4 महीनों में बदलेगा शहर का भू-नक्शा…38 हजार संपत्तियों का तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड

गांवों में ऑनलाइन जमाबंदी की तर्ज पर अब शहरों में शहरी भूमि के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नक्शा पायलट प्रोजेक्ट के तहत जैसलमेर में व्यापक सर्वे और डाटा संकलन कार्य शुरू किया गया है। डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम यानी डीआइएलआरएमपी के तहत भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग की ओर से देश के 157 नगरीय निकायों में इस महत्वाकांक्षी योजना को लागू किया जा रहा है।

इनमें राजस्थान के 10 शहरों में जैसलमेर शामिल है और यहां परियोजना का क्रियान्वयन शुरू हो चुका है। परियोजना के तहत शहर की करीब 38 हजार से अधिक संपत्तियों का डिजिटलीकरण आगामी चार माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नगरपरिषद् ने 11 विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है, जो आधुनिक जीपीएस उपकरणों के माध्यम से घर-घर जाकर भूखंडों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं। बताया जाता है कि इस प्रक्रिया से न केवल सटीक भू-रिकॉर्ड तैयार होंगे, बल्कि भविष्य में भूमि से जुड़े विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।

अब तक यहां हुआ सर्वे

अब तक सर्वे टीमों ने शहर की इन्दिरा कॉलोनी, गांधी कॉलोनी और गोवर्धन दास कल्ला कॉलोनी में सर्वे कार्य पूरा कर लिया है। क्षेत्रों में 2000 से अधिक भूखंडों का डाटा संकलित कर डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ऐतिहासिक दुर्ग सहित अन्य क्षेत्रों में कार्य चल रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सर्वे कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए टीमों की संख्या और संसाधनों में भी आवश्यकता अनुसार वृद्धि की जा रही है। आगामी सप्ताह में यह अभियान और तेज होगा। सर्वे टीमें राजेन्द्र नगर कॉलोनी, ट्रांसपोर्ट नगर और जयनारायण व्यास कॉलोनी में घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित करेंगी। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की गई है कि वे आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराकर सहयोग करें ताकि कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।

प्रत्येक भूखंड मालिक को मिलेगा कार्ड

परियोजना पूरी होने के बाद प्रत्येक भूखंड मालिक को अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड जारी किया जाएगा। इस कार्ड के माध्यम से नागरिक अपने भूखंड से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी नक्शा पोर्टल पर ऑनलाइन देख सकेंगे। प्रॉपर्टी टैक्स, भवन निर्माण स्वीकृति, भू-उपयोग परिवर्तन और लीज डीड जैसे दस्तावेज एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे, जिससे प्रक्रियाएं सरल और पारदर्शी बनेंगी। परियोजना के पहले चरण में सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से शहर का ड्रोन से मैप बनाया जा चुका है। अब नगरपरिषद की ओर से लगाई गई टीमें एक-एक भवन को माप कर ड्रोन वाले नक्शे पर रख कर उसका मिलान करेंगी।

होगा सुनियोजित विकास, बढ़ेगी पारदर्शिता

नक्शा परियोजना शहर के सुनियोजित विकास और डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम है। समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए नागरिकों की भागीदारी बेहद आवश्यक है। आमजन से सहयोग लिया जा रहा है।

– लजपालसिंह सोढ़ा, आयुक्त, नगरपरिषद जैसलमेर

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