लखनऊ में समता अधिकार सम्मेलन, सामाजिक न्याय पर मंथन:जातीय जनगणना, यूजीसी रेगुलेशन पर संघर्ष तेज करने की रणनीति

लखनऊ में समता अधिकार सम्मेलन, सामाजिक न्याय पर मंथन:जातीय जनगणना, यूजीसी रेगुलेशन पर संघर्ष तेज करने की रणनीति

लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में समता अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें बहुजन समाज के बुद्धिजीवी, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और युवा-छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए। सम्मेलन में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर, बी.पी मंडल और ज्योतिबा फुले को याद किया गया। इस सम्मेलन में जातीय जनगणना, यूजीसी रेगुलेशन के समर्थन और सामाजिक न्याय के व्यापक एजेंडे पर संघर्ष तेज करने की रणनीति तय की गई। कार्यक्रम के दौरान ‘करेंट एजेंडा’ पत्रिका और ‘बसावन इंडिया’ का विमोचन भी किया गया। कानूनों का विरोध संविधान का विरोध है वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा कि वर्तमान समय में बहुजन समाज की नई पीढ़ी पर सबसे बड़ा हमला हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मनुवादी विचारधारा युवाओं के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।चमड़िया ने यूजीसी गाइडलाइंस का समर्थन करते हुए कहा कि परिसरों में भेदभाव के खिलाफ बने कानूनों का विरोध संविधान का विरोध है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब भी सामाजिक न्याय की चेतना मजबूत होती है, उसे सांप्रदायिकता के माध्यम से कमजोर करने की साजिशें रची जाती हैं। सामाजिक न्याय की लड़ाई अपने हाथों में ले बिहार से आए सामाजिक न्याय आंदोलन के संयोजक रिंकू यादव ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी पट्टी में युवाओं ने सामाजिक न्याय की लड़ाई अपने हाथों में ले ली है।यादव ने अतिपिछड़ी जातियों के मुद्दों को मुख्यधारा में लाने और जातीय जनगणना के साथ आबादी के अनुपात में भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। जेएनयू छात्रसंघ के सहसचिव और आइसा नेता दानिश ने परिसरों में जातिगत भेदभाव के चरम पर होने की बात कही। उन्होंने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक यह भेदभाव समाप्त नहीं होगा, ऐसी घटनाएं जारी रहेंगी।रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शोएब ने लोकतंत्र में अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष को आवश्यक बताया। ‘करेंट एजेंडा’ के संपादक अनूप पटेल ने जातीय जनगणना के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

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