गोपालगंज में राज्य सरकार द्वारा निजी विद्यालयों के लिए जारी किए गए नए गजट (नियमावली) को लेकर शिक्षा जगत में उबाल है। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेल्फेयर एसोसिएशन के बैनर तले शहर के काली स्थान रोड में निजी स्कूल संचालकों ने एक बैठक आयोजित की। इसमें सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए रणनीति तैयार की गई। सरकारी हितों को ध्यान में रखकर तैयार गजट बैठक में मुख्य रूप से सरकार पर यह आरोप लगाया गया कि नए नियम बनाते समय निजी स्कूलों की व्यावहारिक समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। संचालकों का तर्क है कि यह गजट केवल सरकारी हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिससे निजी शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। सरकार के इस कदम को दमनकारी और एकपक्षीय बताते हुए जिले के निजी विद्यालय संचालक अब लामबंद हो गए हैं। संचालकों का कहना है कि सरकार ने बिना किसी पूर्व विमर्श या निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों की राय लिए नियम थोप दिए हैं। गजट में शामिल कड़े नियमों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी शर्तों को पूरा करना छोटे और मध्यम दर्जे के स्कूलों के लिए लगभग असंभव है। नए मानकों को लागू करने से स्कूलों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग को सौंपा जाएगा ज्ञापन बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मांगों का एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग को सौंपा जाएगा। निजी विद्यालय संचालकों का मानना है कि वे राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ी हिस्सेदारी निभाते हैं, लेकिन सरकार उन्हें सहयोग देने के बजाय जटिल कानूनों के जाल में उलझा रही है। गोपालगंज के संचालकों ने एक स्वर में मांग की है कि शिक्षा का अधिकार तभी सफल होगा जब सरकार निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों के प्रति समान और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण रखेगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष फैज अहमद ने बताया कि सरकार द्वारा निजी विद्यालयों के लिए पास किया गया गजट एक पक्षीय नियमों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों के बारे में यह अफवाह फैलाई जाती है कि वे ‘लूटने’ का काम करते हैं, जबकि देश से निजी विद्यालयों को हटा दिया जाए तो शिक्षा की बुनियाद हिल जाएगी। गोपालगंज में राज्य सरकार द्वारा निजी विद्यालयों के लिए जारी किए गए नए गजट (नियमावली) को लेकर शिक्षा जगत में उबाल है। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रन वेल्फेयर एसोसिएशन के बैनर तले शहर के काली स्थान रोड में निजी स्कूल संचालकों ने एक बैठक आयोजित की। इसमें सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए रणनीति तैयार की गई। सरकारी हितों को ध्यान में रखकर तैयार गजट बैठक में मुख्य रूप से सरकार पर यह आरोप लगाया गया कि नए नियम बनाते समय निजी स्कूलों की व्यावहारिक समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। संचालकों का तर्क है कि यह गजट केवल सरकारी हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिससे निजी शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। सरकार के इस कदम को दमनकारी और एकपक्षीय बताते हुए जिले के निजी विद्यालय संचालक अब लामबंद हो गए हैं। संचालकों का कहना है कि सरकार ने बिना किसी पूर्व विमर्श या निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों की राय लिए नियम थोप दिए हैं। गजट में शामिल कड़े नियमों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी शर्तों को पूरा करना छोटे और मध्यम दर्जे के स्कूलों के लिए लगभग असंभव है। नए मानकों को लागू करने से स्कूलों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग को सौंपा जाएगा ज्ञापन बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मांगों का एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग को सौंपा जाएगा। निजी विद्यालय संचालकों का मानना है कि वे राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ी हिस्सेदारी निभाते हैं, लेकिन सरकार उन्हें सहयोग देने के बजाय जटिल कानूनों के जाल में उलझा रही है। गोपालगंज के संचालकों ने एक स्वर में मांग की है कि शिक्षा का अधिकार तभी सफल होगा जब सरकार निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों के प्रति समान और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण रखेगी। एसोसिएशन के अध्यक्ष फैज अहमद ने बताया कि सरकार द्वारा निजी विद्यालयों के लिए पास किया गया गजट एक पक्षीय नियमों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि निजी विद्यालयों के बारे में यह अफवाह फैलाई जाती है कि वे ‘लूटने’ का काम करते हैं, जबकि देश से निजी विद्यालयों को हटा दिया जाए तो शिक्षा की बुनियाद हिल जाएगी।


