बीकानेर में भुजिया की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की तैयारी है, जहां हाल ही में 20 रुपए प्रति किलो बढ़ने के बाद मजदूरों की मजदूरी मांग के चलते और 20 रुपए तक बढ़ सकती है। यह बदलाव एक-दो दिनों में लागू हो सकता है। कच्चे माल, पैकिंग और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण लागत बढ़ी है, जबकि मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के तनाव से निर्यात प्रभावित हुआ है। एक्सपोर्ट महंगा होने से 800 से ज्यादा व्यापारी प्रभावित हैं और 100 कंटेनर रास्ते में अटके हुए हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई समय 25-30 दिन से बढ़कर 50-60 दिन हो गया है, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ी है। एक्सपोर्ट महंगा, फैक्ट्रियों में काम कम निर्यातक वेद प्रकाश अग्रवाल के अनुसार एक्सपोर्ट की दरें बढ़ने से भुजिया उद्योग पर असर दिख रहा है। भुजिया बनाने वाली फैक्ट्रियों में कामकाज कम हुआ है और उत्पादन प्रभावित हुआ है। बीकानेर में 800 से ज्यादा भुजिया व्यवसायी इस उद्योग से जुड़े हैं, जहां रोज करीब 10 टन उत्पादन होता है। इसमें से करीब 70 प्रतिशत माल निर्यात किया जाता है, जो अब प्रभावित हो रहा है। मजदूरी और लागत से बढ़े दाम भुजिया मजदूरों ने प्रति इकाई 15 रुपए मजदूरी बढ़ाने की मांग की है। इसके कारण कीमतों में और 20 रुपए प्रति किलो तक बढ़ोतरी संभव है। पहले ही परिवहन लागत के चलते 20 रुपए प्रति किलो की वृद्धि हो चुकी है। व्यापारियों का कहना है कि बढ़ी हुई लागत का पूरा असर ग्राहकों पर डाला जाएगा। कच्चे माल और पैकिंग महंगी व्यापारी ऋषि पुरोहित के अनुसार डॉलर महंगा होने से खाद्य तेल करीब 20 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। इसके साथ ही पॉलिथीन, कार्टन और अन्य पैकिंग सामग्री के दाम भी बढ़े हैं। सारा रॉ मटेरियल महंगा होने से उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है और स्थानीय बाजार में भुजिया पहले ही 20 रुपए प्रति किलो महंगी हो चुकी है। निर्यात पर असर और देरी मध्य पूर्व में तनाव के कारण खाड़ी और यूरोपीय देशों में भुजिया, पापड़ और नमकीन की सप्लाई प्रभावित हो रही है। कंटेनरों की कमी और सुरक्षित मार्ग अपनाने से माल पहुंचने का समय 25-30 दिन से बढ़कर 50-60 दिन हो गया है। इससे भाड़ा और लागत दोनों बढ़े हैं। रास्ते में अटका माल, 100 कंटेनर फंसे जो माल निर्यात के लिए भेजा जा चुका है, वह भी रास्ते में अटका हुआ है। बीकानेर की करीब 10 यूनिट्स के लगभग 100 कंटेनर एक्सपोर्ट के लिए फंसे हुए हैं। इससे कारोबारियों को 20-30 करोड़ रुपए तक का आर्थिक नुकसान की आशंका है और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। निर्यातकों की चिंता और सीजन पर असर निर्यातक वेद प्रकाश अग्रवाल के अनुसार अगले तीन महीने नमकीन उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी समय खाड़ी और यूरोप में मांग अधिक रहती है। लेकिन बढ़ते किराए, लंबा ट्रांजिट टाइम और अनिश्चित हालात के कारण व्यापारी अपनी तैयारियों में बदलाव पर विचार कर रहे हैं। विदेशी खरीदार भी बढ़ती कीमतों को लेकर मोलभाव कर रहे हैं। देश के बड़े भुजिया निर्माता बीकाजी ने हाल ही में कीमतों में 10 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की है। पहले 220 रुपए किलो मिलने वाला भुजिया अब 230 रुपए प्रति किलो हो गया है। कंपनी ने पैकेजिंग सामग्री महंगी होने को वजह बताया है। जीएसटी कम होने से पहले कीमत 230 से घटकर 220 हुई थी, जो अब फिर बढ़ाकर 230 कर दी गई है। स्थानीय बाजार और अन्य असर भुजिया के दाम में कुल 40 रुपए तक बढ़ोतरी की स्थिति बन रही है। हालांकि इस बढ़ोतरी से छोटे दुकानदार, कारीगर, कर्मचारियों और किसानों पर सीधा असर नहीं बताया गया है, क्योंकि लागत का भार ग्राहकों पर डाला गया है। अन्य नमकीन उत्पादों पर अभी असर नहीं है और मांग में भी कोई कमी नहीं देखी जा रही है।


