशन में गया। जुलाई 2018 में तीन रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जजों की ट्रिब्यूनल ने मारन की 1300 करोड़ से ज्यादा के हर्जाने की मांग तो खारिज कर दी, लेकिन SpiceJet को 579 करोड़ रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया। तब से यह मामला अदालतों में घूम रहा है।

अब तक क्या हुआ?

SpiceJet का कहना है कि वह अब तक करीब 730 करोड़ रुपये मारन और KAL Airways को दे चुकी है। लेकिन ब्याज की गिनती पर विवाद बना रहा। जनवरी में दिल्ली हाईकोर्ट ने SpiceJet और उसके प्रमोटर अजय सिंह को 144.5 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया। एयरलाइन सुप्रीम कोर्ट गई, वहां से राहत नहीं मिली, उल्टे कोर्ट ने मुकदमेबाजी खींचने पर जुर्माना भी लगाया। मार्च में हाईकोर्ट में दोबारा अर्जी दी गई कि नकद की जगह गुड़गांव में एक एकड़ की कमर्शियल प्रॉपर्टी जमानत के तौर पर ले ली जाए। 18 मार्च को यह भी खारिज हो गई।

गुड़गांव की प्रॉपर्टी

इस बार फिर वही प्रस्ताव आया। रोहतगी ने कहा कि गुड़गांव की यह प्रॉपर्टी कर्जमुक्त है और कंपनी की अपनी है। टाइटल डीड कोर्ट में जमा करने को तैयार हैं। CBRE नाम की रियल एस्टेट कंपनी को बेचने का काम सौंपा गया है। लेकिन ऐसे सौदों में महीने लगते हैं। जबरदस्ती बेचने पर आधी कीमत भी नहीं मिलेगी।

सरकारी राहत पैकेज की उम्मीद

रोहतगी ने एक और बात कही जो ध्यान खींचती है। उन्होंने बताया कि सरकार एविएशन सेक्टर के लिए एक पैकेज लाने की तैयारी में है जिसमें PSU बैंकों से सरकारी गारंटी पर कर्ज मिल सकेगा। अगर यह पैकेज आया तो SpiceJet की मुश्किलें कुछ कम हो सकती हैं। मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से खाड़ी देशों की उड़ानें प्रभावित हैं। जेट फ्यूल महंगा है। SpiceJet पहले से ही किराया न चुकाने पर विमान जब्ती, लेनदारों की अदालती कार्रवाई और नकदी संकट झेल रही है।

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