बिहार को 13 अप्रैल के बाद एक नया मुख्यमंत्री और नई सरकार मिल सकती है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 30 मार्च को एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद उन्होंने हाल ही में संसद सदस्य के रूप में शपथ ली है। पटना में मुख्यमंत्री आवास पर नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में झा ने कहा कि उन्हें लगता है कि नई सरकार को औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया 13 अप्रैल के बाद शुरू हो सकती है।
13 अप्रैल के बाद प्रक्रिया के संकेत
नीतीश कुमार के संसद सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद भी यह सस्पेंस बना हुआ है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इस पर संजय झा ने कहा, “मुझे लगता है कि यह प्रक्रिया 13 अप्रैल के बाद शुरू होगी। हालांकि, अधिक जानकारी के लिए आपको राज्य सरकार में शामिल लोगों से बात करनी चाहिए।”
सीएम चयन में BJP की अहम भूमिका
रविवार को बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मुख्यमंत्री से मिलने उनके आवास पहुंचे। सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का सबसे मज़बूत दावेदार माना जा रहा है। उनके और संजय झा के अलावा, जदयू के वरिष्ठ नेता एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी भी उसी दिन नीतीश कुमार से मुलाकात करने उनके आवास पहुंचे।
मुलाकात के बाद बाहर निकलते हुए विजय कुमार चौधरी ने पत्रकारों से कहा, “नए मुख्यमंत्री का चयन एनडीए के विधायक, बीजेपी की सिफारिश पर करेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “नई सरकार के गठन में बीजेपी की अहम भूमिका है। इन मामलों में उसकी अपनी प्रक्रिया होती है। जब वह अपनी योजना के साथ आगे बढ़ेगी, तब आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।”
शत्रुघ्न सिन्हा का तंज
शनिवार को अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा, जो बीजेपी में दशकों बिताने के बाद अब टीएमसी में शामिल हो चुके हैं, ने भाजपा की ‘हाई-कमांड संस्कृति’ पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “बिहार को किसी ऐसे ‘बाबा’ से सावधान रहना चाहिए, जो अपने साथ कोई ‘पर्ची’ लेकर आए।”
उनका इशारा भाजपा-शासित कई राज्यों की उन घटनाओं की ओर था, जहां दिल्ली से आए दूतों के पास केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय किया गया नाम होता है और मुख्यमंत्री पद कथित तौर पर ऐसे उम्मीदवारों को मिल जाता है, जिनकी उम्मीद कम मानी जाती है।


