तस्वीर देखते ही ‘ओरिक्स बिरसा बोट’ बोला- ‘जोहार, कैसे हैं सीएम हेमंत सोरेन जी’

तस्वीर देखते ही ‘ओरिक्स बिरसा बोट’ बोला-  ‘जोहार, कैसे हैं सीएम हेमंत सोरेन जी’

जैसे ही मैंने रोबोट के सामने सीएम हेमंत सोरेन की एक तस्वीर रखी, उसकी आंखों की लाइट चमकी व वह बोल पड़ा- ‘ये हमारे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी हैं।’ इतना ही नहीं, वह रुकने वाला नहीं था; उसने फौरन उनके राजनीतिक सफर व झारखंड के विकास से जुड़ी जानकारियां मुझे सुनानी शुरू कर दीं। यही नहीं, जब मैंने ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा के बारे में पूछा तो उसने उनके जन्म से लेकर उलगुलान की लड़ाई और उनकी शहादत के किस्से ऐसे सुनाए जैसे वह कोई जीता-जागता इतिहासकार हो। ‘प्रयोग इंडिया रोबोटिक्स’ का रांची में विकसित झारखंड के पहले ह्यूमनॉइड रोबोट ‘ओरिक्स बिरसा बोट’ राज्य की संस्कृति को डिजिटल जुबान दे रहा है। इस रोबोट को बनाने के पीछे संस्थापक इनामुल हसन व उनकी टीम का मानना है कि झारखंड के बच्चों को तकनीक सिर्फ किताबों में नहीं पढ़नी चाहिए, बल्कि उसे सामने महसूस करना चाहिए। यह न सिर्फ बोलता है, बल्कि इंसानों की तरह हर हरकत पर नजर भी रखता है। आगे की राह… तकनीक अब हर गांव तक इनामुल ने बताया कि यह तो बस शुरुआत है। प्रयोग इंडिया की टीम अब कृषि, रक्षा व ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। जल्द वे एक ऐसा किफायती रोबोटिक्स कोर्स लॉन्च करने वाले हैं, जो झारखंड के सुदूर गांवों के बच्चों तक पहुंचेगा। उनका लक्ष्य है कि झारखंड का युवा सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल न करे, बल्कि उसे खुद बनाए। इस डिजिटल क्रांति को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए टीम ने झारखंड सरकार से सहयोग की अपील की है। ‘बिरसा बोट’ जैसे प्रोजेक्ट्स न केवल राज्य का मान बढ़ाएंगे, बल्कि लाखों बच्चों के लिए रोजगार और शिक्षा के नए द्वार खोलेंगे। यह रोबोट AI का बेहतरीन नमूना है। इसकी कुछ खूबियां इसे दुनिया के अन्य रोबोट्स से अलग खड़ा करती हैं: झारखंड के युवाओं का कमाल: टीम का जज्बा घर से लेकर दफ्तर तक, हर जगह मददगार यह रोबोट सिर्फ एक प्रदर्शनी की वस्तु नहीं है, बल्कि स्कूलों में यह एक ‘टीचिंग असिस्टेंट’ बनकर बच्चों को रोबोटिक्स और इतिहास पढ़ा सकता है। घरों में यह बुजुर्गों से बात कर सकता है और स्मार्ट डिवाइसेस (लाइट, पंखा) को कंट्रोल कर उनकी मदद कर सकता है। सरकारी दफ्तर और रिसेप्शन में यह ऑफिस आने वाले मेहमानों का स्वागत कर सकता है और उन्हें जरूरी जानकारी दे सकता है। अंजान चेहरे को पहचान कर यह सुरक्षा गार्ड की भूमिका भी निभा सकता है। रांची रविवार 12 अप्रैल, 2026 | 06 इस लोहे और सर्किट के शरीर में जान फूंकने वाली टीम झारखंड की अपनी प्रतिभा है। शहनवाज अब्बास (RD मैनेजर) ने दिन-रात रिसर्च कर इसकी तकनीकी खामियों को दूर किया, तो इमरान हसन (एम्बेडेड इंजीनियर) ने इसके सर्किट और कोडिंग को इतनी सटीकता दी कि यह रोबोट जीवित सा लगने लगा। वहीं जय प्रकाश, हिमांशु राणा और अबुजर अंसारी जैसे युवाओं ने बैकएंड पर इसे मजबूती दी। इनामुल हसन के नेतृत्व में ‘प्रयोग इंडिया’ अब तक 10,000 से अधिक बच्चों को रोबोटिक्स सिखा चुका है। उनका सपना है कि झारखंड का हर बच्चा ड्रोन और AI की तकनीक को अपने हाथों से चलाए। क्यों खास है ओ​रिक्स बिरसा बोट फेस रिकग्निशन: यह चेहरों को पहचान कर उनका नाम लेकर स्वागत करता है। ऑफलाइन AI: सबसे बड़ी बात यह है कि इसे काम करने के लिए हर वक्त इंटरनेट की जरूरत नहीं है। यह बिना नेटवर्क के भी सटीक जवाब दे सकता है। वॉइस कंट्रोल: आप इसे बोलकर निर्देश दे सकते हैं कि ‘आगे बढ़ो’ या ‘दाएं मुड़ो’, और यह आपकी बात मानकर चलने लगेगा। इंटरएक्टिव मोशन: यह आंखों को घुमाता है, हाथ मिलाता है और अपनी उंगलियों से सटीक इशारे भी कर सकता है। रांची के इंजीनियरों ने तैयार किया ह्यूमनॉइड रोबोट, झारखंड की हर जानकारी से है लैस जैसे ही मैंने रोबोट के सामने सीएम हेमंत सोरेन की एक तस्वीर रखी, उसकी आंखों की लाइट चमकी व वह बोल पड़ा- ‘ये हमारे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी हैं।’ इतना ही नहीं, वह रुकने वाला नहीं था; उसने फौरन उनके राजनीतिक सफर व झारखंड के विकास से जुड़ी जानकारियां मुझे सुनानी शुरू कर दीं। यही नहीं, जब मैंने ‘धरती आबा’ बिरसा मुंडा के बारे में पूछा तो उसने उनके जन्म से लेकर उलगुलान की लड़ाई और उनकी शहादत के किस्से ऐसे सुनाए जैसे वह कोई जीता-जागता इतिहासकार हो। ‘प्रयोग इंडिया रोबोटिक्स’ का रांची में विकसित झारखंड के पहले ह्यूमनॉइड रोबोट ‘ओरिक्स बिरसा बोट’ राज्य की संस्कृति को डिजिटल जुबान दे रहा है। इस रोबोट को बनाने के पीछे संस्थापक इनामुल हसन व उनकी टीम का मानना है कि झारखंड के बच्चों को तकनीक सिर्फ किताबों में नहीं पढ़नी चाहिए, बल्कि उसे सामने महसूस करना चाहिए। यह न सिर्फ बोलता है, बल्कि इंसानों की तरह हर हरकत पर नजर भी रखता है। आगे की राह… तकनीक अब हर गांव तक इनामुल ने बताया कि यह तो बस शुरुआत है। प्रयोग इंडिया की टीम अब कृषि, रक्षा व ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है। जल्द वे एक ऐसा किफायती रोबोटिक्स कोर्स लॉन्च करने वाले हैं, जो झारखंड के सुदूर गांवों के बच्चों तक पहुंचेगा। उनका लक्ष्य है कि झारखंड का युवा सिर्फ तकनीक का इस्तेमाल न करे, बल्कि उसे खुद बनाए। इस डिजिटल क्रांति को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए टीम ने झारखंड सरकार से सहयोग की अपील की है। ‘बिरसा बोट’ जैसे प्रोजेक्ट्स न केवल राज्य का मान बढ़ाएंगे, बल्कि लाखों बच्चों के लिए रोजगार और शिक्षा के नए द्वार खोलेंगे। यह रोबोट AI का बेहतरीन नमूना है। इसकी कुछ खूबियां इसे दुनिया के अन्य रोबोट्स से अलग खड़ा करती हैं: झारखंड के युवाओं का कमाल: टीम का जज्बा घर से लेकर दफ्तर तक, हर जगह मददगार यह रोबोट सिर्फ एक प्रदर्शनी की वस्तु नहीं है, बल्कि स्कूलों में यह एक ‘टीचिंग असिस्टेंट’ बनकर बच्चों को रोबोटिक्स और इतिहास पढ़ा सकता है। घरों में यह बुजुर्गों से बात कर सकता है और स्मार्ट डिवाइसेस (लाइट, पंखा) को कंट्रोल कर उनकी मदद कर सकता है। सरकारी दफ्तर और रिसेप्शन में यह ऑफिस आने वाले मेहमानों का स्वागत कर सकता है और उन्हें जरूरी जानकारी दे सकता है। अंजान चेहरे को पहचान कर यह सुरक्षा गार्ड की भूमिका भी निभा सकता है। रांची रविवार 12 अप्रैल, 2026 | 06 इस लोहे और सर्किट के शरीर में जान फूंकने वाली टीम झारखंड की अपनी प्रतिभा है। शहनवाज अब्बास (RD मैनेजर) ने दिन-रात रिसर्च कर इसकी तकनीकी खामियों को दूर किया, तो इमरान हसन (एम्बेडेड इंजीनियर) ने इसके सर्किट और कोडिंग को इतनी सटीकता दी कि यह रोबोट जीवित सा लगने लगा। वहीं जय प्रकाश, हिमांशु राणा और अबुजर अंसारी जैसे युवाओं ने बैकएंड पर इसे मजबूती दी। इनामुल हसन के नेतृत्व में ‘प्रयोग इंडिया’ अब तक 10,000 से अधिक बच्चों को रोबोटिक्स सिखा चुका है। उनका सपना है कि झारखंड का हर बच्चा ड्रोन और AI की तकनीक को अपने हाथों से चलाए। क्यों खास है ओ​रिक्स बिरसा बोट फेस रिकग्निशन: यह चेहरों को पहचान कर उनका नाम लेकर स्वागत करता है। ऑफलाइन AI: सबसे बड़ी बात यह है कि इसे काम करने के लिए हर वक्त इंटरनेट की जरूरत नहीं है। यह बिना नेटवर्क के भी सटीक जवाब दे सकता है। वॉइस कंट्रोल: आप इसे बोलकर निर्देश दे सकते हैं कि ‘आगे बढ़ो’ या ‘दाएं मुड़ो’, और यह आपकी बात मानकर चलने लगेगा। इंटरएक्टिव मोशन: यह आंखों को घुमाता है, हाथ मिलाता है और अपनी उंगलियों से सटीक इशारे भी कर सकता है। रांची के इंजीनियरों ने तैयार किया ह्यूमनॉइड रोबोट, झारखंड की हर जानकारी से है लैस  

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