गाते-गाते मौत के अलावा अधूरी रह गई आशा भोसले की एक और ख्वाहिश, कभी पूरी नहीं कर पाई ये इच्छा

गाते-गाते मौत के अलावा अधूरी रह गई आशा भोसले की एक और ख्वाहिश, कभी पूरी नहीं कर पाई ये इच्छा

Asha Bhosle Last Wish: भारतीय संगीत जगत की अमर आवाज कही जाने वाली आशा भोसले के निधन की खबर ने देश-विदेश में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरे शोक में डुबो दिया। सात दशकों से अधिक समय तक अपनी आवाज से पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध करने वाली इस महान गायिका के जाने के बाद अब उनसे जुड़ी कई भावनात्मक यादें सामने आ रही हैं। इन्हीं यादों में से एक ऐसी इच्छा भी सामने आई है, जो उनके दिल के बेहद करीब थी, लेकिन पूरी नहीं हो सकी।

संगीतकार ने साझा किया किस्सा (Asha Bhosle Last Wish)

‘हिंदुस्तान’ से बातचीत करते हुए संगीतकार और सामाजिक कार्यकर्ता अफजल मंगलोरी ने आशा भोसले से जुड़ी एक खास मुलाकात को याद करते हुए बताया कि उनके मन में हरिद्वार के गंगा तट पर एक भव्य संगीत संध्या आयोजित करने की गहरी इच्छा थी। वे मां गंगा की आरती और स्तुति को अपनी आवाज में प्रस्तुत करना चाहती थीं। उनके लिए ये सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव होता, जिसे वे लंबे समय से महसूस करना चाहती थीं।

दो साल पहले संगीतकार की हुई मुलाकात

अफजल मंगलोरी के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले मुंबई के यशराज स्टूडियो में एक रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी आशा भोसले से मुलाकात हुई थी। उस दौरान बातचीत के बीच जब आशा जी को पता चला कि उनका संबंध हरिद्वार से है, तो उन्होंने तुरंत उस शहर के प्रति अपना विशेष लगाव व्यक्त किया। उन्होंने कहा था कि उन्होंने दुनिया के कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी है, लेकिन हरिद्वार के पवित्र घाटों पर गाने की उनकी इच्छा अभी भी अधूरी है। यह बात बताते समय उनके चेहरे पर एक अलग ही भावनात्मक चमक दिखाई दे रही थी।

गंगा तट पर गाना चाहती थीं आशा भोसले (Asha Bhosle Last Wish)

बताया जाता है कि आगामी कुंभ के अवसर पर उन्हें हरिद्वार आमंत्रित करने को लेकर भी चर्चा चल रही थी। इस आयोजन के माध्यम से उनकी वर्षों पुरानी इच्छा को पूरा करने की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि, इससे पहले कि ये सपना साकार हो पाता, उनके निधन की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया। यह खबर न सिर्फ संगीत प्रेमियों के लिए बल्कि उन लोगों के लिए भी बेहद भावुक कर देने वाली रही, जो उनसे व्यक्तिगत रूप से जुड़े रहे थे।

सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं ने भी जताया दुख

उनके निधन के बाद उत्तराखंड की विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं ने भी गहरा शोक व्यक्त किया। उत्तराखंड नागरिक सम्मान समिति और कलम साधना फाउंडेशन सहित कई संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय संगीत जगत ने अपनी एक अनमोल धरोहर खो दी है। उनकी आवाज़ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

आशा भोसले का जीवन सिर्फ एक गायिका की यात्रा नहीं था, बल्कि वो भारतीय संगीत की बदलती परंपराओं और समय के साथ उसकी प्रगति की जीवंत कहानी भी था। आज भले ही वो हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

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