नोएडा प्राधिकरण ने आवासीय, ग्रुप हाउसिंग और औद्योगिक भूखंडों पर हो रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में बड़ी राहत दी है। अब नोटिस वापस लेने की प्रक्रिया को आसान कर दिया गया है। पहले जहां दो समितियों की जांच के बाद नोटिस वापस होता था, अब सिर्फ एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला लिया जाएगा।
प्राधिकरण के नियमों के अनुसार इन भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं है। नियमों के उल्लंघन पर आवंटी को नोटिस जारी किया जाता है। यदि आवंटी गतिविधि बंद कर देता है, तो पहले निरीक्षण समिति जांच करती थी और फिर मामला दूसरी समिति के पास जाता था। दोनों की मंजूरी के बाद ही पेनल्टी जमा कर नोटिस वापस होता था। ये लागू हुई नई व्यवस्था अब इस प्रक्रिया में बदलाव करते हुए दूसरी समिति को खत्म कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत एक ही समिति बनाई गई है, जिसमें संबंधित प्रबंधक (सिविल), विभागीय कार्यालय अधीक्षक/प्रबंधक, महाप्रबंधक (नियोजन) द्वारा नामित अधिकारी, प्रभारी पुलिस निरीक्षक और दो अन्य सदस्य शामिल होंगे। यही समिति निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट देगी और उसी के आधार पर नोटिस वापसी का निर्णय लिया जाएगा।
क्या होगा फायदा
इस फैसले से नोटिस वापसी में लगने वाला समय कम होगा, प्राधिकरण को राजस्व भी तेजी से मिलेगा और आवंटियों को बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
नियम क्या कहते हैं


