लखनऊ के गोमती नगर स्थित भारतीय सर्वेक्षण विभाग के निदेशालय में राष्ट्रीय सर्वेक्षण दिवस का आयोजन किया गया। यह दिवस 1802 में चेन्नई के सेंट थामस माउंट से शुरू हुए पहले वैज्ञानिक वृहत्त कोणमितीय सर्वेक्षण की याद दिलाता है, जिसने भारत में आधुनिक सर्वेक्षण की नींव रखी थी। विभाग के निदेशक डीएन पाठक ने इस अवसर पर बताया कि ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे (GTS) को पूरा होने में 68 वर्ष का लंबा समय लगा था। इसके परिणामस्वरूप, वर्ष 1870 में जीटीएस इंडेक्स मानचित्र प्रकाशित किया गया, जिसे उस समय की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है कार्यक्रम के दौरान महान सर्वेक्षकों, खगोल विज्ञान विशेषज्ञों, नाविकों और अभियंताओं के महत्वपूर्ण योगदान को स्मरण किया गया। इनके कार्यों ने देश की भौगोलिक समझ को सुदृढ़ किया और आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। पाठक ने यह भी बताया कि वर्तमान में भू-मापन और सर्वेक्षण के लिए जियोडेटिक सर्वे, सटीक लेवलिंग और ज्वारीय प्रेक्षण जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इन तरीकों से सटीक आंकड़े एकत्र किए जाते हैं।वर्तमान में, विभाग उत्तर प्रदेश में स्वामित्व, नक्शा, अमृत-2, द्रोणगिरि और भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा सर्वेक्षण जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड और सीमाओं की सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।


