दुर्लभ और जटिल सर्जरी ने 18 वर्षीय आदिवासी युवती ज्योत्सना को नया जीवन दिया है। यह युवती सिकल सेल एनीमिया नामक आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित थी, जो हर 1000 मरीजों में से एक को होती है। इस बीमारी के कारण उसके दोनों हिप जॉइंट सूख गए थे। वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गई थी। मेहसाणा जिले के विसनगर स्थित नूतन जनरल अस्पताल में यह सर्जरी की गई।अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग के निदेशक डॉ. जे.पी. मोदी (अहमदाबाद सिविल अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक) ने बताया कि ज्योत्सना के मामले में टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) ही एकमात्र विकल्प था। इतनी कम उम्र में टीएचआर करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। इसके लिए सटीक योजना और अत्यधिक कुशल शल्यक्रिया की आवश्यकता होती है। इसके बावजूद यह सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की और मरीज युवती अगले ही दिन से चलने फिरने लग गई। बनासकांठा जिले की रहने वाली यह युवती कई वर्षों से पीड़ा झेल रही थी। पहले स्थानीय डॉक्टरों ने उसे क्षय रोग बताकर इलाज शुरू किया, लेकिन बाद में नूतन अस्पताल में जांच से सिकल सेल एनीमिया का सही निदान हुआ। इस बीमारी में रक्तकणों का आकार बदल जाता है और शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचना कठिन हो जाता है। इसके चलते हड्डियों में रक्त प्रवाह रुक जाता है और हिप जॉइंट सूखने लगते हैं। इस स्थिति में न सिर्फ उसे चलने फिरने में तकलीफ होती थी बल्कि पीड़ा भी हो रही थी।
पीड़ा से निजात मिलने पर बदल गया जीवन
पिछले दिनों हुई इस सर्जरी के बाद ज्योत्सना का जीवन बदल गया। उसे पीड़ा से निजात मिल गई। ऑपरेशन आयुष्यमान भारत कार्ड और ट्रस्ट की मदद से पूरी तरह मुफ्त किया गया। फिलहाल युवती की हालत बेहतर बताई गई है।


