राजस्थान-मसालों का कारोबार ठप, इंश्योरेंस भी नहीं कर रही कंपनियां:युद्ध के कारण हर दिन करोड़ों का नुकसान, 10 गुना बढ़ी शिपिंग की रेट

राजस्थान-मसालों का कारोबार ठप, इंश्योरेंस भी नहीं कर रही कंपनियां:युद्ध के कारण हर दिन करोड़ों का नुकसान, 10 गुना बढ़ी शिपिंग की रेट

मिडिल ईस्ट वॉर के कारण राजस्थान का मसाला कारोबार करोड़ों का नुकसान झेल रहा है। यहां से खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले ईसबगोल और जीरे का एक्सपोर्ट पूरी तरह से बंद है। सौंफ, ग्वार समेत कई मसाला फसलों से भरे कंटेनर्स की आवाजाही भी है। शिपिंग के चार्ज 10 गुना तक बढ़ गए हैं। बमबारी और सामान बीच रास्ते अटकने के कारण इंश्योरेंस कंपनियों ने बीमा करने से मना कर दिया है। इसके कारण व्यापारी भी माल की भेजने से घबरा रहे हैं। हाल यह है कि हर दिन अकेले नागौर मंडी के कारोबारियों को 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। मंडी कारोबारियों का दावा है कि- हॉर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कारोबार में 30 से फीसदी तक गिरावट आई है। 40 दिनों में ही 80 करोड़ से ज्यादा का नुकसान मंडी व्यापारियों का कहना है- नागौर से जीरे, सौंफ, ईसबगोल की सप्लाई गुजरात की ऊंझा और मुंबई की मंडी में होती है। वहां से एक्सपोटर्स जीरे व अन्य फसलों को सउदी अरब, बहरीन, कतर सहित दूसरे मिडिल ईस्ट के देशों में बेचते हैं। युद्ध के कारण बड़े एक्सपोटर्स माल नहीं ले रहे हैं। युद्ध के सिर्फ 40 दिनों के भीतर अकेले नागौर के मसाला कारोबारियों को 80 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। इंश्योरेंस कंपनियों का बीमा करने से इनकार नागौर मंडी के व्यापारी अनुराग पूनिया का कहना है- एक्सपोर्ट लगभग बंद है। पहले समुद्री रास्ते से बड़े कंटेनर में माल भेजते थे, लेकिन अब एयर कार्गो से छोटे बॉक्स में माल की सप्लाई कर रहे हैं। क्योंकि शिपिंग के चार्ज 10 गुना तक बढ़ गए हैं। युद्ध से पहले जो चार्ज 20 डॉलर (करीब 1800 रुपए) प्रति क्विंटल था, अब वही 200 डॉलर (करीब 19000 रुपए) प्रति क्विंटल के हिसाब से जा रहा है। इसके बाद भी रिस्क को देखते हुए इंश्योरेंस कंपनियां माल का बीमा (इंश्योरेंस) नहीं कर रही हैं। युद्ध और मौसम दोनों की मार से कारोबार बर्बाद नागौर मंडी के निदेशक पवन भट्टड़ का कहना है- ग्वार का एक्सपोर्ट पहले हर महीने 20 से 25 हजार टन तक होता था, युद्ध के कारण जबरदस्त गिरावट आई है। वहीं, इस साल उत्पादन भी कम हुआ है। पिछले सालों में ग्वार का उत्पादन करीब 1 करोड़ बोरी होता था। लेकिन इस साल कम बारिश और फसल के समय चली विपरीत हवाओं के कारण यह घटकर लगभग 50 लाख बोरी रह गया है। नेपाल और चीन को जा रहा माल, वर्ना पूरा कारोबार ही डाउन व्यापार मंडल के अध्यक्ष मूलचंद भाटी का कहना है- हमारे यहां से हल्की क्वालिटी का जीरा एक्सपोर्ट में जाता है। एक्सपोर्ट बंद होने की वजह से जिस जीरे की कीमत अब तक 25 से 26 हजार हो जानी चाहिए थी, वो अभी 21 हजार पर ठहरी हुई है। घरेलू मांग भी कमजोर है। देश के कई हिस्सों में गैस की किल्लत और युद्ध के माहौल के कारण व्यापारियों की खरीदारी भी प्रभावित हुई है, जिससे मंडी में मंदी का माहौल बना हुआ है। ईसबगोल और जीरे का एक्सपोर्ट ठप व्यापारी पारस मल दुगड़ का कहना है- कि खाड़ी देशों के बाजार खुलने पर ईसबगोल की मांग में तेजी आएगी। किसानों के पास इस समय सरसों, चना और तारामीरा जैसी अन्य फसलों के अच्छे भाव उपलब्ध हैं। इसलिए वे ईसबगोल और सौंफ को रोककर धीरे-धीरे बाजार में लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके कारण बाजार में फिलहाल आवक कम है। पिछले साल की तुलना में इस बार ईसबगोल की बुआई भी करीब 60 प्रतिशत ही हुई है और फसल में 15 से 40 प्रतिशत तक का नुकसान भी हुआ है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में सिर्फ भविष्य पर ही कारोबार की संभावना टिकी है। …. अमेरिका-ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट से जुड़ी ये 2 खबरें भी पढ़िए… 1. राजस्थान के सोजत में मेहंदी की फैक्ट्रियों में काम बंद:250 करोड़ से ज्यादा का ऑर्डर अटका, व्यापारी बोले-मजदूरों को घर भेजना पड़ रहा है अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की आग में मारवाड़ की विश्व प्रसिद्ध मेहंदी उद्योग भी झुलस रहा है। राजस्थान के सोजत (पाली) में 150 से ज्यादा फैक्ट्रियों में मशीनों के पहिए थम गए हैं। 2200 से ज्यादा मजदूरों को घर भेजा जा चुका है। (पढ़ें पूरी खबर) 2. राजस्थान में सैकड़ों फैक्ट्रियां बंद, हजारों लोग बेरोजगार, डिमांड लगातार कम हो रही, घाटा करोड़ों में अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध के कारण राजस्थान का मिनरल उद्योग प्रभावित हुआ है। गुजरात के मोरबी की सिरेमिक इंडस्ट्रीज में डिमांड घटने से करीब 2300 से ज्यादा मिनरल्स-ग्राइंडिंग यूनिट्स बंद हो गई हैं। (पढ़ें पूरी खबर)

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