वृंदावन में नाव हादसे के बाद पूरे प्रदेश में गंगा और अन्य नदियों में नौका विहार को लेकर सख्ती बरती जा रही है। इसी क्रम में वाराणसी में भी नाविकों लगातार जल पुलिस और नगर निगम के साथ ही साथ जिला प्रशासन एडवाइजरी जारी कर सतर्क कर रहा है। हाल ही में वाराणसी में हुए नाव हादसे के बाद सभी नावों पर लाइफ जैकेट्स अनिवार्य की गयी है। ये लाइफ जैकेट्स ISI मार्क की होनी चाहिए। साथ ही नाव पर अब नाविक गोताखोर भी लेकर चल रहे हैं। ऐसे में दैनिक भास्कर ने राजघाट से गुजरने वाली नावों और वहां खड़ी नावों की पड़ताल की। वहीं वाराणसी के राजघाट से चलने वाली शव वाहिनी मोटर बोट्स की स्थिति भी जानी और देखा की क्या इनपर बैठें वाले शवयात्रियों को लाइफ जैकेट्स पहनी है या नहीं इसकी भी पड़ताल की। पढ़िए रिपोर्ट… देखिये गंगा में बोटिंग और सुरक्षा मानकों की फोटो…
सबसे पहले जानिए गंगा में नौकायान के हालात और नावों की स्थिति… वाराणसी के नाविकों की मानें तो गंगा जी में 2500 से 3000 नाव हैं। इसमें से 12 से कुछ अधिक का नगर निगम ने लाइसेंस जारी कर रखा है। नाविकों ने ही नाम न छपने की शर्त पर बताया कि सभी नावों का लाइसेंस खत्म हो गया। साल 2026 में किसी का भी लाइसेंस रिनिवल नहीं हुआ है। राजघाट से चलती हैं 100 से अधिक नाव सुबह सूरज उगने से पहले से लोग नाव में बैठने और नौका विहार के लिए काशी के गंगा तट पर पहुंचने लगते हैं। इसके बाद नौका विहार शुरू हो जाता है। राजघाट पर कई बड़ी नाव और छोटी नाव मौजूद हैं। यहां से गुजरने वाली नावों में दोपहर में कम सवारियां थीं। किसी नाव पर लोग लाइफ जैकेट के साथ दिखे तो किसी नाव पर लोग बिना लाइफ जैकेट के ही चल रहे थे। घाट के किनारे करीब 100 से अधिक नाव बंधी हुई थी। अब जानिए शवयात्रियों की नावों पर किस तरह बरती जा रही लापरवाही … NDRF करता है बुकिंग, निशुल्क सेवा राजघाट पर NDRF की तरफ से शवों को मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र महाश्मशान ले जाने के लिए नव की बुकिंग होती है। ये पूरी तरह से निशुल्क होती है। लेकिन इन निशुल्क नावों पर जान जोखिम में डालकर शवयात्री सफर करते हैं। शवयात्रियों की नावों में किसी भी प्रकार की सुरक्षा का इंतजाम नहीं दिखाई दिया। एक भी लाइफ जैकेट किसी ने भी नहीं पहन रखी थी। और न ही एक भी टायर का सेफ्टी ट्यूब नाव पर दिखाई दिया जो किसी भी अनहोनी में बचा सके। सुधांशु मेहता फाउंडेशन की नाव घाट के नाविकों ने बताया – ये ठेके पर नाव चल रही है। सुधांशु मेहता फाउंडेशन की है। मौके पर दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो टीम के सामने ही शव लेकर निकली नाव पर बैठे 20 यात्रियों की किसी भी प्रकार की लाइएफ जैकेट्स नहीं दी गई थी। इस संबंध में नाविकों से बात करनी चाही और बुकिंग कर रहे लोगों से बात की गयी तो उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। जानिए नाविकों ने सुरक्षा और वृंदावन की घटना पर क्या कहा?… वाराणसी में नाव चलाने वाले नाविकों की मानें तो यहां सभी नाविक लाइफ जैकेट्स और गोताखोरों के साथ ही गंगा में नौका उतारता है। बिना उसके गंगा में नाव नहीं चलाया जा रही है। नाविकों के अनुसार वो सभी सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए गंगा में पर्यटकों को नौका विहार करवा रहे हैं। लेकिन उसके बाद भी नगर निगम हमारी नहीं सुन रहा है। अपने से ज्यादा पर्यटकों की करते हैं सुरक्षा राजघाट माझी समाज के अध्यक्ष दुर्गा माझी ने बताया – हम लोग अपने से ज्यादा पर्यटकों को सुविधा देते हैं। हम लोग नव पर लाइफ जैकेट्स, टायर रिंग और गोताखोर को भी नाव पर रखते हैं। ताकि कोई भी घटना हो उसे तुरंत संभाल लिया जाए। दुर्गा ने कहा – वृन्दावन में जो हुआ वह बहुत ही असहनीय है। वाराणसी में जिस तरह से लाइफ जैकेट्स की बात होती है वैसे वहां नहीं थी। जबकि वो ठेके की नाव थी इसलिए ऐसा था। सिर्फ वृन्दावन ही नहीं पूरे प्रदेश और वाराणसी में नहीं ठेके वाली नाव बंद कराई जाए। क्योंकि घटना वो करते हैं और परेशान हमें किया जाता है। जब टाइटेनिक नहीं बचा तो छोटी सी नाव की किया औकात गोविंद सहानी नीरज ने कहा – हम लोग मांझी समाज के लोग हैं और जब 882 फिट का टाइटेनिक जहाज नहीं बचा टकराने के बाद तो छोटी से नाव की बात कर रहे हैं। तेज हवा थी और पांटून पुल से टकराकर ये हादसा हुआ लेकिन इसके बाद नाविक समुदाय पर टिका टिप्पणी की जा रही है। जबकि अक्सर बड़े-बड़े शिव और नाव का हादसा सामने आता है लेकिन उसपर कोई नहीं बोलता है। दो तरह की ISI मार्क वाली लाइफ जैकेट्स करते हैं यूज गोविंद ने बताया – वाराणसी में नगर निगम और जिला प्रशासन के निर्देश के बाद सभी नावा पर लाइफ जैकेट्स इस्तेमाल की जा रही है। हमसे ISI मार्क वाली लाइफ जैकेट्स इस्तेमाल करने की बात कही गयी थी। दो तरह की लाइफ जैकेट्स आती हैं। एक 90 किलो और एक 120 किलो वजन संभालने वाली। ज्यादातर नावों में 120 किलो वाली लाइफ जैकेट्स हैं।


