गयाजी नगर निगम के कर्मी की 14 अप्रैल से हड़ताल:5000 लोग होंगे शामिल, कहा- दैनिक मजदूरों की सेवा को स्थायी करें

गया नगर निगम और बोधगया नगर परिषद के कर्मचारियों ने अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। बिहार लोकल बॉडी इंप्लाइज फेडरेशन के बैनर तले कर्मियों ने 14 अप्रैल से पूरे बिहार में अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम की चेतावनी दी है। यह घोषणा रविवार को गया नगर निगम कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में की गई। फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष और गया वाटर वर्क्स कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजीत सिंह ने बताया कि सोमवार को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में जिलाधिकारी के समक्ष बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन में गया नगर निगम, बोधगया नगर परिषद और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लगभग 5000 मजदूर शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सालों से पत्राचार के माध्यम से अधिकारियों को मांगों से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। दैनिक मजदूरों की सेवा को स्थायी करने की मांग कर्मियों की 10 सूत्री मांगों में दैनिक मजदूरों की सेवा को स्थायी करना प्रमुख है। कई कर्मचारी 20 से 25 साल से लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक स्थायी नहीं किया गया है। अन्य प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार की ओर से संशोधित न्यूनतम वेतन लागू करना, अस्थायी कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ देना और पांचवें एवं छठे वेतनमान का बकाया एकमुश्त भुगतान करना शामिल है। फेडरेशन ने सफाई पर्यवेक्षकों के लिए न्यूनतम 8 घंटे का कार्य समय निर्धारित करने और अतिरिक्त काम के लिए दोगुना ओवरटाइम भुगतान करने की भी मांग की है। इसके अतिरिक्त, कर्मियों को एसीपी (Assured Career Progression) और एमएसीपी (Modified Assured Career Progression) का फायदा देने, बिना जांच के वेतन रोकने या दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने तथा मृत कर्मियों के आश्रितों को नौकरी देने की मांग भी उठाई गई है। फेडरेशन ने आउटसोर्सिंग कर्मियों को नगर निगम कर्मचारी का दर्जा देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि ये सभी मांगें नगर निगम स्तर पर ही पूरी की जा सकती हैं, इसके लिए नगर विकास विभाग से किसी विशेष सहमति की आवश्यकता नहीं है। बावजूद इसके, अधिकारियों की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। संजीत सिंह ने कहा कि गया नगर निगम को राज्य में नंबर वन का दर्जा मिला है, लेकिन यहां काम करने वाले मजदूरों की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है, जिससे उनमें भारी असंतोष है।

धरना प्रदर्शन के बाद भी यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो 14 अप्रैल से राज्यव्यापी हड़ताल शुरू की जाएगी। इस दौरान नगर निगम से जुड़े सभी कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। गया नगर निगम और बोधगया नगर परिषद के कर्मचारियों ने अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। बिहार लोकल बॉडी इंप्लाइज फेडरेशन के बैनर तले कर्मियों ने 14 अप्रैल से पूरे बिहार में अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम की चेतावनी दी है। यह घोषणा रविवार को गया नगर निगम कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में की गई। फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष और गया वाटर वर्क्स कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजीत सिंह ने बताया कि सोमवार को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में जिलाधिकारी के समक्ष बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शन में गया नगर निगम, बोधगया नगर परिषद और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लगभग 5000 मजदूर शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि सालों से पत्राचार के माध्यम से अधिकारियों को मांगों से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। दैनिक मजदूरों की सेवा को स्थायी करने की मांग कर्मियों की 10 सूत्री मांगों में दैनिक मजदूरों की सेवा को स्थायी करना प्रमुख है। कई कर्मचारी 20 से 25 साल से लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक स्थायी नहीं किया गया है। अन्य प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार की ओर से संशोधित न्यूनतम वेतन लागू करना, अस्थायी कर्मियों को सातवें वेतनमान का लाभ देना और पांचवें एवं छठे वेतनमान का बकाया एकमुश्त भुगतान करना शामिल है। फेडरेशन ने सफाई पर्यवेक्षकों के लिए न्यूनतम 8 घंटे का कार्य समय निर्धारित करने और अतिरिक्त काम के लिए दोगुना ओवरटाइम भुगतान करने की भी मांग की है। इसके अतिरिक्त, कर्मियों को एसीपी (Assured Career Progression) और एमएसीपी (Modified Assured Career Progression) का फायदा देने, बिना जांच के वेतन रोकने या दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने तथा मृत कर्मियों के आश्रितों को नौकरी देने की मांग भी उठाई गई है। फेडरेशन ने आउटसोर्सिंग कर्मियों को नगर निगम कर्मचारी का दर्जा देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि ये सभी मांगें नगर निगम स्तर पर ही पूरी की जा सकती हैं, इसके लिए नगर विकास विभाग से किसी विशेष सहमति की आवश्यकता नहीं है। बावजूद इसके, अधिकारियों की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। संजीत सिंह ने कहा कि गया नगर निगम को राज्य में नंबर वन का दर्जा मिला है, लेकिन यहां काम करने वाले मजदूरों की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है, जिससे उनमें भारी असंतोष है।

धरना प्रदर्शन के बाद भी यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो 14 अप्रैल से राज्यव्यापी हड़ताल शुरू की जाएगी। इस दौरान नगर निगम से जुड़े सभी कार्य प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आम जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।  

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