BNMU कुलपति पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग:मधेपुरा में संयुक्त छात्र संगठनों ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, महिला संविदा कर्मी ने लगाए थे आरोप

BNMU कुलपति पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग:मधेपुरा में संयुक्त छात्र संगठनों ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, महिला संविदा कर्मी ने लगाए थे आरोप

मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में विभिन्न समस्याओं को लेकर संयुक्त छात्र संगठनों ने प्रेस वार्ता आयोजित कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। इस दौरान छात्र नेताओं ने कहा कि पिछले दो महीनों से विश्वविद्यालय का माहौल अराजक बना हुआ है। लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो संस्थान की छवि को धूमिल कर रही हैं। NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत यादव ने कहा कि पीएम उषा फंड से प्रस्तावित राष्ट्रीय सेमिनार को अचानक स्थगित कर दिया गया, जो गंभीर सवाल खड़ा करता है। वहीं, हाल ही में एक महिला संविदा कर्मचारी द्वारा कुलपति पर लगाए गए आरोपों से छात्र संगठनों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं विश्वविद्यालय के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मेरिट लिस्ट के नाम हो रही वसूली निशांत यादव ने यूएमआईएस को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब इसे लागू किया गया था, तब महागठबंधन के छात्र संगठनों ने खुलकर विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आवेदन और मेरिट लिस्ट के नाम पर छात्रों से 300 रुपये वसूले जा रहे थे, जिसके खिलाफ आंदोलन किया गया। आज जो संगठन यूएमआईएस को लेकर विरोध जता रहे हैं, वे उस समय चुप थे और अब छात्रों के बजाय अन्य हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। छात्र राजद के जिलाध्यक्ष निखिल यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यहां पढ़ाई कम और राजनीति अधिक हो रही है। उन्होंने महिला कर्मी द्वारा लगाए गए आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। तीन पदाधिकारियों को हटाने की मांग वहीं, AISF जिलाध्यक्ष वसीममुद्दीन ने कहा कि हाल में तीन पदाधिकारियों को हटाने के बाद से विश्वविद्यालय का माहौल और भी विवादित हो गया है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या इससे पहले गड़बड़ी नहीं होती थी ? आइसा के जिला सचिव पावेल कुमार ने भी कुलपति पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में विभिन्न समस्याओं को लेकर संयुक्त छात्र संगठनों ने प्रेस वार्ता आयोजित कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। इस दौरान छात्र नेताओं ने कहा कि पिछले दो महीनों से विश्वविद्यालय का माहौल अराजक बना हुआ है। लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो संस्थान की छवि को धूमिल कर रही हैं। NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष निशांत यादव ने कहा कि पीएम उषा फंड से प्रस्तावित राष्ट्रीय सेमिनार को अचानक स्थगित कर दिया गया, जो गंभीर सवाल खड़ा करता है। वहीं, हाल ही में एक महिला संविदा कर्मचारी द्वारा कुलपति पर लगाए गए आरोपों से छात्र संगठनों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं विश्वविद्यालय के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मेरिट लिस्ट के नाम हो रही वसूली निशांत यादव ने यूएमआईएस को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब इसे लागू किया गया था, तब महागठबंधन के छात्र संगठनों ने खुलकर विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आवेदन और मेरिट लिस्ट के नाम पर छात्रों से 300 रुपये वसूले जा रहे थे, जिसके खिलाफ आंदोलन किया गया। आज जो संगठन यूएमआईएस को लेकर विरोध जता रहे हैं, वे उस समय चुप थे और अब छात्रों के बजाय अन्य हितों की लड़ाई लड़ रहे हैं। छात्र राजद के जिलाध्यक्ष निखिल यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। यहां पढ़ाई कम और राजनीति अधिक हो रही है। उन्होंने महिला कर्मी द्वारा लगाए गए आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। तीन पदाधिकारियों को हटाने की मांग वहीं, AISF जिलाध्यक्ष वसीममुद्दीन ने कहा कि हाल में तीन पदाधिकारियों को हटाने के बाद से विश्वविद्यालय का माहौल और भी विवादित हो गया है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि क्या इससे पहले गड़बड़ी नहीं होती थी ? आइसा के जिला सचिव पावेल कुमार ने भी कुलपति पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।  

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