‘तप से आत्मा निर्मल होकर कुंदन बनती है’:ब्यावर में साधुमार्गी जैन संघ ने 14 तपस्वियों का किया सम्मान

‘तप से आत्मा निर्मल होकर कुंदन बनती है’:ब्यावर में साधुमार्गी जैन संघ ने 14 तपस्वियों का किया सम्मान

ब्यावर में मेवाड़ी गेट स्थित श्री साधुमार्गी जैन श्रावक संघ और श्री जैन मित्र मंडल ने वर्षीतप आराधकों के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया। इस अवसर पर समाज सेविका वीना नाहर ने कहा कि तप से आत्मा निर्मल होकर कुंदन बनती है। आनंद भवन हॉल में हुए इस समारोह में 14 तपस्वियों को सम्मानित किया गया। इन तपस्वियों ने पिछले 13 माह से एक दिन छोड़कर एक दिन अन्न और गर्म (धोवन) ग्रहण कर वर्षीतप किया था। मोतियों की मालाएं, शॉल और रजत स्मृति चिन्ह भेंट किया
संघ अध्यक्ष गौतम चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में तपस्वियों को मोतियों की मालाएं, शॉल और रजत स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में पदमा श्रीश्रीमाल, मंजू कोठारी, सरोज सांखला, मंजू ओस्तवाल, चंद्रकांता ओस्तवाल, चंद्रकांता बाबेल, नवरत्न देवी रांका, चंचल बोहरा, मंजू गादिया, सरिता कुम्मठ, नीता कांठेड़, विद्या संचेती, पूर्णिमा लोढ़ा और अंकित गन्ना शामिल थे। सामूहिक नवकार महामंत्र के उच्चारण से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक नवकार महामंत्र के उच्चारण और नाना गुरु, राम गुरु, राजेश गुरु के जयघोष से हुई। इस दौरान “अनुमोदना-अनुमोदना”, “केसरिया-केसरिया” और “हर्ष-हर्ष जय-जय” के जयघोष से पूरा सभागार गूंज उठा। भक्ति गीतों की प्रस्तुतियों ने भी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर भामाशाह पारसमल खेतपालिया, निहाल कोठारी, उत्तम ओस्तवाल, विनोद नाहर, प्रवीण खेतपालिया, नौरत बाबेल, कैलाश खींचा, नेमीचंद जैन, ऋषभ कांकरिया, विमल खींचा, नरेश श्रीश्रीमाल सहित महिला मंडल और युवा संघ के कई सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संघ महामंत्री धर्मीचंद ओस्तवाल ने किया।

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