नालंदा जिले में शादी समारोह में रसोई गैस की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। खरमास की समाप्ति के बाद आगामी 20 अप्रैल से शुरू होने वाले लगन के भारी दबाव को देखते हुए जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शादियों और अन्य बड़े आयोजनों में अब घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा। सिर्फ कमर्शियल सिलेंडरों के इस्तेमाल की ही अनुमति दी जाएगी। इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए डीएम ने जिले की सभी 54 गैस एजेंसियों की समीक्षा की और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए रसोइयों-कैटरर्स का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है, जिसे तेल कंपनियों को एक सप्ताह के भीतर पूरा करना होगा। एसडीओ को देना होगा आवेदन प्रशासन की ओर से लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, जिस परिवार में शादी है, उन्हें अब अपने संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी को शादी के कार्ड के साथ एक औपचारिक आवेदन देना होगा। इस आवेदन में मेहमानों की संभावित संख्या और आवश्यक सिलेंडरों का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा, ताकि वैवाहिक कार्यों के लिए गैस की सुलभ उपलब्धता बनी रहे। बैकलॉग को खत्म कर 2 से 3 दिनों में करें आपूर्ति जिलाधिकारी ने गैस एजेंसियों को सख्त निर्देश दिया है कि बुकिंग के वर्तमान बैकलॉग को तत्काल खत्म किया जाए और उपभोक्ताओं को बुकिंग के महज दो से तीन दिनों के अंदर सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। गैस की कालाबाजारी और अवैध व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कंट्रोल रूम का नंबर 06112-233168 भी जारी किया गया है। आयोजक खुद करते हैं हलवाई की व्यवस्था नालंदा मैरिज हॉल संघ के अध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि बिहार शरीफ और आसपास के इलाकों में संचालित लगभग 125 मैरिज हॉलों में इस सीजन में हजारों शादियां संपन्न होनी हैं, लेकिन यहां पटना की तरह ‘प्लेट सिस्टम’ का चलन बेहद कम है। जिले की लगभग 90 प्रतिशत शादियों में लोग खुद अपना हलवाई रखते हैं और गैस से लेकर राशन तक का इंतजाम खुद करते हैं, जबकि मैरिज हॉल केवल परिसर उपलब्ध कराते हैं। ऐसी स्थिति में गैस सिलेंडर जुटाने की सीधी जिम्मेदारी लड़की या लड़के पक्ष के कंधों पर आ गई है। कोयले और लकड़ी के तरफ रुख कर रहा परिवार बाजार में सिलेंडर की उपलब्धता और प्रशासनिक सख्ती को देखते हुए कई परिवारों ने अब कोयले और लकड़ी के चूल्लों जैसे पारंपरिक विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है, ताकि ऐन मौके पर गैस की किल्लत से उत्सव में कोई खलल न पड़े। बिहार शरीफ के रहने वाले अजित कुमार जिनकी शादी 30 अप्रैल को निर्धारित है। उनका कहना है कि अगर सिलेंडरों की किल्लत इसी तरह बनी रही, तो वे कोयले या लकड़ी के चूल्लों की पारंपरिक व्यवस्था की ओर रुख कर सकते हैं। नालंदा जिले में शादी समारोह में रसोई गैस की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। खरमास की समाप्ति के बाद आगामी 20 अप्रैल से शुरू होने वाले लगन के भारी दबाव को देखते हुए जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शादियों और अन्य बड़े आयोजनों में अब घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा। सिर्फ कमर्शियल सिलेंडरों के इस्तेमाल की ही अनुमति दी जाएगी। इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए डीएम ने जिले की सभी 54 गैस एजेंसियों की समीक्षा की और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए रसोइयों-कैटरर्स का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है, जिसे तेल कंपनियों को एक सप्ताह के भीतर पूरा करना होगा। एसडीओ को देना होगा आवेदन प्रशासन की ओर से लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, जिस परिवार में शादी है, उन्हें अब अपने संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी को शादी के कार्ड के साथ एक औपचारिक आवेदन देना होगा। इस आवेदन में मेहमानों की संभावित संख्या और आवश्यक सिलेंडरों का पूरा विवरण दर्ज करना अनिवार्य होगा, ताकि वैवाहिक कार्यों के लिए गैस की सुलभ उपलब्धता बनी रहे। बैकलॉग को खत्म कर 2 से 3 दिनों में करें आपूर्ति जिलाधिकारी ने गैस एजेंसियों को सख्त निर्देश दिया है कि बुकिंग के वर्तमान बैकलॉग को तत्काल खत्म किया जाए और उपभोक्ताओं को बुकिंग के महज दो से तीन दिनों के अंदर सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। गैस की कालाबाजारी और अवैध व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए प्रशासन ने चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कंट्रोल रूम का नंबर 06112-233168 भी जारी किया गया है। आयोजक खुद करते हैं हलवाई की व्यवस्था नालंदा मैरिज हॉल संघ के अध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि बिहार शरीफ और आसपास के इलाकों में संचालित लगभग 125 मैरिज हॉलों में इस सीजन में हजारों शादियां संपन्न होनी हैं, लेकिन यहां पटना की तरह ‘प्लेट सिस्टम’ का चलन बेहद कम है। जिले की लगभग 90 प्रतिशत शादियों में लोग खुद अपना हलवाई रखते हैं और गैस से लेकर राशन तक का इंतजाम खुद करते हैं, जबकि मैरिज हॉल केवल परिसर उपलब्ध कराते हैं। ऐसी स्थिति में गैस सिलेंडर जुटाने की सीधी जिम्मेदारी लड़की या लड़के पक्ष के कंधों पर आ गई है। कोयले और लकड़ी के तरफ रुख कर रहा परिवार बाजार में सिलेंडर की उपलब्धता और प्रशासनिक सख्ती को देखते हुए कई परिवारों ने अब कोयले और लकड़ी के चूल्लों जैसे पारंपरिक विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है, ताकि ऐन मौके पर गैस की किल्लत से उत्सव में कोई खलल न पड़े। बिहार शरीफ के रहने वाले अजित कुमार जिनकी शादी 30 अप्रैल को निर्धारित है। उनका कहना है कि अगर सिलेंडरों की किल्लत इसी तरह बनी रही, तो वे कोयले या लकड़ी के चूल्लों की पारंपरिक व्यवस्था की ओर रुख कर सकते हैं।


