खरगोन जिले में अक्षय तृतीया (20 अप्रैल) के अवसर पर राजस्थानी निमाड़ी गागर की विशेष पूजा की जाएगी। इस दौरान किसान परिवार आगामी बारिश और फसलों के अंकुरण का परीक्षण करेंगे। जिलेभर में इस परंपरा के लिए 50 हजार से अधिक राजस्थानी गागर पहुंच चुकी हैं। इन गागरों को कारीगरों द्वारा रंगरोगन कर आकर्षक बनाया जा रहा है, जिसके बाद वे इन्हें बाजार में बेच रहे हैं। कारीगर बलराम प्रजापत ने बताया कि अकेले कसरावद क्षेत्र में ही इस परंपरा के लिए लगभग 5000 गागरों की मांग है। निमाड़ क्षेत्र में यह मान्यता है कि मिट्टी के चार ढेलों पर पानी से भरी गागर की पूजा करने से बारिश का अनुमान लगाया जा सकता है। ये चार ढेले बारिश के चार महीनों के प्रतीक होते हैं। जिस ढेले से सबसे अधिक पानी रिसकर गिरता है, उस माह में अधिक बारिश होने का अनुमान लगाया जाता है। बारिश के अनुमान के साथ ही किसान मिट्टी में विभिन्न अनाजों की बुवाई का मुहूर्त करते हैं। इसके माध्यम से वे फसलों की अंकुरण क्षमता का प्रतिशत भी ज्ञात करते हैं, जो आगामी बुवाई के लिए महत्वपूर्ण होता है। ये गागरें राजस्थान के अलावा बड़वानी जिले के राजपुर से भी लाई जा रही हैं। राजस्थानी गागरों को दो माह पहले से विशेष मिट्टी मंगाकर तैयार किया जाता है और फिर रंगरोगन कर उन्हें अंतिम रूप दिया जाता है। बाजार में देसी गागर 150 रुपए में उपलब्ध है, जबकि रंगरोगन की हुई राजस्थानी गागर 200 रुपए प्रति नग में मिल रही है। देसी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन स्तर पर फुटपाथ किनारे जगह दी गई है।


