सीवान शहर के अपूर्वा स्वीट्स से 3 नाबालिग मुक्त:बाल श्रम के आरोप में संचालक पर FIR दर्ज, पदाधिकारी बोलीं-बख्शा नहीं जाएगा

सीवान शहर के अपूर्वा स्वीट्स से 3 नाबालिग मुक्त:बाल श्रम के आरोप में संचालक पर FIR दर्ज, पदाधिकारी बोलीं-बख्शा नहीं जाएगा

सीवान में बाल श्रम के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक बड़ी और सख्त कार्रवाई सामने आई है। शहर के चर्चित प्रतिष्ठान अपूर्वा स्वीट्स पर छापेमारी के दौरान तीन नाबालिग बच्चों को काम करते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए संचालक उपेंद्र तिवारी के खिलाफ टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज करा दी है। यह कार्रवाई 9 अप्रैल 2026 को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा गठित धावादल की टीम ने की। टीम ने नगर थाना के सहयोग से जेपी चौक स्थित दुकान पर अचानक छापा मारा, जहां 10 से 13 वर्ष के मासूम बच्चे मजदूरी करते पाए गए। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि बच्चों से खुलेआम कानून का उल्लंघन करते हुए काम कराया जा रहा था। छापेमारी के दौरान तीनों बच्चों को तत्काल श्रम से मुक्त कराया गया। जांच में सामने आया कि ये बच्चे बिहार के विभिन्न जिलों से लाकर यहां काम में लगाए गए थे। टीम ने मौके पर ही सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। श्रम विभाग ने साफ शब्दों में कहा है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना कानूनन अपराध है। इसके बावजूद शहर के बीचों-बीच इस तरह का गंभीर उल्लंघन होना प्रशासनिक सख्ती पर भी सवाल खड़े करता है। इस मामले में संचालक उपेंद्र तिवारी को सीधे तौर पर दोषी मानते हुए उनके खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1956 की धारा 3/3A और धारा 14A के तहत मामला दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में भी केस दर्ज किया गया है। कार्रवाई में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अनीता देवी के नेतृत्व में मुरारी सिंह, सधांशु रंजन पाण्डेय, श्याम सुन्दर गुप्ता, विश्वजीत कुमार और जितेन्द्र पासवान की टीम शामिल रही। सीएसए स्वीटी कुमारी सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि आवेदन मिलते ही मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेज़ी से की जा रही है। यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है, सीवान में अब बाल श्रम करने वालों की खैर नहीं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सीवान में बाल श्रम के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एक बड़ी और सख्त कार्रवाई सामने आई है। शहर के चर्चित प्रतिष्ठान अपूर्वा स्वीट्स पर छापेमारी के दौरान तीन नाबालिग बच्चों को काम करते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए संचालक उपेंद्र तिवारी के खिलाफ टाउन थाना में प्राथमिकी दर्ज करा दी है। यह कार्रवाई 9 अप्रैल 2026 को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग द्वारा गठित धावादल की टीम ने की। टीम ने नगर थाना के सहयोग से जेपी चौक स्थित दुकान पर अचानक छापा मारा, जहां 10 से 13 वर्ष के मासूम बच्चे मजदूरी करते पाए गए। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि बच्चों से खुलेआम कानून का उल्लंघन करते हुए काम कराया जा रहा था। छापेमारी के दौरान तीनों बच्चों को तत्काल श्रम से मुक्त कराया गया। जांच में सामने आया कि ये बच्चे बिहार के विभिन्न जिलों से लाकर यहां काम में लगाए गए थे। टीम ने मौके पर ही सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की। श्रम विभाग ने साफ शब्दों में कहा है कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का कार्य कराना कानूनन अपराध है। इसके बावजूद शहर के बीचों-बीच इस तरह का गंभीर उल्लंघन होना प्रशासनिक सख्ती पर भी सवाल खड़े करता है। इस मामले में संचालक उपेंद्र तिवारी को सीधे तौर पर दोषी मानते हुए उनके खिलाफ बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1956 की धारा 3/3A और धारा 14A के तहत मामला दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में भी केस दर्ज किया गया है। कार्रवाई में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अनीता देवी के नेतृत्व में मुरारी सिंह, सधांशु रंजन पाण्डेय, श्याम सुन्दर गुप्ता, विश्वजीत कुमार और जितेन्द्र पासवान की टीम शामिल रही। सीएसए स्वीटी कुमारी सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। नगर थाना प्रभारी अविनाश कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि आवेदन मिलते ही मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेज़ी से की जा रही है। यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है, सीवान में अब बाल श्रम करने वालों की खैर नहीं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।  

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