शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्या मठ में आज एक उच्च-स्तरीय आपातकालीन बैठक संपन्न हुई। बैठक में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी और उसके पश्चात वाराणसी पुलिस प्रशासन की कारवाई पर नाराजगी जताई गई। बैठक में शहर के अधिवक्ता और शंकराचार्य के भक्त मौजूद रहे। अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कहा डिजिटल माध्यम से धमकी मिलने के बावजूद पुलिस द्वारा IT Act की धाराओं को सम्मिलित न करना प्रशासन की ‘अति-संवेदनहीनता’ और कानूनी तथ्यों को दबाने का कुत्सित प्रयास है। शासन-प्रशासन प्रमुख माँग की गई • मामले की पराकाष्ठा को देखते हुए FIR में तत्काल कठोरतम धाराओं का संशोधन किया जाए। • आरोपी की अविलंब गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। • कर्तव्य पालन में घोर लापरवाही बरतने वाले भेलूपुर थाने के उत्तरदायी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्यवाही हो। आरोपियों को गिरफ्तार करने की उठी मांग
बैठक वकीलों ने कहा कि शंकराचार्य करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं। उनके प्रति यह प्रशासनिक धृष्टता पूरे हिंदू समाज का अपमान है। यदि शीघ्र ही न्यायसंगत और कठोर कार्यवाही सुनिश्चित नहीं हुई, तो समस्त हिंदू समाज सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन हेतु बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण उत्तरदायित्व वाराणसी प्रशासन का होगा। शंकराचार्य को दी जाये Z+ सुरक्षा – संजय
शंकराचार्य मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने कहा – भारत सरकार सनातनियों के भावनाओं को ध्यान में रखकर अविलंब परमधर्माधिश शंकराचार्य जी महाराज को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान करे। आखिर जब एक से एक अनुपयोगी स्वयंभू संस्थाओं के प्रमुखों को सुरक्षा दी जा सकती है तो भारत में सौ करोड़ सनातनियों के प्राणवायु शंकराचार्य जी को सुरक्षा क्यों नही दी जा रही है?अगर कुछ अनहोनी हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी??


