Palestine Action Controversy: ब्रिटेन में पैलेस्टाइन एक्शन संगठन पर लगाए गए बैन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी है। इसी बीच लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन के लिए जुटे। शनिवार को हुए इस प्रदर्शन के दौरान 500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिससे पूरे देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
लंदन में 523 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार
लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर में सैकड़ों प्रदर्शनकारी पैलेस्टाइन एक्शन के समर्थन में इकट्ठा हुए। कई लोग I oppose genocide. I support Palestine Action” जैसे पोस्टर लेकर पहुंचे। यह प्रदर्शन “Everyone Day” नाम से आयोजित किया गया था, जिसे Defend our Juries समूह ने बुलाया था। मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने बताया कि कुल 523 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनकी उम्र 18 से 87 साल के बीच है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि प्रदर्शनकारी एक प्रतिबंधित संगठन के समर्थन में सार्वजनिक रूप से बयान दे रहे थे, जो कि आतंकवाद कानून के तहत अपराध माना जाता है।
लंदन में प्रदर्शन को लेकर सख्ती बढ़ी
पैलेस्टाइन एक्शन को जुलाई 2025 में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत बैन किया गया था। हालांकि फरवरी में हाई कोर्ट ने इस प्रतिबंध को गैरकानूनी बताया, लेकिन सरकार की अपील के चलते यह बैन अभी भी लागू है। मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने पहले संकेत दिया था कि वे गिरफ्तारी से बचेंगे, लेकिन मार्च में उन्होंने अपना रुख बदलते हुए सख्ती शुरू कर दी। पुलिस अधिकारी क्लेयर स्मार्ट ने चेतावनी दी, “जो लोग प्रतिबंधित संगठन का समर्थन करते हैं, वे कानून का उल्लंघन कर रहे हैं और हम कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।” इस बयान ने प्रदर्शन से पहले ही माहौल को तनावपूर्ण बना दिया था।
लंदन प्रदर्शन में सेलिब्रिटी भी शामिल हुए
इस प्रदर्शन में कई प्रमुख लोग भी शामिल हुए, जिनमें म्यूजिक बैंड मैसिव अटैक के संस्थापक सदस्य रॉबर्ट डेल नजा भी थे, जिन्हें बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने पहले कहा था कि पुलिस का रुख बदलना “बेतुका” है और यदि उन्हें गिरफ्तार किया गया तो वे अदालत में इसे “अवैध गिरफ्तारी” बताएंगे। उन्होंने यह भी कहा, “मुझे लगता है कि पैलेस्टाइन एक्शन की कार्रवाई देशभक्ति से भरी है, क्योंकि वे हमारे देश को गंभीर युद्ध अपराधों में शामिल होने से बचा रहे थे।” कई अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी गिरफ्तारी का जोखिम उठाने की बात कही और सरकार की नीति का विरोध किया।


