सीएम बालक पोशाक योजना, 75% उपस्थिति होगी तभी मिलेगी ड्रेस

सीएम बालक पोशाक योजना, 75% उपस्थिति होगी तभी मिलेगी ड्रेस

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री बालक पोशाक योजना में अब सख्ती बढ़ा दी गई है। शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, अब छात्रों को ड्रेस के लिए मिलने वाली सहायता राशि तभी दी जाएगी जब उनकी उपस्थिति कम से कम 75% होगी। इस योजना के तहत कक्षा 1 से 8वीं तक के छात्रों को हर वर्ष पोशाक के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे नियमित रूप से स्कूल आएं और पढ़ाई से जुड़े रहें। सरकार का मानना है कि इस नई शर्त से बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ेगी और शिक्षा की निरंतरता बनी रहेगी। राशि का निर्धारण कक्षा के अनुसार अलग-अलग किया गया है। कक्षा 1 और 2 के छात्रों को 400 रूपए प्रति वर्ष, कक्षा 3 से 5 तक के छात्रों को ~500 प्रति वर्ष, जबकि कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को ‌‌~700 प्रति वर्ष की सहायता दी जाती है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल वर्ग के छात्रों के लिए कक्षा 1 से 5 तक ~600 और कक्षा 6 से 8 तक ~700 की सहायता निर्धारित है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम बच्चों को स्कूल से जोड़ने और ड्रॉपआउट दर को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब अभिभावकों और छात्रों दोनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियमित उपस्थिति बनी रहे। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री बालक पोशाक योजना में अब सख्ती बढ़ा दी गई है। शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, अब छात्रों को ड्रेस के लिए मिलने वाली सहायता राशि तभी दी जाएगी जब उनकी उपस्थिति कम से कम 75% होगी। इस योजना के तहत कक्षा 1 से 8वीं तक के छात्रों को हर वर्ष पोशाक के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे नियमित रूप से स्कूल आएं और पढ़ाई से जुड़े रहें। सरकार का मानना है कि इस नई शर्त से बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ेगी और शिक्षा की निरंतरता बनी रहेगी। राशि का निर्धारण कक्षा के अनुसार अलग-अलग किया गया है। कक्षा 1 और 2 के छात्रों को 400 रूपए प्रति वर्ष, कक्षा 3 से 5 तक के छात्रों को ~500 प्रति वर्ष, जबकि कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को ‌‌~700 प्रति वर्ष की सहायता दी जाती है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल वर्ग के छात्रों के लिए कक्षा 1 से 5 तक ~600 और कक्षा 6 से 8 तक ~700 की सहायता निर्धारित है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कदम बच्चों को स्कूल से जोड़ने और ड्रॉपआउट दर को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब अभिभावकों और छात्रों दोनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियमित उपस्थिति बनी रहे।  

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