गयाजी में किसान परेशान, ढाढर परियोजना में नहीं पहुंचा पानी:कांग्रेस ने राज्यपाल को लिखा पत्र, झारखंड के तिलैया जलाशय से पानी छोड़ने की मांग

गयाजी में किसान परेशान, ढाढर परियोजना में नहीं पहुंचा पानी:कांग्रेस ने राज्यपाल को लिखा पत्र, झारखंड के तिलैया जलाशय से पानी छोड़ने की मांग

गयाजी में दक्षिण बिहार की बहुप्रतीक्षित ढाढर सिंचाई परियोजना में पानी की समस्या को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। आज फतेहपुर प्रखंड के सोहजना–दोनैया गांव स्थित ढाढर नदी पर बने बराज के पास कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय किसानों-मजदूरों ने महाधरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड के तिलैया जलाशय से नियमित रूप से पानी छोड़ने की मांग की। परियोजना गया, जहानाबाद, नवादा और नालंदा के लाखों हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए बनी थी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि साल 2020 में मुख्यमंत्री की ओर से लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से बने बराज का उद्घाटन किया गया था। उस समय झारखंड से पानी आपूर्ति का समझौता भी हुआ था, लेकिन अब तक परियोजना में एक बूंद पानी भी नहीं पहुंचा है। अनियमित बिजली पर निर्भर रहने को मजबूर पानी न मिलने के कारण क्षेत्र के किसान पूरी तरह से प्राकृतिक बारिश, महंगी डीजल सिंचाई और अनियमित बिजली पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। किसानों ने बताया कि लगभग 26 किलोमीटर लंबी रामपुर शाखा नहर केवल बारिश के मौसम में ही उपयोग में आती है। वहीं, नवादा की ओर जाने वाली दूसरी नहर की योजना अधूरी है और उसका अस्तित्व भी मिटता जा रहा है, जिससे हजारों एकड़ भूमि बंजर हो रही है। इस प्रदर्शन में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू, प्रखंड अध्यक्ष बालमुकुंद पांडेय, युवा कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद कुमार यादव सहित कई स्थानीय नेता और सैकड़ों किसान शामिल हुए। सभी ने केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे को लेकर 2018 से लंबित मामला अब तक केंद्रीय ट्रिब्यूनल में अटका हुआ है, जिससे यह समस्या और अधिक जटिल हो गई है। आंदोलन को तेज करने की दी चेतावनी उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लेकर तिलैया जलाशय से ढाढर नदी में पानी छोड़ा जाए, ताकि परियोजना का वास्तविक फायदा किसानों तक पहुंच सके। कार्यक्रम के अंतिम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और जिला प्रशासन को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। ढाढर परियोजना अब केवल एक अधूरी योजना नहीं, बल्कि दक्षिण बिहार के किसानों की उम्मीद और संघर्ष का प्रतीक बन चुकी है। गयाजी में दक्षिण बिहार की बहुप्रतीक्षित ढाढर सिंचाई परियोजना में पानी की समस्या को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। आज फतेहपुर प्रखंड के सोहजना–दोनैया गांव स्थित ढाढर नदी पर बने बराज के पास कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और स्थानीय किसानों-मजदूरों ने महाधरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड के तिलैया जलाशय से नियमित रूप से पानी छोड़ने की मांग की। परियोजना गया, जहानाबाद, नवादा और नालंदा के लाखों हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए बनी थी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि साल 2020 में मुख्यमंत्री की ओर से लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से बने बराज का उद्घाटन किया गया था। उस समय झारखंड से पानी आपूर्ति का समझौता भी हुआ था, लेकिन अब तक परियोजना में एक बूंद पानी भी नहीं पहुंचा है। अनियमित बिजली पर निर्भर रहने को मजबूर पानी न मिलने के कारण क्षेत्र के किसान पूरी तरह से प्राकृतिक बारिश, महंगी डीजल सिंचाई और अनियमित बिजली पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। किसानों ने बताया कि लगभग 26 किलोमीटर लंबी रामपुर शाखा नहर केवल बारिश के मौसम में ही उपयोग में आती है। वहीं, नवादा की ओर जाने वाली दूसरी नहर की योजना अधूरी है और उसका अस्तित्व भी मिटता जा रहा है, जिससे हजारों एकड़ भूमि बंजर हो रही है। इस प्रदर्शन में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू, प्रखंड अध्यक्ष बालमुकुंद पांडेय, युवा कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद कुमार यादव सहित कई स्थानीय नेता और सैकड़ों किसान शामिल हुए। सभी ने केंद्र और राज्य सरकारों पर दबाव बनाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि बिहार और झारखंड के बीच जल बंटवारे को लेकर 2018 से लंबित मामला अब तक केंद्रीय ट्रिब्यूनल में अटका हुआ है, जिससे यह समस्या और अधिक जटिल हो गई है। आंदोलन को तेज करने की दी चेतावनी उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर जल्द निर्णय लेकर तिलैया जलाशय से ढाढर नदी में पानी छोड़ा जाए, ताकि परियोजना का वास्तविक फायदा किसानों तक पहुंच सके। कार्यक्रम के अंतिम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री और जिला प्रशासन को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। ढाढर परियोजना अब केवल एक अधूरी योजना नहीं, बल्कि दक्षिण बिहार के किसानों की उम्मीद और संघर्ष का प्रतीक बन चुकी है।  

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